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Sahibganj: गर्मी शुरू होने से पहले ही घटा गंगा का जलस्तर, रेलवे की जलापूर्ति पर संकट

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Sahibganj: गर्मी शुरू होने से पहले ही घटा गंगा का जलस्तर, रेलवे की जलापूर्ति पर संकट
पानी के लिए लगाया गया वाटर पंप

Sahibganj: गर्मी की दस्तक से पहले ही गंगा का जलस्तर घटने लगा है, जिससे रेलवे की जलापूर्ति व्यवस्था पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं. गंगा तट पर स्थापित रेलवे का पंप हाउस और इंटेक वेल जलस्तर कम होने के कारण प्रभावित हो रहा है. यदि समय रहते समुचित कदम नहीं उठाये गये तो रेलवे कॉलोनियों के साथ-साथ स्टेशन परिसर में भी जल संकट गहराने लगेगा. रेलवे की आधी जलापूर्ति गंगा के जल पर निर्भर है. गंगा तट पर बने इंटेक वेल के माध्यम से पानी फिल्टर हाउस तक पहुंचाया जाता है, जहां से स्टेशन, कार्यालयों और नॉर्थ कॉलोनी में सप्लाई होती है, लेकिन जलस्तर घटने से इंटेक वेल में पर्याप्त पानी नहीं पहुंच पा रहा है.

बीच नदी से की जा रही वाटर सप्लाई

अब स्थिति यह है कि कर्मचारियों को गंगा की मुख्य धारा तक जाकर पंपिंग सेट के जरिये पानी खींचकर आपूर्ति बहाल करनी पड़ रही है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि गंगा का जलस्तर और नीचे गया तो स्टेशन पर यात्रियों के लिए भी पेयजल की समस्या उत्पन्न हो सकती है. ऐसे में जल संरक्षण और वर्षा जल संचयन की दिशा में ठोस पहल की जरूरत है. रेलवे परिसर में हो रहे नये निर्माण कार्यों में जल संचयन व्यवस्था अनिवार्य किए जाने की मांग उठने लगी है. इस्टर्न रेलवे के साहिबगंज स्थित सहायक अभियंता वेदव्यास शरण ने बताया कि रेलवे ने पूर्व में भी कई इंटेक वेल बनाये हैं, जहां सामान्य स्थिति में बारहों महीने पर्याप्त पानी उपलब्ध रहता है. गंगा के घटते जलस्तर को देखते हुए वैकल्पिक व्यवस्था की तैयारी की जा रही है. ताकि किसी भी प्रकार का गंभीर जल संकट उत्पन्न न हो.

कॉलोनियों में केवल एक बार हो रही सप्लाई

रेलवे कॉलोनियों में गर्मी शुरू होने से पहले ही पानी की किल्लत गंभीर रूप लेने लगी है. साउथ कॉलोनी और झरना कॉलोनी के क्वार्टरों में दो टाइम की जगह केवल एक टाइम पानी सप्लाई की जा रही है, जिससे कर्मचारियों और उनके परिवारों को परेशानी उठानी पड़ रही है. जानकारी के अनुसार, नॉर्थ कॉलोनी को गंगा स्थित पंप हाउस से सीधे पानी मिलता है, जिससे वहां सालभर पर्याप्त आपूर्ति रहती है, जबकि साउथ और झरना कॉलोनी कुओं के स्रोत पर निर्भर हैं. गर्मी के मौसम में कुओं में जल संचय कम हो जाता है, जिसके कारण सप्लाई घटकर आधी रह जाती है.

1000 से अधिक क्वार्टर पर जल संकट

रेलवे के अनुसार तीनों कॉलोनियों में लगभग 1000 से अधिक क्वार्टर हैं, जिनमें से करीब 500–600 क्वार्टर में नियमित पानी की आपूर्ति की जाती है. हर क्वार्टर को 1000 लीटर पानी देने का लक्ष्य है, लेकिन गर्मियों में साउथ और झरना कॉलोनी में 500 लीटर भी मुश्किल से मिल पाता है. पानी की शुद्धता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. गंगा से लाये गये पानी को फिल्टर हाउस में जमा कर फिटकरी और ब्लीचिंग पाउडर के माध्यम से साफ किया जाता है. आधुनिक फिल्टर प्लांट लंबे समय से बंद या आंशिक रूप से निष्क्रिय बताये जा रहे हैं.

गृहणियों ने स्थायी समाधान कराने की मांग

गृहणियों का कहना है कि गर्मी के दिनों में दैनिक कार्यों के लिए पानी की आवश्यकता अधिक होती है, लेकिन एक टाइम सप्लाई से स्थिति और कठिन हो जाती है. कर्मचारियों के परिवारों ने मांग की है कि रेलवे मूलभूत सुविधाओं पानी, सड़क और साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दे और स्थायी समाधान निकाले. गर्मी की शुरुआत में ही उत्पन्न संकट आनेवाले दिनों में और गहरा सकता है, ऐसे में विभाग को त्वरित और दीर्घकालिक उपाय अपनाने की आवश्यकता है.

क्या कहते हैं असिस्टेंट इंजीनियर

इस्टर्न रेलवे के असिस्टेंट इंजीनियर वेद व्यास शरण का कहना है कि गंगा के जलस्तर घटने से निश्चित रूप से थोड़ी परेशानी होगी. रेलवे वैकेंसी व्यवस्था के लिए काम कर रहे हैं. ऐसे पहले से भी रेलवे नहीं तो बड़ा इंटेक वेल बना रखा है.

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