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Home झारखण्ड साहिबगंज जिले के 1650 आंगनबाड़ी केंद्रों में आठ माह से टीएचआर आपूर्ति ठप

जिले के 1650 आंगनबाड़ी केंद्रों में आठ माह से टीएचआर आपूर्ति ठप

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जिले के 1650 आंगनबाड़ी केंद्रों में आठ माह से टीएचआर आपूर्ति ठप

साहिबगंज

जिले के 1650 आंगनबाड़ी केंद्रों में पिछले करीब आठ माह से टेक होम राशन की आपूर्ति पूरी तरह ठप है. इससे गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और सात माह से 3 वर्ष तक के छोटे बच्चों को मिलने वाला अनिवार्य पूरक पोषाहार नहीं मिल पा रहा है. कुपोषण से लड़ने के लिए चलायी जा रही योजना की यह स्थिति जिले में मातृ व शिशु स्वास्थ्य के लिए गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है. महिला, बाल विकास व सामाजिक सुरक्षा विभाग, झारखंड सरकार द्वारा जारी पत्र के अनुसार पूरक पोषाहार कार्यक्रम के तहत मई के लिए एमएफइडीएफ सामग्री की आपूर्ति के लिए सप्लायर को निर्देश दिया गया है. पत्र में बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं के लिए जिलावार निर्धारित मात्रा का भी उल्लेख है. इसके बावजूद जिले के आंगनबाड़ी केंद्रों तक अब तक टीएचआर नहीं पहुंच पायी है, जिससे विभागीय आदेश और जमीनी हकीकत के बीच बड़ा अंतर सामने आ रहा है.

लाभुक महिलाएं परेशान, बच्चों पर सीधा असर

ग्रामीण क्षेत्रों की लाभुक महिलाओं का कहना है कि आंगनबाड़ी से मिलने वाला पोषाहार उनके बच्चों और स्वयं उनके लिए पोषण का मुख्य आधार था. मुन्नी देवी, सरिता देवी, ममता देवी और मोनी देवी ने बताया कि लंबे समय से टीएचआर नहीं मिलने के कारण गर्भावस्था के दौरान कमजोरी, थकान और चक्कर जैसी समस्याएं बढ़ गई हैं. धात्री माताओं का कहना है कि पर्याप्त पोषण न मिलने से स्तनपान पर असर पड़ रहा है, जिससे शिशुओं का स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है. महिलाओं को पर्याप्त पोषण न मिलने से एनीमिया, कम वजन के शिशु का जन्म और प्रसव से जुड़ी जटिलताओं का खतरा बढ़ जाता है. वहीं 7 माह से 3 वर्ष तक के बच्चों में पोषण की कमी से उनका शारीरिक और मानसिक विकास बाधित हो सकता है.यह उम्र बच्चों के विकास के लिए सबसे संवेदनशील मानी जाती है, ऐसे में टीएचआर की अनुपलब्धता भविष्य के लिए गंभीर संकेत मानी जा रही है. एनीमिया व कुपोषण का भी खतरा बना रहता है.

प्रदेश संगठन की मांग बिहार मॉडल लागू हो

आंगनबाड़ी के प्रदेश स्तरीय संगठन ने राज्य सरकार से मांग की है कि बिहार की तर्ज पर झारखंड में भी आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन किया जाये. संगठन का कहना है कि बिहार में गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और केंद्र में पंजीकृत बच्चों को नियमित रूप से पोषाहार दिया जा रहा है, जबकि झारखंड में बार-बार आपूर्ति बाधित हो रही है, जिससे योजना का उद्देश्य ही प्रभावित हो रहा है.

क्या कहते हैं पदाधिकारी

आपूर्तिकर्ता स्तर पर सामग्री उपलब्ध नहीं होने के कारण पिछले कई माह से टीएचआर का वितरण बाधित है. विभाग से चयन किया गया है. सप्लायर से सामग्री प्राप्त होगी, सभी आंगनबाड़ी केंद्रों में वितरण शुरू कर दिया जायेगा.

संजय कुमार दास, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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