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Prabhat Khabar 40 Years: प्रभात खबर ने हमेशा तटस्थ पत्रकारिता की

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Prabhat Khabar 40 Years: प्रभात खबर ने हमेशा तटस्थ पत्रकारिता की
प्रभात खबर ने गांवों के हालात बदले.

रबींद्रनाथ महतो, विधानसभा अध्यक्ष, झारखंड

हमारे देश में पत्रकारिता का आधार सूचना और प्रसारण के आयामों के माध्यम से न विकसित होकर औपनिवेशिक दौर में स्वतंत्रता के संघर्ष गाथा के साथ विकसित हुई है. इसी कारण स्वतंत्रता प्राप्त करने के उपरांत हमारे संविधान में पत्रकारिता के स्वरूप को अलग से प्रावधानित नहीं करने के बाद भी इसे चौथे स्तंभ का दर्जा प्राप्त है.

इस दर्जा को कुछ मीडिया संस्थान ने अब–तक बरकरार रखा है. मैं प्रभात खबर को भी वैसी ही पत्रकारिता के स्तर पर रखता हूं. मैं गौरवान्वित हूं कि मुझे प्रभात खबर की 40वीं वर्षगांठ के अवसर पर अपने उदगार व्यक्त करने का अवसर प्राप्त हुआ है. वस्तुत: मैं यह बताते चलूं कि प्रभात खबर से मेरा संबंध वास्तव में मेरे संघर्षों के दिनों से ही रहा है. मुझे स्मरण है उन दिनों झारखंड आंदोलनकारियों की खबरों को प्रभात खबर प्रमुखता से प्रकाशित किया करता था, जिससे हम सब बहुत ही गंभीरता से लेते थे. अखबार के अंकों को संजोकर फाइल में रखा करते थे और जब कभी उसकी आवश्यकता होती थी, हम सभी उसे संदर्भ व साक्ष्यों के रूप में इस्तेमाल किया करता थे.

झारखंड गठन के उपरांत झारखंड में पत्रकारिता के तौर–तरीके में बदलाव देखे गये. मुझे कहते हुए हर्ष है कि प्रभात खबर ने अपनी स्थापना के काल से ही जनसरोकार की पत्रकारिता की है. और झारखंड गठन के उपरांत हर दौर में चाहें, झारखंड की राजनीतिक अस्थिरता का दौर रहा हो या स्थिर सरकार रही हो, ये अपनी पहचान को तटस्थ रखने में हमेशा सफल रहा. वास्तव में पत्रकारिता समाज से जुड़े बड़े दायित्व से भरा कार्य है. पत्रकारों को समाज और व्यवस्था से जुड़ी गतिविधियों को देखने का नजरिया जनोपयोगी होनी चाहिए. लोकतंत्र के तीनों स्तंभ पर किसी मीडिया संस्थान की पैनी नजर रखना आसान कार्य नहीं है.

जहां तीनों स्तंभ के विशिष्टता प्राप्त व्यक्ति अपनी व्यवस्था के तहत कार्य करते है, वहीं पत्रकार को उनकी जटिलता और कार्यप्रणाली को गहरी समझ रखते हुए रिर्पोटिंग करनी होती है. जहां तक एक विधायक से विधानसभा अध्यक्ष रहते हुए प्रभात खबर की विधायी पत्रकारिता को भी देखता हूं, तो मैं स्पष्ट रूप से यह स्वीकार करता हूं कि चलते सत्र में जब प्रभात खबर के अंकों में जनता से जुड़े ऐसे मुद्दे को विशिष्टता से प्रकाशित होने पर एक पाठक के तौर पर उन मुद्दों को मैं अपने विधानसभा में भी गहराई से देखता था, ताकि वैसे कार्यों को प्रमुखता दे सकूूं, जिससे अधिक-से-अधिक क्षेत्र की जनता लाभान्वित हो पाए.

पंचम विधानसभा अध्यक्ष के दायित्वों के निर्वहन करते हुए मुझे ज्ञात हुए जिस प्रकार से हमें विधानसभा के संचालन में सत्र के दौर वैसे प्रश्नों और ध्यानाकर्षण को स्वीकृत करना होता है, जिसकी गंभीरता व्यापक जनहित में हो, ठीक उसी प्रकार पूरे कार्यवाहियों का विधानसभा से रिर्पोटिंग करते हुए भी पत्रकार उन्हीं मुद्दों को प्रमुखता से प्रकाशित करता है, जो अधिक–से–अधिक जनसरोकार से जुडें होते है. अर्थात् कहने का तात्पर्य है कि यदि विधायिका लोकतंत्र के स्तंभ होने के नाते जनसरोकार को सर्वोपरि रखता है, एक पत्रकार को उसी गहराई को भांप पाना पत्रकारिता के दायित्व बोध से ही संभव है.

प्रभात खबर अपनी पत्रकारिता से इतर सामाजिक दायित्व के क्षेत्रों में भी मजबूत बीड़ा उठाता रहा, इसके लिए संपादक सहित उनके प्रबंधन से जुड़े लोग भी धन्यवाद के पात्र है. प्रभात खबर के 40वें वर्षगांठ के अवसर पर मैं आशा करता हूूं कि आने वाले दिनों में भी प्रभात खबर अपनी प्रखरता को बरकरार रखते हुए उंचाइयों के नये शिखर तक पहुंचे.

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