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Home झारखण्ड रांची भारत छोड़ो आंदोलन की शुरुआत करो या मरो नारे के साथ हुई : डॉ रामेश्वर

भारत छोड़ो आंदोलन की शुरुआत करो या मरो नारे के साथ हुई : डॉ रामेश्वर

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भारत छोड़ो आंदोलन की शुरुआत करो या मरो नारे के साथ हुई : डॉ रामेश्वर

रांची :भारत छोड़ो आंदोलन की 78वीं वर्षगांठ पर प्रदेश काग्रेस कमेटी की ओर से रविवार को स्वतंत्रता आंदोलन के महान विभूतियों को श्रद्धांजलि अर्पित की गयी. मोरहाबादी स्थित बापू वाटिका में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सह वित्त एवं खाद्य आपूर्ति मंत्री डॉ रामेश्वर उरांव व विधायक दल के नेता सह ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम के नेतृत्व में स्वतंत्रता आंदोलन के महान विभूतियों को श्रद्धांजलि दी गयी. कार्यक्रम की शुरुआत में गांधी के अनुयायी टाना भगतों की ओर से सबसे पहले बापू की प्रतिमा के पैर धोये गये और घंटी एवं शंख बजा कर पूजा-अर्चना की गयी.

इस मौके पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डॉ रामेश्वर उरांव ने कहा कि 28 दिसंबर 1885 को कांग्रेस की स्थापना देश के शिक्षित बुद्धिजीवियों से विचार-विमर्श करने के लिए की गयी थी. बाद में यह देश की गुलामी की जंजीरों को तोड़ने के लिए विशाल वटवृक्ष का रूप धारण कर लिया. आजादी के लिए कई चरणबद्ध आंदोलन हुए, लेकिन सबसे बड़ा आंदोलन 1942 में नौ अगस्त को क्रांति दिवस की शुरुआत के साथ हुई. गांधी जी की अगुवाई में अगस्त क्रांति दिवस ने देश की आजादी का मार्ग प्रशस्त किया.

इस दौरान गांधी ने अंग्रेजो भारत छोड़ो और करो या मरो का नारा दिया. इस नारे का दुनियाभर में ब्रिटिश शासन के अंतर्गत फैले उपनिवेशों में भी असर देखा गया. भारत के साथ ही दुनिया भर के कई देशों को अंग्रेजी हुकूमत की दासता से मुक्ति मिली. इस नारे की प्रेरणा लेकर आजादी हासिल करनेवाले आज स्वतंत्र देश के रूप में अपने समाज के विकास में लगे हैं. भारत ने भी 1947 में आजादी हासिल की, बाद में देश का संविधान बना, सभी के विकास की रूपरेखा तय की गयी और न्याय के पथ पर भारत अग्रसर है.

कांग्रेस विधायक दल के नेता आलमगीर आलम ने कहा कि देश की आजादी की लड़ाई में भारत छोड़ो आंदोलन मील का पत्थर साबित हुआ. क्रांति दिवस पर अंग्रेजों भारत छोड़ो के नारे के साथ ही देश में आजादी की लड़ाई तेज हुई और बाद में अंग्रेज भारत को छोड़ने को मजबूर हुए.

श्रद्धांजलि कार्यक्रम में कार्यकारी अध्यक्ष केशव महतो कमलेश, राजेश ठाकुर, प्रवक्ता आलोक दूबे, डॉ राजेश गुप्ता, अमूल्य नीरज खलखो, बेलस तिर्की, सतीश पाल मुंजिनी, सुखेर भगत, निरंजन पासवान, डॉ बीपी शरण, शमशेर आलम, राजीव रंजन प्रसाद, नेली नाथन, विनय सिन्हा दीपू, गजेंद्र प्रसाद सिंह, गुंजन सिंह, एनुल अंसारी, सुरेश बैठा, मदन महतो, रामानंद केसरी, सुनील सिंह समेत कई लोग मौजूद थे.

Post By : Pritish Sahay

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