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पुस्तक लेखन जागरूक होने का प्रमाण है

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पुस्तक लेखन जागरूक होने का प्रमाण है

रांची. पुस्तक लिखना, सिर्फ लेखक होना नहीं है, बल्कि एक जागरूक इंसान होने का प्रमाण है. ज्ञानललिता की पुस्तक में आध्यात्मिकता से जुड़ी अच्छी बातों का जिक्र है. लेखिका ने वही लिखा है, जो उन्होंने जीया है. पुस्तक लिखना एक नयी सृष्टि की रचना करने के जैसा भी है. ईश्वर ने उन्हें इसके लिए विशेष रूप से चुना है. यह पुस्तक समाज को उपहार की तरह है. उक्त बातें फादर जस्टिन ने कहीं. वह रविवार को सत्यभारती सभागार में ज्ञानलतिका टोप्पो की पुस्तक ‘त्रिदिवसीय आध्यात्मिक साधना’ के लोकार्पण समारोह में बोल रहे थे. इस मौके पर फादर जेम्स टोप्पो ने आगे कहा कि यह पुस्तक आध्यात्मिक पहलुओं को लेकर है. उन्हें उम्मीद है कि लेखिका की आनेवाली पुस्तक सामाजिक और अन्य विषयों को बढ़ावा देनेवाली विषयों पर भी होगी. उन्होंने कहा कि पुस्तक को देखकर पता लगता है कि इसके लिए कितना श्रम किया गया है. आध्यात्मिकता को अनुभव करना और फिर उसे पुस्तक रूप देना सराहनीय काम है. इससे पूर्व पुस्तक की लेखिका ज्ञानलतिका ने कहा कि फादर अनिलदेव की आध्यात्मिक साधना में शामिल होने के बाद उन्हें जो अनुभव हुए, उससे वह पुस्तक लिखने की ओर प्रेरित हुईं. इस पुस्तक में फादर अनिलदेव से लिया गया साक्षात्कार भी है. साथ ही चालीसा की अवधि में प्रभु यीशु मसीह की दुखभोग, क्रूसमृत्यु से जुड़े प्रसंगों का भी जिक्र है. लोकार्पण समारोह में फादर अलेक्स तिर्की, विनय मुंडू, सेवानिवृत्त आइजी हेमंत टोप्पो, रतन तिर्की, प्रभाकर तिर्की, निर्मला मुंडू, कांति खलखो, अनूप खलखो सहित अन्य उपस्थित थे.

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