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भूमि सर्वे मामले में राज्य सरकार ने सीलबंद रिपोर्ट सौंपी

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भूमि सर्वे मामले में राज्य सरकार ने सीलबंद रिपोर्ट सौंपी

रांची. झारखंड हाइकोर्ट ने राज्य में वर्ष 1974-75 से अधूरे पड़े भूमि सर्वे को पूरा करने को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की. चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान व जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने राज्य सरकार की ओर से प्रस्तुत सीलबंद रिपोर्ट को देखा और उसकी प्रति सभी पक्षों को देने का निर्देश दिया. सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने मौखिक रूप से टिप्पणी की कि रिपोर्ट दूसरे राज्य से संबंधित है. कोर्ट ने सवाल उठाया कि बिहार में जो सिस्टम अपनाया गया है, उस पर झारखंड सरकार क्यों नहीं विचार कर रही है. मामले की अगली सुनवाई के लिए 11 दिसंबर की तिथि निर्धारित की गयी है. इससे पहले राज्य सरकार ने सीलबंद रिपोर्ट कोर्ट में प्रस्तुत की थी. वहीं याचिकाकर्ता गोकुल चंद की ओर से अधिवक्ता राजेंद्र कृष्ण ने पैरवी की. याचिका में मांग की गयी है कि भूमि सर्वे के कार्य को पूरा किया जाये और इसके लिए समय सीमा तय की जाये, ताकि भूमि की प्रकृति व मालिकाना हक में हेराफेरी न हो सके. याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि राज्य में अंतिम बार वर्ष 1932 में भूमि सर्वे हुआ था. इसके बाद 1974-75 में प्रक्रिया शुरू हुई, लेकिन अब तक पूरी नहीं हो सकी. पूर्व में राज्य सरकार ने जानकारी दी थी कि भूमि सर्वे में तेजी लाने के लिए तीन टीमों को बिहार, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक भेजा गया है, जहां से तकनीकी जानकारी लेकर झारखंड में सर्वे प्रक्रिया को अपग्रेड किया जायेगा. इससे राज्य में भूमि का रिकॉर्ड अप-टू-डेट हो सकेगा.

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