सतीश कुमार, रांचीझारखंड में संपन्न हुए नगर निकाय चुनाव के नतीजे प्रदेश भाजपा के लिए चिंतन का सबब बन गये हैं. एक ओर जहां पार्टी ने अनुशासनात्मक कार्रवाई और बड़े नेताओं की घेराबंदी के बाद भी जीत का दावा किया था, वहीं धरातल पर तस्वीर बिल्कुल उलट दिखी. कई महत्वपूर्ण निकायों में भाजपा के बागी उम्मीदवारों ने पार्टी के आधिकारिक प्रत्याशियों को न केवल कड़ी टक्कर दी, बल्कि धूल चटाते हुए बड़ी जीत भी हासिल की.
जमीनी हकीकत को समझने के दावों पर गंभीर सवाल खड़े किये
इन नतीजों ने पार्टी की प्रत्याशी चयन प्रक्रिया और जमीनी हकीकत को समझने के दावों पर गंभीर सवाल खड़े किये हैं. गैर दलीय चुनाव में प्रदेश भाजपा की ओर से मेयर और नगर परिषद व नगर पंचायत अध्यक्ष पद पर समर्थित उम्मीदवारों को मैदान में उतारा गया था. चुनाव के नतीजों ने साफ कर दिया कि भाजपा नेतृत्व की ओर से थोपे गये उम्मीदवार स्थानीय कार्यकर्ताओं और जनता की पहली पसंद नहीं थे.
भाजपा नेतृत्व ने बागियों के बढ़ते प्रभाव को भांपते हुए डैमेज कंट्रोल की पूरी कोशिश की थी.