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Home झारखण्ड साहिबगंज भगवान राम के वनवास प्रसंग का किया गया वर्णन

भगवान राम के वनवास प्रसंग का किया गया वर्णन

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भगवान राम के वनवास प्रसंग का किया गया वर्णन

मंडरो. मिर्जाचौकी नयाटोला गैलेक्सी मैदान चैती दुर्गा मंदिर परिसर में नौ दिवसीय राम कथा चल रहा है. इसके पांचवें दिन अयोध्या से आए व्यास रामदास जी महाराज ने भगवान राम के वनवास गमन पर प्रवचन दिया. कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम ने माता-पिता की आज्ञा को अपने सिद्धांतों में सर्वोपरि स्थान दिये. भ्रातृत्व प्रेम को जताया है. बताया कि श्री हरि विष्णु जी का त्रैतायुग में अवतार मनुष्य तन में राम के रूप में हुआ और लक्ष्मी जी सीता माता के रूप में राजा जनक के यहां जन्म ली, मर्यादित राष्ट्र का निर्माण करने के उद्देश्य एवं इस धरा पर कर्तव्य, निष्ठा, ईमानदारी, शिष्टाचार, माता-पिता गुरु की मर्यादित होकर उस युग को संवारने एवं अर्धमी, अभिमानी, असुरत्व को समाप्त कर पुरुषोत्तम कहलाये. वहीं माता पिता की आज्ञा का पालन करना, वहीं पतिव्रत धर्म का पालन करने की बात माता सीता के बारे में प्रवचन दिया. केवट प्रसंग में भक्त और भगवान में अटूट प्रेम के बारे में बताया. मौके पर नवगछिया से आये कीर्तन मंडली के मृत्युंजय पांडेय, रंजीत शर्मा, विवेक कुमार, मुख्य जजमान जगत पासवान, सोनी देवी, आदित्य कुमार, वाल्मीकि मंडल, टिंकू ठाकुर आदि मौजूद रहे.

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