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Home झारखण्ड रांची ranchi news : झारखंड में दो बार बनी स्टार्टअप पॉलिसी, लेकिन उद्यमियों को नहीं मिला लाभ

ranchi news : झारखंड में दो बार बनी स्टार्टअप पॉलिसी, लेकिन उद्यमियों को नहीं मिला लाभ

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ranchi news : झारखंड में दो बार बनी स्टार्टअप पॉलिसी, लेकिन उद्यमियों को नहीं मिला लाभ
Birsa Munda

रांची (अभिषेक रॉय). स्टार्टअप इंडिया, स्टैंड अप इंडिया का स्लोगन उद्यमियों को प्रेरित करता है. जनवरी 2016 में केंद्र सरकार ने स्टार्टअप इंडिया लागू किया. इसके ठीक आठ माह बाद सितंबर 2016 में झारखंड में स्टार्टअप पाॅलिसी बनी. रांची में अटल बिहारी वाजपेयी इनोवेशन लैब स्थापित हुई. वर्ष 2018 में झारखंड स्टार्टअप यात्रा से 107 स्टार्टअप आइडिया (कृषि एवं अनुसंधान, विज्ञान एवं प्राैद्योगिकी, इ-कॉमर्स समेत अन्य बिजनेस मॉडल) चिह्नित हुए, पर ज्यादातर स्टार्टअप सरकार की जटिल प्रक्रिया में उलझ गये. राज्य स्तरीय प्रतियोगिता से चुने गये स्टार्टअप में से मात्र 17 को ही पहली राशि मिली. यह राशि 50 हजार से 1.5 लाख रुपये तक थी. जबकि, झारखंड स्टार्टअप पाॅलिसी के तहत पहली किस्त में अधिकतम 10 लाख रुपये प्रोटोटाइप ग्रांट के रूप में मिलना था. राज्य से स्टार्टअप को ””””नो सपोर्ट”””” यानी वित्तीय सहायता नहीं मिलने के कारण कई स्टार्टअप आइडिया पड़ोसी राज्य बिहार और ओडिशा की ओर रुख कर गये.

इन कारणों से फेल हुई झारखंड स्टार्टअप यात्रा

अटल बिहारी वाजपेयी इनोवेशन लैब (जेबीवीआइएल) की स्थापना नवाचार और उद्यमिता को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से की गयी थी. जबकि, वित्तीय कमी और प्रशासनिक समस्याओं के कारण लैब को बंद करना पड़ा.

स्टार्टअप इंडिया रिपोर्ट 2024 के अनुसार 2019 तक झारखंड स्टार्टअप यात्रा उन राज्यों में शामिल थी, जहां स्टार्टअप को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा था. लेकिन फंड न मिलने के कारण स्टार्टअप पॉलिसी फेल हो गयी. जबकि, झारखंड के साथ संयुक्त रूप से बिहार और छत्तीसगढ़ में स्टार्टअप इंडिया को लांच किया गया था. आज बिहार इस दिशा में एस्पायरिंग लीडर यानी लगातार आगे बढ़ते राज्यों में शामिल हो गया है.

बिहार, ओडिशा और छत्तीसगढ़ पलायन कर रहा आइडिया

झारखंड स्टार्टअप यात्रा में चुने गये 107 आइडिया में 20-25 फीसदी स्टार्टअप आइडिया वर्तमान में ओडिशा से जुड़ गये गये हैं. वहीं, 10-15 फीसदी युवा अपने आइडिया लेकर बिहार चले गये, जहां उन्हें वित्तीय सहायता, बेहतर इन्फ्रास्ट्रक्चर और व्यापक नेटवर्किंग के अवसर मिल रहे हैं. स्टार्टअप इंडिया के आंकड़ों के अनुसार वर्तमान में झारखंड में लगभग 50-60 स्टार्टअप सक्रिय हैं. यह संख्या राष्ट्रीय औसत से बहुत कम है.

अब तक शुरू नहीं हो सकी स्टार्टअप पॉलिसी

राज्य में झारखंड स्टार्टअप पॉलिसी-2016 के फेल होने के बाद 2023 में दूसरी बार झारखंड स्टार्टअप पॉलिसी तैयार की गयी, जिसे मई 2024 में लागू किया गया. 2024 में ही लोकसभा और विधानसभा चुनाव होने की वजह से अब तक इस पॉलिसी को अंतिम रूप नहीं दिया गया है. जबकि 2028 तक एक हजार स्टार्टअप शुरू करने का लक्ष्य था, लेकिन पाॅलिसी लागू नहीं होने के कारण फिलहाल यह मामला ठंडे बस्ते में पड़ा हुआ है.

झारखंड में नहीं मिला सहयोग, ओडिशा ने दिया रिस्पांस

रांची के रवि रंजन का स्टार्टअप आइडिया ””””वाव जिंदगी”””” रूरल इको टूरिज्म पर आधारित था. इसके तहत ग्रामीण इलाकों को चिह्नित कर वहां पर्यटन की संभावना को बढ़ावा देना था. इस आइडिया के साथ रवि ने झारखंड सरकार को प्रस्ताव दिया था, लेकिन इस प्रस्ताव पर सरकार ने अपेक्षित रुचि नहीं दिखायी. इससे निराश रवि ने ओडिशा में ट्राइ किया और सफलता मिली. चाईबासा के सत्यजीत पटनायक ने किराना दुकान को डिपार्टमेंटल स्टोर में बदलने का आइडिया पेश किया था. पर राज्य सरकार ने उनके स्टार्टअप ””फायदो”” में कोई रुचि नहीं दिखायी. इसके बाद सत्यजीत आडिशा गये और अपने ऐप से दुकानदारों को ग्राहकों तक पहुंच का अइडिया साझा किया. ओडिशा सरकार से फंडिंग मिली और इसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर साझा करने का अवसर भी दिया.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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