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Home झारखण्ड रांची पुलिस का इमरजेंसी रिस्पांस सिस्टम फेल, सूचना देने के 30 मिनट बाद मिल रही मदद

पुलिस का इमरजेंसी रिस्पांस सिस्टम फेल, सूचना देने के 30 मिनट बाद मिल रही मदद

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पुलिस का इमरजेंसी रिस्पांस सिस्टम फेल, सूचना देने के 30 मिनट बाद मिल रही मदद
झारखंड पुलिस का इमरजेंसी रिस्पांस सिस्टम हो गया है फेल.

Emergency Response System| रांची, अमन तिवारी : झारखंड में राजधानी रांची सहित कई जिलों में पुलिस का इमरजेंसी सिस्टम फेल हो गया है. आप किसी बड़ी मुसीबत या खतरे में फंसे हैं और आप पुलिस की सहायता के लिए इमरजेंसी रिस्पांस सिस्टम 112 पर डायल करेंगे, तो पुलिस की मदद आप तक करीब आधे घंटे बाद पहुंचेगी. राज्य में इंटीग्रेडेट सिस्टम के तहत किसी अपराध की डायल 112 पर सूचना मिलने पर कम से कम समय में पुलिस को पहुंचने का टार्गेट मौखिक रूप से दिया गया है. कुछ ही जिलों की पुलिस कम समय में घटनास्थल पर पहुंचती है.

इमरजेंसी रिस्पांस में खूंटी जिला फिसड्डी, लेती है 36 मिनट का समय

इमरजेंसी रिस्पांस के तहत डायल 112 में आये फोन कॉल की पड़ताल करने पर पता चला कि खूंटी जिले में पुलिस को रिस्पांस करने में 35 मिनट 51 सेकेंड लग जातें हैं. सिमडेगा में 31 मिनट 48 सेकेंड, पाकुड़ में 28 मिनट 28 सेकेंड, रांची में 28 मिनट 16 सेकेंड, दुमका में 28 मिनट 11 सेकेंड, चाईबासा में 28 मिनट 07 सेकेंड पुलिस को रिस्पांस करने में लग जाते हैं.

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रांची समेत कई जिलों में एमडीटी टैब से नहीं होता केस का निष्पादन

इन जिलों में पुलिस के रिस्पांस टाइम की वजह से राज्य स्तर पर डायल 112 के ओवरऑल रिस्पांस टाइम पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है. पड़ताल में यह भी बात सामने आयी है कि बोकारो, देवघर, धनबाद, दुमका, गिरिडीह गोड्डा, पाकुड़ और रांची में अधिकांश केस या शिकायतों को माउंटेड डैसबोर्ड टैब अर्थात् एमडीटी टैब से निष्पादित नहीं कर मैनुअल तरीके से ही निष्पादित कर दिया जा रहा है.

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पुलिस मुख्यालय के निर्देश का उल्लंघन कर हो रहा शिकायतों का निबटारा

पुलिस मुख्यालय ने सभी जिलों को वर्ष 2024 में ही निर्देश दिया था कि प्राप्त शिकायतों को एमडीटी टैब से निष्पादित करें. फरवरी में इमरजेंसी रिस्पांस सिस्टम के तहत डायल 112 से सेंट्रल डेस्क को कार्रवाई योग्य 11,514 शिकायतें मिलीं. इसमें 9,334 शिकायतों को एमडीटी टैब के माध्यम से प्रेषित किया गया. शेष 2,190 शिकायतों को मैनुअल ही निष्पादित कर दिया गया. कुल 9,189 शिकायतों में पुलिस का औसत रिस्पांस समय 19 मिनट 12 सेकेंड था.

Emergency Response System Fail In Jharkhand Data
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कैसे काम करता है इमरजेंसी रिस्पांस सिस्टम डायल-112

इरमजेंसी रिस्पांस सिस्टम डायल 112 की पड़ताल में पाया गया कि सेंट्रल डेस्क डायल 112 के तहत प्राप्त शिकायत को दर्ज करते हुए जिला अंतर्गत संचालित डायल 112 को प्रेषित किया जाता है. इसके बाद संबंधित जिले के स्तर से उक्त शिकायतों को थाना पीसीआर या एमडीटी टैब को भेजकर विधिवत एमडीटी टैब से निष्पादित किया जाता है.

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मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.
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