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Home झारखण्ड साहिबगंज शेरशाहबादी समुदाय को मिलेगी पहचान, उच्चस्तरीय कमेटी में बरहरवा से चार शामिल

शेरशाहबादी समुदाय को मिलेगी पहचान, उच्चस्तरीय कमेटी में बरहरवा से चार शामिल

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शेरशाहबादी समुदाय को मिलेगी पहचान, उच्चस्तरीय कमेटी में बरहरवा से चार शामिल
साहिबगंज (फाइल फोटो)

बरहरवा

शेरशाहबादी समुदाय को अपनी ही जाति की पहचान के लिये लंबी लड़ाई लड़नी पड़ रही है. वर्ष 2012 के बाद से समुदाय के लोगों को शेरशाहबादी का जाति प्रमाण-पत्र नहीं मिल पा रहा है. इस कारण कई छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया है. पूर्व मंत्री आलमगीर आलम, राजमहल विधायक एमटी राजा के आश्वासन के बाद उपायुक्त के निर्देश पर बनने वाली उच्च स्तरीय कमेटी में शामिल पदाधिकारी और शेरशाहबादी समुदाय के प्रत्येक प्रखंडों से चार लोग बकरीद के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में जायेंगे. शेरशाहबादी समुदाय के लोगों की खान-पान, रहन-सहन, वेश-भूषा, काम-काज और भाषा व संस्कृति की जानकारी लेंगे. साथ ही इसकी रिपोर्ट उपायुक्त के माध्यम से राज्य सरकार को भेजेंगे. इसके बाद पूर्व मंत्री आलमगीर आलम, राजमहल विधायक एमटी राजा, पाकुड़ विधायक निसात आलम सहित अन्य जनप्रतिनिधि मुख्यमंत्री से मिलकर इसका समाधान करेंगे. इधर, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के आश्वासन के बाद शेरशाहबादी समुदाय के लोगों में यह उम्मीद जगी है कि करीब 13-14 वर्षों बाद एक बार पुनः उनके समुदाय के लोगों को उनकी पहचान मिलेगी. उन्हें शेरशाहबादी जाति प्रमाण-पत्र बिना किसी परेशानी के निर्गत हो सकेगा. इससे उनके समुदाय के छात्र-छात्राओं और जरूरतमंदों को लाभ मिल सकेगा.

बरहरवा से चार लोग शेरशाहबादी कमेटी में हैं शामिल

शेरशाहबादी समुदाय के लोगों को अपनी ही पहचान के लिये लंबी लड़ाई लड़नी पड़ रही है. हम लोग चाहते हैं कि पदाधिकारी जल्द हमारे गांव आयें और जांच करें, ताकि हमारे लोगों को पहचान मिल सके.

मोहम्मद इश्तियाक

सरकारी सिस्टम के कारण शेरशाहबादी जाति प्रमाण-पत्र मिलना वर्ष 2012 से बंद है. कुछ लोगों को वर्ष 2014 में प्रमाण-पत्र मिला था. प्रमाण-पत्र नहीं मिलने से कई लोगों का चयन सरकारी सेवा में नहीं हो पाया.

मो मूसा

जिन लोगों को वर्ष 2012 से पहले शेरशाहबादी प्रमाण-पत्र मिला. उनमें से कई लोग ऐसे हैं, जो उच्च सरकारी पदों पर आज अपनी सेवा दे रहे हैं. आरक्षण नहीं मिलने से हम लोग पिछड़ते जा रहे हैं.

अजमाईल शेख

यह हमलोगों की हक की लड़ाई है. इस बार लग रहा है कि सफल होगा. बावजूद भी हमारा शेरशाहबादी जाति प्रमाण-पत्र नहीं मिलता है तो हम लोग अब धरना ब्लॉक मुख्यालय में नहीं सड़क पर देंगे.

मामुद हसन

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