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बंद है वाटर फिल्टर प्लांट, खलारी में हाहाकार

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बंद है वाटर फिल्टर प्लांट, खलारी में हाहाकार
Birsa Munda

प्रतिनिधि, खलारी खलारी प्रखंड क्षेत्र में इन दिनों पानी के लिए हाहाकार मचा हुआ है. बहुग्रामीण जलापूर्ति योजना के तहत पेयजल एवं स्वच्छता विभाग द्वारा प्रखंड के बुकबुका महावीरनगर में बनाये गये वाटर फिल्टर प्लांट से पांच पंचायतों को पानी देने की योजना है. इनमें बुकबुका समेत चूरी दक्षिणी, खलारी, हुटाप व चूरी मध्य पंचायत के गांव व टोले शामिल हैं. 5.5 एमएलडी क्षमता वाले इस प्लांट को सपही नदी के भरोसे स्थापित किया गया है. साल में तीन महीने सपही नदी पूरी तरह सूखी रहती है. बहुग्रामीण जलापूर्ति योजना समिति की अध्यक्ष सह खलारी पंचायत की मुखिया तेजी किस्पोट्टा ने बताया कि जेसीबी मशीन से सपही नदी में बालू हटाकर पानी निकालने का प्रयास भी किया गया है. परंतु सफलता नहीं मिली. नदी के रेत के अंदर भी पानी का एक बूंद तक नहीं मिला. नतीजा यह हुआ है कि प्लांट को ही बंद कर देना पड़ा. पांच पंचायत के हजारों परिवार इसी फिल्टर प्लांट पर आश्रित हैं. इस प्लांट के साथ दो बड़े जलमीनार हैं, जिसमें फिल्टर पानी जमा कर पंचायतों तक पहुंचाया जाता है. ऐसे भी एक दिन बीच कर लोगों को पानी मिलता है. परंतु मार्च का महीना शुरू होते ही पानी मिलने का अंतराल बढ़ता गया. 15 दिनों पहले तक 15-15 दिन के अंतराल में पानी सप्लाई की जा रही थी, परंतु अंततः पूरे प्लांट को ही बंद कर देना पड़ा. बंद चूना का पत्थर खदान में जमा पानी हो सकता है विकल्प सपही नदी में पानी सूख जाना कोई नयी बात नहीं है. नदी प्रत्येक वर्ष सूख जाती है. पांच पंचायतों की आबादी को सपही नदी से जलापूर्ति करने की योजना तैयार करनेवाले ही दूरदर्शी नहीं रहे होंगे. बुकबुका स्थित इस फिल्टर प्लांट से पानी पाने वाली आबादी प्रत्येक वर्ष गर्मी में पानी के लिए परेशान होती है. अब इसी सपही नदी से राय में निर्माणाधीन फिल्टर प्लांट को भी पानी देने की तैयारी जोर-शोर से चल रही है. राय फिल्टर प्लांट शुरू हुआ तो जनवरी से ही पानी मिलना बंद हो जायेगा. ऐसे में बुकबुका फिल्टर प्लांट के लिए बंद चूना का पत्थर खदान में जमा पानी ही विकल्प है. बुकबुका फिल्टर प्लांट से चूना का पत्थर खदान की दूरी मात्र 200 मीटर के करीब है. केवल मोटर लगाने के लिए एक कमरा व पाइप बिछाने की आवश्यकता थी. उप विकास आयुक्त स्वयं इस विकल्प का निरीक्षण कर गये थे. बावजूद भी इस वैकल्पिक योजना पर कार्य नहीं किया गया. भू-जलस्तर गया पाताल, चापानल हुए बेकार खलारी प्रखंड क्षेत्र में करीब 1000 चापानल पहले से हैं.इसके अलावा हाल ही में दर्जनों नये चापानल लगाये गये हैं. 135 सोलर जलमीनार हैं. 41 जल नल योजना है. प्रखंड के 14 में से पांच पंचायत सीसीएल क्षेत्र के हैं. जहां सीसीएल जलापूर्ति करती है. सीसीएल द्वारा दूसरे पंचायतों में भी सीएसआर के तहत दर्जन भर से अधिक डीप बोर किये गये हैं. इसके अलावा कई नये फिल्टर प्लांट प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है. परंतु भीषण गर्मी और गहराती कोयला खानों के कारण खलारी का जलस्तर लगातार नीचे जा रहा है. सरकारी डीप बोर एक तय गहरायी तक ही खोदी जाती है. कई बार तो खदानों में होनेवाले ब्लास्टिंग के कारण भी डीप बोर में मिट्टी भर जाता है और वे बेकार हो जाते हैं. इस परिस्थिति में खदानों में जमा पानी ही खलारी के लिए वरदान साबित हो सकता हैं. चुनाव बाद सबकुछ ठीक कर देने का आश्वासन दे रहे राजनीतिक दल चुनाव को लेकर जनसंपर्क में निकले राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता, नेताओं से ग्रामीण पानी को लेकर सवाल पूछ रही है. राजनीतिक दलों द्वारा आश्वासन दिया जा रहा है कि चुनाव बाद सारी समस्याएं हल कर दी जायेंगी. खलारी में लंबे समय से एक ही राजनीतिक दल के विधायक व सांसद हैं. वहीं राज्य में सरकार किसी और पार्टी की है. ऐसे में सत्ता पक्ष हो या विपक्ष कोई भी राजनीतिक दल अपनी जवाबदेही से पीछे नहीं हट सकता है. चुनाव बाद खलारी के लोगों के पानी की समस्या का स्थाई समाधान हो सकेगा या नहीं यह देखना होगा. फिलहाल बरसात शुरू होने तक खलारीवासियों को पानी की किल्लत का सामना करना विवशता है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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