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आखिर काले बढ़ते जात हय नागपुरी भासा कर लोकप्रियता

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आखिर काले बढ़ते जात हय नागपुरी भासा कर लोकप्रियता

अशोक कुमार

जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा, नागपुरी विभाग, रांची विवि, रांची

जानेक चाही की झारखंड में अनेक भासा कर रहते नागपुरी कर काले लोकप्रियता बढ़ते ज़ात हय. हामिन कर जानकारी कर मोताबिक झारखंड में सब जनजाति मन कर आपन आपन भासा हय. मुदा भासा परिवार कर सोब भासा में नागपुरी के अधिकांस जनजाति मन जानय ना. इकर कारन का हय? इकर कारन नागपुरी भस कर सरल सहज, मधुर आऊर लोकप्रिय भासा लगे. नागपुरी के उचारन कर हिसाब से लिखल जायला.

नागपुरी भासा कर बिसेसता के जानेक चाही. हिंदी कर स्वर आऊर व्यंजन में नागपुरी भासा में काटिक फरक आहे, नागपुरी भासा में व्यंजन वर्ण में श, ष, कर ठांव पहे ‘स’ आऊर य कर जगन ‘ज’ कर परजोग करल जायला.आऊर संयुक्ताक्षर कर परजोग नी करल जायला, नागपुरी भासा जइसंन बोलल जायला वइसंन लिखल हो जायला. नागपुरी आर्य भासा कर संगे संग जनसंपर्क भासा भी लगे. नागपुरी भासा कर छेत्तर कर बात करल जाय तो, झारखंड कर पश्चिम बंगाल, झालदा, पुरुलिया, उड़ीसा में बामड़ा, असम कर चाय बागान, छत्तीसगढ़ में जशपुर, अंडमान निकोबार में नागपुरी कम-बेसी बोलल जायला.

नागपुरी भासा कर लोकप्रियता कर कारन के जानेक चाही कि प्राचीन समय से नागपुरी नगवंशी काल में नागपुरी राईज पाठ कर भासा रईह चुईक हय. इकर अलावे जखन ईसाई मिशनरी मन कर झारखंड में आगमन 1948 में होलक. ईसाई मिशनरी मन आपन धरम कर परचार करे ले नागपुरी भासा के प्राथमिकता देलयं आऊर धार्मिक पत्रिका मन भी नागपुरिया भासा में छापलयं.

नागपुरी भासा कर पढ़ाई रांची विश्वविद्यालय में सूरु होलक. सेहे बेरा से नागपुरी भाषा कर पहिया चलेक सूरू होलक. संगे संग झारखंड कर आऊर भी कालेज में नागपुरी कर पढाई सूरू भेलक. नागपुरी भासा के झारखंड लोक सेवा में भी जगह देवल गेलक, इकर अलावे वर्तमान में झारखंड कर लगभग नोकरी पेसा में नागपुरी भासा के ठांव देवल गेलक, सेकर से नागपुरी कर आऊर भी पढवइया कर संख्या बढलक.

एहे नई बल्कि नागपुरी भासा के झारखंड कर प्राथमिक स्कूल में भी सिक्षा से जोडल गेलक. जेकर से नागपुरी कर लोकप्रियाता कर अंदाज लगाल जाय सकेला. हामिन के जानेक चाही कि झारखंड में नागपुरी भासा कर गोड़ पसरते जात हय.

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