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35 आंगनबाड़ी केंद्रों में मूलभूत सुविधाएं नहीं, कई के भवन हैं जर्जर

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35 आंगनबाड़ी केंद्रों में मूलभूत सुविधाएं नहीं, कई के भवन हैं जर्जर

मंडरो. प्रखंड में प्रभारी सीडीपीओ व पर्यवेक्षिका के भरोसे 99 आंगनबाड़ी केंद्र चल रहे हैं. इसमें से 69 केंद्रों का संचालन सरकारी भवनों में हो रहा है, तो 40 आंगनबाड़ी केंद्र भाड़े के मकान में चल रहे हैं. अभी भी कई आंगनबाड़ी केंद्र में मूलभूत सुविधाओं की कमी है. भवन जर्जर हो चुका है. केंद्र में खिड़की तक नहीं है. ऐसे में आंगनबाड़ी केंद्र को चलाना आंगनबाड़ी सेविकाओं के लिए काफी चुनौती से कम नहीं है. मंडरो क्षेत्र में कुल 12 पंचायत है. इसमें सभी पंचायत मिला कर 99 आंगनबाड़ी केंद्र हैं. 35 आंगनबाड़ी केंद्र में अबतक बिजली-पानी की सुविधा उपलब्ध नहीं हो पायी है. 64 आंगनबाड़ी केंद्रों में फिलहाल बिजली-पानी की सुविधा उपलब्ध है. यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि 35 केंद्र के बच्चे गर्मी के दिनों में बिना पंखा और पानी कैसे-कैसे आंगनबाड़ी केंद्र में पढ़ाई करते होंगे. बात करें शौचालय की सरकारी भवन में संचालित कुछ आंगनबाड़ी केंद्रों में शौचालय की सुविधा उपलब्ध है, तो कुछ केंद्रों में शौचालय की सुविधा उपलब्ध नहीं है. प्रत्येक वर्ष 40 हजार रुपये किराया में होता है खर्च प्रखंड में कुल 40 आंगनबाड़ी केंद्र भाड़े के मकान में संचालित है. प्रति केंद्र एक हजार रुपये प्रति माह सरकारी दर पर भाड़ा दिया जाता है. लेकिन यहां कुल 40 आंगनबाड़ी केंद्र भाड़े के मकान में चल रहा है. इसमें कुल मिलाकर प्रत्येक वर्ष 40 हजार रुपये सरकार आंगनबाड़ी केंद्र चलाने के लिए खर्च कर रही है. क्या कहतीं हैं पर्यवेक्षिका बाल विकास परियोजना कार्यालय में एक क्लर्क, दो महिला पर्यवेक्षिका और चतुर्थवर्गीय कर्मी की आवश्यकता है. अगर इन लोगों का यहां पर पदस्थापन हो जाता है तो प्रखंड के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन ठीक प्रकार हो पायेगा. शांति हांसदा, महिला पर्यवेक्षिका, मंडरो क्या कहते हैं प्रभारी सीडीपीओ फोटो नं 06 एसबीजी 22 है कैप्शन – रविवार को बीडीओ सह सीडीपीओ आंगनबाड़ी केंद्र सुचारू रूप से चले. इसके लिए निरीक्षण भी किया जाता है. केंद्र बंद न रहे. नियमित चले इस पर सेविकाओं को हिदायत दी गयी है, जो आंगनबाड़ी केंद्र जर्जर अवस्था में हैं, उसकी सूची मिलने पर उसे दुरुस्त करवाने का कार्य किया जायेगा. मेघनाथ उरांव, बीडीओ सह प्रभारी सीडीपीओ

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