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झारखंड में केवल 166 एसटी-एससी उद्यमी, 483 नये लोगों ने किया है आवेदन

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झारखंड में केवल 166 एसटी-एससी उद्यमी, 483 नये लोगों ने किया है आवेदन
Birsa Munda

सुनील चौधरी, रांची. झारखंड में अनुसूचित जनजाति (एसटी), अनुसूचित जाति (एससी) उद्यमियों की संख्या काफी कम है. भारत सरकार द्वारा एसटी-एससी उद्यमियों को बढ़ावा देने के लिए नेशनल एसटी-एससी हब योजना की शुरुआत की गयी थी. रांची में नेशनल एसटी-एससी हब का कार्यालय है. यहां अब-तक निबंधित एसटी-एससी उद्यमियों की संख्या 166 है, जबकि 483 ऐसे लोग हैं, जो उद्योग लगाना चाहते हैं और उन्होंने सहायता के लिए आवेदन दिया है. राज्य में वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार, झारखंड की कुल आबादी 3.29 करोड़ में एसटी आबादी 86.45 लाख है, जो कुल आबादी का 26.2 प्रतिशत है. वहीं एससी की आबादी 40 लाख है, जो कुल आबादी का 12 प्रतिशत है.

नेशनल एसटी-एससी हब के अनुसार रांची, धनबाद, बोकारो, लोहरदगा, गुमला, खूंटी, सिमडेगा, सरायकेला-खरसावां, पूर्वी सिंहभूम व पश्चिमी सिंहभूम जिलों में ये उद्यमी ज्यादा हैं. ज्यादातर लोग कैंटिन सर्विस, हाउस कीपिंग सर्विस, ट्रैवल एंड टूर, मैनपावर सप्लाई जैसे सेवा कार्यों में हैं. वहीं उत्पादन से जुड़े लोगों ने कस्टमाइज्ड मशीन, नट बोल्ट यूनिट, ग्लब्स, हर्बल साबुन, लिक्विड सोप, क्लीनिंग लिक्विड, फैब्रिकेशन, इंडस्ट्रियल शू के साथ-साथ स्टील व वुडेन ऑफिस फर्नीचर का यूनिट लगाया है. नेशनल एसटी-एससी हब योजना की शुरुआत केंद्र सरकार ने वर्ष 2016 में की थी. इस योजना का उद्देश्य अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों से संबंधित उद्यमियों को पेशेवर सहायता प्रदान करना है. सूक्ष्म और लघु उद्यमों के लिए केंद्र सरकार की सार्वजनिक खरीद नीति 2012 के तहत कुल सरकारी खरीद का चार प्रतिशत हिस्सा इन उद्यमियों से ही लेना है. इस योजना के तहत एसटी-एससी उद्यमियों को 25 प्रतिशत तक सब्सिडी देने का प्रावधान है. मशीन-उपकरणों की खरीदारी में भी 25 प्रतिशत सब्सिडी दी जाती है. इच्छुक उम्मीदवारों को नेशनल एसटी-एससी हब, एमएसएमइ मंत्रालय के पोर्टल पर या कार्यालय में जाकर आवेदन करना होता है.

चार प्रतिशत खरीदारी एसटी-एससी उद्यमियों से ही करनी है

भारत सरकार की पर्चेज पॉलिसी के अनुसार केंद्र सरकार के सभी विभाग अथवा पीएसयू को अपनी कुल खरीदारी का चार प्रतिशत एसटी-एससी उद्यमियों से लेना है. इन्हें टेंडर में भाग लेने पर प्राथमिकता देनी है. इसके अलावा जेम पोर्टल से खरीदारी में भी प्राथमिकता देनी है. आंकड़ों को देखे, तो झारखंड के केवल 0.11 प्रतिशत उद्यमी ही सरकारी पर्चेज के लिए जेम पोर्टल पर निबंधित हैं. हालांकि नेशनल एसटी-एससी हब द्वारा इसके लिए जगह-जगह जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं. एनटीपीसी, सीसीएल, डीआरएम कार्यालय, यूसिल, गेल, ओएनजीसी, सेल आदि में कार्यक्रम किये गये हैं और एसटी-एससी उद्यमियों को प्राथमिकता देने की बात कही गयी है.

10 करोड़ निवेश करके 100 लोगों को रोजगार दे रहे हैं राजेंद्र

एससी समुदाय से आनेवाले उद्यमी राजेंद्र कुमार ने आदित्यपुर फेज-3 में आइडल पुली मशीन की यूनिट लगायी है. रांची में इनका पहले से ही जिबासिया गैस एजेंसी का काम है. आदित्यपुर में इन्होंने 10 करोड़ रुपये की पूंजी लगा कर कारखाना की स्थापना की है. जिसमें इस समय एक सौ से अधिक लोग काम करते हैं. राजेंद्र कुमार ने प्रभात खबर को बताया कि चार प्रतिशत की खरीदारी सरकारी विभागों को करनी है. पर कोई भी विभाग ऐसा नहीं करता. झारखंड में जैम पोर्टल का भी लाभ नहीं मिलता. केवल निजी कंपनी टाटा स्टील ग्रुप ही इसका पूरी तरह पालन कर रही है. वे हर खरीदारी में एसटी-एससी उद्यमियों को ही प्राथमिकता देते हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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