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Home Badi Khabar राजस्व पर्षद ने नये अनुमंडल व अंचल कार्यालयों के सृजन के लिए झारखंड सरकार से की अनुशंसा, जानें क्या है वजह

राजस्व पर्षद ने नये अनुमंडल व अंचल कार्यालयों के सृजन के लिए झारखंड सरकार से की अनुशंसा, जानें क्या है वजह

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राजस्व पर्षद ने नये अनुमंडल व अंचल कार्यालयों के सृजन के लिए झारखंड सरकार से की अनुशंसा, जानें क्या है वजह

राजस्व पर्षद ने राज्य के विभिन्न जिलों में उपायुक्त व उनके अधीन चलनेवाले राजस्व न्यायालयों में लंबित मामलों के विश्लेषण के बाद सरकार से नये अनुमंडल और अंचल कार्यालय सृजित करने की अनुशंसा की है. साथ ही राजस्व के काम से जुड़े पदाधिकारियों- उपायुक्त, डीसीएलआर, एसडीओ, सीओ आदि के स्थानांतरण-पदस्थापन के दौरान उनके खराब प्रदर्शन को भी आधार के रूप में शामिल करने की अनुशंसा की है. पर्षद ने रांची के डीसीएलआर द्वारा औसत से 59 गुना मुकदमा निबटाने पर आश्चर्य जताते हुए फैसलों की गुणवत्ता पर सवाल भी उठाया है.

राजस्व पर्षद सदस्य अमरेंद्र प्रताप सिंह ने ई-राजस्व कोर्ट से संबंधित 20 जनवरी 2023 तक के लंबित और निबटाये गये मुकदमों की संख्या का विश्लेषण किया. इसमें यह पाया कि राज्य के छह जिलों के उपायुक्तों ने अपने न्यायालय में दायर मुकदमों से 50 प्रतिशत से कम का ही निबटारा किया है.

इन जिलों के उपायुक्तों में रांची, पलामू, लातेहार, जामताड़ा, पूर्वी सिंहभूम और साहिबगंज का नाम शामिल है. गढ़वा और हजारीबाग जिले के उपायुक्तों ने 10 प्रतिशत से भी कम मुकदमों का निबटारा किया है. बोकारो, गोड्डा, लोहरदगा और सरायकेला-खरसावां जिले के उपायुक्तों ने 75-90 प्रतिशत मुकदमों का निबटारा किया है.

चार जिलों के उपायुक्तों ने 90 प्रतिशत से अधिक मुकदमों का निबटारा किया है. इन जिलों में दुमका, गुमला, रामगढ़ और सिमडेगा का नाम शामिल है. शेष आठ जिलों के उपायुक्तों ने 50-75 प्रतिशत तक मुकदमों का निबटारा किया है. राजस्व पर्षद ने समीक्षा के दौरान 15 अपर समाहर्ता द्वारा 50 प्रतिशत से कम मुकदमों को निबटाये जाने को दुखद माना है. साथ ही अर्द्धन्यायिक कार्यों से जुड़े अधिकारियों के खराब प्रदर्शन को उनके एनुअल असेसमेंट रिपोर्ट का हिस्सा बनाने का सुझाव दिया है.

आठ अनुमंडल पदाधिकारियों के पास पहुंचते हैं अधिकतम छह हजार मुकदमे :

राजस्व पर्षद ने समीक्षा के दौरान पाया कि राज्य के आठ अनुमंडल पदाधिकारियों के न्यायालय में न्यूनतम एक हजार और अधिकतम छह हजार तक मुकदमे लंबित हैं. समीक्षा के दौरान आठ ऐसे अनुमंडल पदाधिकारियों के न्यायालयों को चिह्नित किया गया, जिसमें तीन हजार से अधिक मुकदमे दर्ज होते हैं. अंचल कार्यालयों में दायर होनेवाले मामलों की समीक्षा के दौरान यह पाया गया कि राज्य में छह अंचल ऐसे हैं, जिसमें एक हजार से अधिक मामले दायर होते हैं.

इसमें हंटरगंज(1111), निरसा(1209), गोविंदपुर(1066), गिरिडीह(1917), नारायणपुर(1232) और मुरहू(1550) अंचल का नाम शामिल है. समीक्षा के दौरान छह ऐसे अंचलों को चिह्नित किया गया है, जिनमें 750-100 तक मामले दर्ज होते हैं. 10 अंचलों में 500-750 और 50 अंचलों में 25- 100 के बीच मामले दर्ज होते हैं. इसके अलावा 61 अंचल ऐसे हैं, जिसमें 25 से कम मामले दर्ज होते हैं. इस स्थिति को देखते हुए राजस्व पर्षद ने अधिक मुकदमा दायर होनेवाले अनुमंडलों पदाधिकारियों और अंचल अधिकारियों के न्यायालयों का क्षेत्राधिकार काम के दबाव के हिसाब से निर्धारित करने की अनुशंसा की है.

अनुमंडल पदाधिकारियों ने न्यायालयों में लंबित मुकदमे

मुकदमे–अनुमंडल पदाधिकारी

6,698–अनुमंडल पदाधिकारी, रांची

1009–अनुमंडल पदाधिकारी, साहिबगंज

1313–अनुमंडल पदाधिकारी, पाकुड़

1967–अनुमंडल पदाधिकारी,खूंटी

1137–अनुमंडल पदाधिकारी,महगामा

1834–अनुमंडल पदाधिकारी, दुमका

1995–अनुमंडल पदाधिकारी, मधुपुर

उपायुक्त के न्यायालय द्वारा निबटाये गये मुकदमे

निबटारा–जिला

90% से अधिक–दुमका,गुमला,रामगढ़,सिमडेगा

75%-90% तक–बोकारो,गोड्डा,लोहरदगा,सरायकेला

50% से कम–रांची,साहिबगंज,पलामू,लातेहार,जामताड़ा,पूर्वी सिंहभूम

10% से कम–गढ़वा, हजारीबाग

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