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Home झारखण्ड रांची रांची के मैक्लुस्कीगंज में थम गया रेल का पहिया, मुआवजे और नौकरी की मांग पर रैयतों का चक्का जाम

रांची के मैक्लुस्कीगंज में थम गया रेल का पहिया, मुआवजे और नौकरी की मांग पर रैयतों का चक्का जाम

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रांची के मैक्लुस्कीगंज में थम गया रेल का पहिया, मुआवजे और नौकरी की मांग पर रैयतों का चक्का जाम
मैक्लुस्कीगंज में रेल रोको आंदोलन करते रैयत. फोटो: प्रभात खबर

मैक्लुस्कीगंज से रोहित कुमार की रिपोर्ट

Ranchi News: रांची जिले के मैक्लुस्कीगंज क्षेत्र में सोमवार की सुबह रेलवे परिचालन प्रभावित हो गया, जब नौकरी, उचित मुआवजा और अन्य मांगों को लेकर रैयतों और रैयत विस्थापित मोर्चा (रैविमो) के सदस्यों ने मैक्लुस्कीगंज टू पिपरवार रेलवे लाइन (राजधर साइडिंग लाइन) को बाधित कर धरना शुरू कर दिया. आंदोलन के कारण कोयला परिवहन से जुड़ी गतिविधियां भी प्रभावित हुईं और रेलवे लाइन पर रैक का परिचालन ठप हो गया.

हेसालौंग गंझूटोला के पास रोकी गयी कोयला रैक

रैयत विस्थापित मोर्चा की रोहिणी करकट्टा ओसीपी शाखा के बैनर तले चलाये जा रहे इस आंदोलन के तहत फेज-वन के अंतर्गत हेसालौंग गंझूटोला के निकट रेलवे लाइन को जाम कर दिया गया. इसी दौरान राजधर साइडिंग में कोयला लोड करने जा रही एक रैक को सुबह करीब छह बजे धरना स्थल पर ही रोक दिया गया. इसके बाद रेल मार्ग पर परिचालन पूरी तरह प्रभावित हो गया. आंदोलनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस पहल नहीं होती, तब तक राजधर साइडिंग के लिए किसी भी रैक का परिचालन नहीं होने दिया जायेगा. आखिर दशकों से लंबित मांगों के बीच धैर्य की भी एक सीमा होती है, और जब फाइलें धूल खाती रहें तो लोग पटरियों पर उतर आते हैं.

अधिकारियों को मौके पर बुलाने की मांग

धरना दे रहे रैयतों और रैविमो के सदस्यों ने संबंधित अधिकारियों को धरना स्थल पर बुलाने की मांग की. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि नौकरी और उचित मुआवजे से जुड़े मामलों का तत्काल समाधान मौके पर ही किया जाये. आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया कि केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस निर्णय की जरूरत है.

शाखा अध्यक्ष ने दी आंदोलन जारी रखने की चेतावनी

रैयत विस्थापित मोर्चा की शाखा के अध्यक्ष शिवनारायण लोहरा ने बताया कि राजधर साइडिंग लाइन से प्रभावित आश्रितों को जब तक नौकरी और उचित मुआवजा नहीं मिल जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा. उन्होंने कहा कि वर्षों से प्रभावित परिवार न्याय की उम्मीद में भटक रहे हैं, लेकिन उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हो पाया है. शिवनारायण लोहरा ने कहा कि आंदोलन शांतिपूर्ण तरीके से चलाया जा रहा है, लेकिन यदि मांगों की अनदेखी की गयी तो इसे और व्यापक रूप दिया जा सकता है. फिलहाल राजधर साइडिंग के लिए कोयला रैक का परिचालन पूरी तरह बंद रखा जायेगा.

35 वर्ष पहले अधिग्रहित हुई थी ग्रामीणों की जमीन

जानकारी के अनुसार करीब 35 वर्ष पहले नावाडीह, हेसालौंग, गंझूटोला, मायापुर, महुलिया समेत कई गांवों के ग्रामीण रैयतों की जमीन रेलवे लाइन (राजधर साइडिंग लाइन) के निर्माण के लिए पिपरवार प्रबंधन द्वारा अधिग्रहित की गयी थी. उस समय कुछ प्रभावित परिवारों को नौकरी मिली, लेकिन बड़ी संख्या में रैयत आज भी रोजगार और उचित मुआवजे से वंचित हैं.

कई बैठकों के बावजूद नहीं निकला समाधान

रैयत विस्थापित मोर्चा, प्रभावित ग्रामीणों, सीसीएल पिपरवार प्रबंधन, अंचल प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच समय-समय पर कई दौर की बैठकें हुईं. हालांकि इन बैठकों के बाद प्रभावित परिवारों को केवल आश्वासन ही मिला. आंदोलनकारियों का आरोप है कि वर्षों से उन्हें झूठे वादों के सहारे रखा गया, जिससे वे खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं. उनका कहना है कि दशकों बीत जाने के बावजूद मामले का कोई सार्थक निष्कर्ष नहीं निकल पाया है. प्रबंधन और प्रशासन के रवैये से आहत होकर ही प्रभावित रैयतों ने बाध्य होकर राजधर साइडिंग लाइन को बाधित करने का निर्णय लिया है.

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फिलहाल जारी है धरना

सोमवार को शुरू हुआ यह धरना समाचार लिखे जाने तक जारी था. आंदोलनकारी अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं और किसी सक्षम अधिकारी के साथ निर्णायक वार्ता होने तक आंदोलन जारी रखने की बात कह रहे हैं. ऐसे में राजधर साइडिंग से होने वाला कोयला परिवहन और रेल परिचालन कब तक प्रभावित रहेगा, यह आने वाले दिनों में प्रशासन और आंदोलनकारियों के बीच होने वाली बातचीत पर निर्भर करेगा.

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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