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Home झारखण्ड रांची राष्ट्रीय आदिवासी नीति के ड्राफ्ट पर परामर्शी बैठक में रखे गये सुझाव

राष्ट्रीय आदिवासी नीति के ड्राफ्ट पर परामर्शी बैठक में रखे गये सुझाव

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राष्ट्रीय आदिवासी नीति के ड्राफ्ट पर परामर्शी बैठक में रखे गये सुझाव

रांची. राष्ट्रीय आदिवासी नीति का ड्राफ्ट तैयार करने को लेकर कवायद जारी है. शुक्रवार को गोस्सनर कंपाउंड स्थित एचआरडीसी सभागार में ड्राफ्टिंग कोर कमेटी की परामर्शी बैठक हुई. इसमें झारखंड, आंध्रप्रदेश, छत्तीसगढ़ और बंगाल से 20 प्रतिभागी शामिल हुए. मौके पर डॉ वासवी किड़ो और ममता कुजूर ने राष्ट्रीय आदिवासी नीति की पृष्ठभूमि और अब तक हुए कार्यों की जानकारी दी. डॉ वासवी ने ड्राफ्ट की प्रस्तावना कैसा हो इस पर भी चर्चा की. इसके बाद पांचवीं अनुसूची और पेसा कानून के आलोक में राष्ट्रीय आदिवासी नीति पर प्रभाकर तिर्की, रेवा परगदा रावी, गौतम बंधोपाध्याय और विश्वनाथ वाकड़े ने बात रखी. प्रभाकर तिर्की ने बताया कि पेसा कानून में कुछ विसंगतियां हैं जिसे ड्राफ्ट में दर्ज किया जा रहा है. पांचवीं अनुसूची आजादी के बाद संविधान में शामिल किया गया. पर इसकी वैचारिक अवधारणा तो ब्रिटिश शासन काल में ही शुरू हुई थी. उदाहरण के तौर पर आदिवासी रूढ़ीवादी व्यवस्था का संरक्षण कैसे होगा? इसके बारे में 1874 के शिड्यूल एरिया एक्ट में जिक्र है. इसके अलावा इंडिया एक्ट 1935 में वर्जित क्षेत्र और आंशिक वर्जित क्षेत्र (पांचवीं अनुसूची) का जिक्र किया गया है. राष्ट्रीय आदिवासी नीति में इन विषयों को कैसे समाहित करें इस पर विचार किया गया. प्रभाकर तिर्की ने कहा कि पांचवीं अनुसूची क्षेत्र में राज्यपाल आदिवासी मामलों के कस्टोडियन होते हैं. उन्हें आदिवासियों से संबंधित कानून बनाने का अधिकार भी है. पर आज तक किसी भी राज्यपाल ने अपनी इस भूमिका को नहीं निभायी. बाद के सत्रों में सुखराम पाहन और रमेश जेराई ने ड्राफ्ट में कला संस्कृति और जैव विविधता का समावेश कैसे हो इस पर बात रखी. ममता और पूरबी पाल ने आदिवासी महिलाओं के संदर्भ में बातों को रखा.

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