[tdb_header_weather inline="yes" temp_color="#000000" loc_color="#000000" api="653566bd56b7ecfee45d74c0fc937fc1" float_right="yes" align_horiz="content-horiz-center" icon_size="24" icon_space="10" f_temp_font_family="420" f_temp_font_size="14" f_temp_font_weight="500" f_unit_font_size="14" f_loc_font_size="14" f_unit_font_family="882" location="Ranchi" icon_color="#000000"]
[tdb_header_categories align_horiz="content-horiz-left" el_align_horiz="content-horiz-left" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLXJpZ2h0IjoiNSIsImhlaWdodCI6IjQwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9fQ==" icon_size="18" limit="18" elem_text_color="#2d2800" f_elem_font_family="420" f_elem_font_size="16px" f_elem_font_weight="500" tdicon="tdc-font-fa tdc-font-fa-navicon-reorder-bars" inline="yes" shadow_shadow_size="0" shadow_shadow_offset_vertical="0" shadow_shadow_spread="0" bg_color="#f9f9f9" include="1028, 1081, 1446, 1228, 3706, 2624,1071"][tdb_mobile_horiz_menu inline="yes" menu_id="372" tdc_css="eyJwaG9uZSI6eyJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBob25lX21heF93aWR0aCI6NzY3LCJhbGwiOnsiYm9yZGVyLXN0eWxlIjoibm9uZSIsImRpc3BsYXkiOiIifX0=" f_elem_font_size="18px" f_elem_font_weight="eyJhbGwiOiI3MDAiLCJwaG9uZSI6IiJ9" f_elem_font_family="420" text_color_h="#f58220" main_sub_icon_size="13"]
Home झारखण्ड रांची अपने सिद्धांतों से कभी नहीं किया समझौता, प्रचार के लिए पेड़ पर खुद ठोका था अपना पोस्टर

अपने सिद्धांतों से कभी नहीं किया समझौता, प्रचार के लिए पेड़ पर खुद ठोका था अपना पोस्टर

0
अपने सिद्धांतों से कभी नहीं किया समझौता, प्रचार के लिए पेड़ पर खुद ठोका था अपना पोस्टर
एन ई होरो (फाइल फोटो)

NE Horo|jharkhand election 2024| रांची: निरल एनम होरो (एनई होरो) झारखंड आंदोलन के एक बड़े नेता थे. जब जयपाल सिंह मुंडा ने झारखंड पार्टी का कांग्रेस में विलय कर दिया था, तब एनई होरो की अगुवाई में झारखंड पार्टी का पुनर्गठन किया गया था. उनकी छवि बेदाग रही है. चुनाव प्रचार के लिए उन्होंने खुद पेड़ पर अपना पोस्टर ठोका था. वे बहुमुखी प्रतिभा के व्यक्ति थे. लेखक, संपादक व जीइएल चर्च के सचिव के तौर पर उन्होंने काम किया. इसके अलावा एक जमीनी राजनेता के रूप में उन्हें जाना जाता है. वे एक से अधिक बार विधायक बने. बाद में सांसद और मंत्री भी रहे. अपने जीवन के अंतिम समय तक वे जीइएल चर्च कंपाउंड में खपड़े के घर में रहे. उन्होंने अपने सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं किया. 11 दिसंबर 2008 को उनका निधन हो गया था.

पहली बार 1967 में कोलेबिरा से बने थे विधायक

एनई होरो पहली बार 1967 में कोलेबिरा विधानसभा क्षेत्र से विधायक बने थे. चुनाव में उनका मुकाबला उस समय के बड़े नेता एसके बागे से था. एनई होरो ने कोलेबिरा के एक गांव में जाकर एक पेड़ में अपने परिचय का पोस्टर ठोक दिया और गांव वालों से कहा कि वे झारखंड और झारखंड वासियों के हित की लड़ाई लड़ने आये हैं.

Read Also: 81 में 70 विधायकों का टिकट कंफर्म, 4 बन गये सांसद, जानें दल बदल करने वाले कितने विधायक लड़ रहे चुनाव

ऐप पर पढें
होम आप का शहर
News Snap News Reel