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बजट में सरकार का कंक्रीट प्लान नहीं दिखता – भाजपा

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बजट में सरकार का कंक्रीट प्लान नहीं दिखता – भाजपा

रांची : हेमंत सरकार द्वारा मंगलवार को पेश किये गये बजट पर बुधवार से चर्चा शुरू हुई. पहले दिन चर्चा की शुरुआत अमर बाउरी के भाषण से हुई. श्री बाउरी की चर्चा के दौरान ही भाजपा के विधायकों ने हंगामा शुरू किया. भाजपा के विधायक बाबूलाल मरांडी को सदन में प्रतिपक्ष के नेता घोषित करने की मांग करने लगे. वेल में आ गये. सचिव की मेज थपथपायी. बाद में स्पीकर की कुरसी को दंडवत प्रमाण कर सदन से वॉकआउट कर गये.

कंक्रीट प्लान नहीं : अमर बाउरी ने कहा कि बजट में सरकार का कंक्रीट प्लान नहीं दिखा. इसमें कुछ ठोस कदम उठाये जाने की उम्मीद थी. पर्यटन के क्षेत्र में कुछ उल्लेखनीय घोषणा होनी चाहिए थी. लेकिन, ऐसा कुछ नहीं हुआ. रघुवर दास की सरकार ने पहली बार पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कई काम किया. लेकिन लगता है पर्यटन का विकास वर्तमान सरकार का एजेंडा नहीं है. बजट में रोजगार का ख्याल भी नहीं रखा गया है. कृषि आशीर्वाद योजना बंद कर सरकार किसानों की जिम्मेदारी से भाग रही है.

चोर मचाये शोर : प्रदीप यादव ने चर्चा में हिस्सा लेते हुए कहा कि विपक्षी साजिश के तहत सदन को बाधित कर रहे हैं. अपनी बात रख कर विपक्षी हंगामा कर रहे हैं. 20 साल में पहली बार किसी सरकार ने किसानों के बारे में सोचा है. किसानों का ऋण माफ करने की तैयारी की है. नौजवानों के साथ-साथ वृद्धों का भी ख्याल किया.

राजस्व नहीं बढ़ा, तो योजनाएं होंगी फेल : लंबोदर महतो ने चर्चा में हिस्सा लेते हुए कहा कि सरकार को राजस्व बढ़ाने का प्रयास करना चाहिए. कोयला कंपनियों पर रॉयल्टी का हजारों करोड़ रुपये बकाया है. वाटर टैरिफ के रूप में कंपनियों पर करीब नौ हजार करोड़ रुपये बाकी है. केवल टीवीएनएल पर ही 6300 करोड़ रुपये रॉयल्टी का बकाया है. सरकार इस राशि को वसूलने पर ध्यान नहीं देगी, तो हाल पिछली सरकार की तरह ही होगा. फरजी कंपनी बना कर करीब 1800 करोड़ रुपये जीएसटी क्रेडिट है.

सभी विभागों के नियुक्ति नियमावली की हो समीक्षा : बंधु तिर्की ने कहा कि सरकार को अधिकारियों पर भरोसा नहीं करना चाहिए. अधिकारी हमेशा गलत काम करना चाहते हैं. इस कारण छठी जेपीएससी में गड़बड़ी हुई है. सरकार को चाहिए कि सभी विभागों की नियुक्ति नियमावली की समीक्षा करे. आदिवासी हॉस्टल में छात्र-छात्राओं को पिछली सरकार ने पिटवाया था. इसमें कई छात्राएं जेल हैं. इन पर चल रहे मुकदमे वापस होने चाहिए. पिछली सरकार ने जिन किसानों को इजराइल भेजा था, उसकी जांच होनी चाहिए.

एनपीआर के तहत जनगणना पर रोक लगे : माले विधायक विनोद सिंह ने बुधवार को सदन की कार्यवाही शुरू होते ही कार्यस्थगन लाया़ श्री सिंह का कहना था कि राज्य मेें अप्रैल से एनपीआर के नये फॉरमेट पर जनगणना कार्य होना है़ जनगणना का यह नया फॉरमेट एनआरसी की दिशा में पहली प्रक्रिया है़ यह नागरिकता कानून में संशोधन कर किया जा रहा है़ सीएए भी संविधान की प्रस्तावना पर चोट है़ वर्ष 2010 के तर्ज पर ही जनगणनना होना चाहिए़ सरकार प्रस्ताव पारित कर इस पर रोक लगाये.

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प्रीतीश सहाय, इन्हें इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में 12 वर्षों से अधिक का अनुभव है. ये वर्तमान में प्रभात खबर डॉट कॉम के साथ डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया जगत में अपने अनुभव के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण विषयों पर काम किया है और डिजिटल पत्रकारिता की बदलती दुनिया के साथ खुद को लगातार अपडेट रखा है. इनकी शिक्षा-दीक्षा झारखंड की राजधानी रांची में हुई है. संत जेवियर कॉलेज से ग्रेजुएट होने के बाद रांची यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. इसके बाद लगातार मीडिया संस्थान से जुड़े रहे हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत जी न्यूज से की थी. इसके बाद आजाद न्यूज, ईटीवी बिहार-झारखंड और न्यूज 11 में काम किया. साल 2018 से प्रभात खबर के साथ जुड़कर काम कर रहे हैं. प्रीतीश सहाय की रुचि मुख्य रूप से राजनीतिक खबरों, नेशनल और इंटरनेशनल इश्यू, स्पेस, साइंस और मौसम जैसे विषयों में रही है. समसामयिक घटनाओं को समझकर उसे सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की इनकी हमेशा कोशिश रहती है. वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों पर लगातार लेखन करते रहे हैं. इसके साथ ही विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े विषयों पर भी लिखते हैं. डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने कंटेंट प्लानिंग, न्यूज प्रोडक्शन, ट्रेंडिंग टॉपिक्स जैसे कई क्षेत्रों में काम किया है. तेजी से बदलते डिजिटल दौर में खबरों को सटीक, विश्वसनीय और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करना पत्रकारों के लिए चुनौती भी है और पेशा भी, इनकी कोशिश इन दोनों में तालमेल बनाते हुए बेहतर और सही आलेख प्रस्तुत करना है. वे सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जरूरतों को समझते हुए कंटेंट तैयार करते हैं, जिससे पाठकों तक खबरें प्रभावी ढंग से पहुंच सकें. इंटरनेशनल विषयों में रुचि होने कारण देशों के आपसी संबंध, वार अफेयर जैसे मुद्दों पर लिखना पसंद है. इनकी लेखन शैली तथ्यों पर आधारित होने के साथ-साथ पाठकों को विषय की गहराई तक ले जाने का प्रयास करती है. वे हमेशा ऐसी खबरों और विषयों को प्राथमिकता देते हैं जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लिहाज से महत्वपूर्ण हों. रूस यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट संकट जैसे विषयों से लेकर देश की राजनीतिक हालात और चुनाव के दौरान अलग-अलग तरह से खबरों को पेश करते आए हैं.
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