रांची. झारखंड में बिजली आपूर्ति को स्थिर, भरोसेमंद और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप बनाने की पहल हुई है. जेबीवीएनएल राज्य में बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (बीइएसएस) लगाने की तैयारी कर रहा है. मार्च से पतरातू की दूसरी यूनिट चालू हो जायेगी. इससे झारखंड को 650 मेगावाट अतिरिक्त बिजली मिलेगी. ऐसे में राज्य के पास सरप्लस बिजली उपलब्ध होगी. इस अतिरिक्त बिजली को पीक ऑवर के लिए स्टोर करने को लेकर पावर स्टोरेज सिस्टम बनाया जा रहा है. लगभग 500 मेगावाट बिजली को स्टोरेज में रखा जायेगा, जिसके लिए 750 एकड़ जमीन की जरूरत होगी. जेबीवीएनएल ने संचरण निगम को पत्र लिखकर उपलब्ध जमीन का विवरण मांगा है.
महंगी पीक-पावर खरीद पर निर्भरता कम होगी
राज्य में गर्मी के मौसम में पीक डिमांड, औद्योगिक क्षेत्रों में अचानक बढ़ने वाला लोड और सोलर-विंड जैसी नवीनीकृत ऊर्जा की अनिश्चित उपलब्धता लंबे समय से चुनौती बनी हुई है. पावर स्टोरेज सिस्टम से कम मांग के समय उत्पादित अतिरिक्त बिजली को स्टोर कर अधिक मांग के समय उपयोग किया जा सकेगा. इससे बिजली कटौती, फ्रीक्वेंसी में उतार-चढ़ाव और महंगी पीक-पावर खरीद पर निर्भरता कम होगी. जेबीवीएनएल प्रबंधन बीइएसएस के लिए जमीन की तलाश कर रहा है. निगम के एक अधिकारी ने बताया कि एक मेगावाट पावर स्टोरेज के लिए लगभग डेढ़ एकड़ जमीन की आवश्यकता होती है. भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय ने सभी राज्यों को निर्देश दिया है कि ग्रिड-स्केल एनर्जी स्टोरेज को दीर्घकालिक बिजली योजना में शामिल किया जाये.
कई राज्य अपना रहे हैं पावर स्टोरेज सिस्टम
देश के कई राज्यों ने पहले ही पावर स्टोरेज सिस्टम को अपनाना शुरू कर दिया है. दिल्ली में ग्रिड-लेवल बैटरी स्टोरेज सिस्टम लगाया गया है, जिससे पीक ऑवर में बिजली आपूर्ति संतुलित हो रही है. राजस्थान के बीकानेर और जैसलमेर क्षेत्रों में बड़े सोलर पार्कों के साथ बैटरी स्टोरेज जोड़ा जा रहा है, ताकि रात के समय भी सोलर ऊर्जा का उपयोग किया जा सके. गुजरात के खावड़ा क्षेत्र में देश के सबसे बड़े सोलर-विंड पार्क के साथ विशाल बैटरी स्टोरेज सिस्टम विकसित किया जा रहा है. तमिलनाडु में राज्य की ट्रांसमिशन और वितरण कंपनियां सोलर और विंड प्रोजेक्ट्स के साथ बैटरी स्टोरेज को जोड़ रही हैं. बिहार में भी सोलर प्लांट्स के साथ बैटरी स्टोरेज के प्रयोग शुरू कियेजा रहे हैं.