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भारतीय गौरव के प्रतीक हैं राष्ट्रकवि दिनकर : सच्चिदानंद

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भारतीय गौरव के प्रतीक हैं राष्ट्रकवि दिनकर : सच्चिदानंद

साहिबगंज. राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की पुण्यतिथि पर प्राथमिक विद्यालय संस्कृत तालबन्ना में संगोष्ठी एवं काव्य पाठ प्रतियोगिता आयोजित किया गया. कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ सच्चिदानंद ने किया. संगोष्ठी को संबोधित करते हुए डॉ सच्चिदानंद ने कहा कि राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की कविताओं में राष्ट्रीय चेतना समग्रता में दिखाई देती है. दिनकर पहले भारतीयता के कवि हैं, जो बाद में राष्ट्रीयता के रूप में पहचान बनकर उभरती है. दिनकर की कविताएं राष्ट्रीयता की आड़ में भारतीय नहीं, उनकी भारतीयता राष्ट्रीयता के रूप में अपनी पहचान बनाती है. हिंदी दिनकर साहित्य की शोधार्थी सुधा सरिता आनंद ने कहा कि दिनकर भारतीय गौरव के प्रतीक हैं. सुश्री आनंद ने दिनकर के साहित्य विशेष कर संस्कृति के चार अध्याय पर अपने बात रखते हुए कहा कि यह पुस्तक भारतीय संस्कृति का प्रतिबिंब है. सुश्री आनंद ने कहा कि दिनकर जी की लगभग 50 कृतियां प्रकाशित हुई है. प्रारंभ में दिनकर ने छायावादी रंग की कुछ कविताएं लिखी. दिनकर के तीन प्रथम काव्य संग्रह में रेणुका (1935), हुंकार (1938) और यशवंती (1939) प्रमुख हैं. अपने प्रारंभिक आत्मज्ञान के युग की कविताएं प्रबंध काव्य में कुरुक्षेत्र (1946), रश्मिरथी (1952) तथा उर्वशी (1961) है. विद्यालय के सहायक अध्यापक अशोक केसरी ने कहा कि उर्वशी भारतीय ज्ञानपीठ से सम्मानित रचना में काम और मनोभाव को स्वीकार करने और उसे आध्यात्मिक गरिमा तक पहुंचाने के लिए जिस साहस की जरूरत थी, वह दिनकर में मौजूद थी. विद्यालय के विभिन्न हाउस के छात्र-छात्राओं ने दिनकर की रचनाओं का सस्वर पाठ किया. इसमें बिरसा मुंडा हाउस, सिदो कान्हू, पटेल हाउस नेहरू हाउस के छात्रों ने भाग लिया. बिरसा मुंडा हाउस काव्य पाठ में चैंपियन हुआ. इस हाउस की ओर से पुरस्कार श्लोक कुमार पासवान ने प्राप्त किया. सभी प्रतिभागियों को सांत्वना पुरस्कार प्रोत्साहन स्वरूप दिनकर रचित ‘रश्मिरथी’ प्रदान किया गया. धन्यवाद ज्ञापन विद्यालय प्रबंधन समिति की वरीय सदस्य मंजू देवी ने किया. मंजू देवी ने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों से बच्चों में साहित्य एवं साहित्यकारों के प्रति रुझान पैदा होगा. ऐसे कार्यक्रमों के आयोजन में भाग लेने के लिए सभी को धन्यवाद दिया.

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