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Home झारखण्ड रांची रिम्स सर्जरी विभाग के ओटी में बिजली कटने पर बंद हो जाती है मशीन, मरीजों की जान पर खतरा

रिम्स सर्जरी विभाग के ओटी में बिजली कटने पर बंद हो जाती है मशीन, मरीजों की जान पर खतरा

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रिम्स सर्जरी विभाग के ओटी में बिजली कटने पर बंद हो जाती है मशीन, मरीजों की जान पर खतरा

राजीव पांडेय, रांची. रिम्स के सर्जरी विभाग में झारखंड के विभिन्न जिलों के अलावा पड़ोसी राज्यों से भी मरीज इलाज कराने आते हैं. लेकिन, यहां पहुंचने के बाद उन्हें हर कदम पर परेशानी का सामना करना पड़ता है. सर्जरी विभाग में तीन मॉड्यूलर ओटी हैं. वहीं, तीन अतिरिक्त मॉड्यूलर ओटी का प्रस्ताव दिया गया है. चिंता की बात यह है कि ऑपरेशन थियेटर में बिजली की वैकल्पिक व्यवस्था नहीं है. इस कारण बिजली कटने पर कई बार मशीन बंद हो जाती है, जिससे मरीजों की जान पर संकट हो जाता है.

सर्जरी विभाग में ऑपरेशन के लिए भर्ती होने के बाद जांच व ब्लड की व्यवस्था करने में भी मरीजों के परिजनों के पसीने छूट जाते हैं. वहीं, दवा की कमी से भी जूझना पड़ता है. सबसे बड़ी बात यह है कि ऑपरेशन के बाद गंभीर मरीजों को रखने के लिए जो आइसीयू है, उसमें मामूली सुविधा भी नहीं है. आइसीयू में कई बेड पर मॉनिटर नहीं है. वहीं, तीन में से दो वेंटिलेटर खराब हैं. इस कारण डॉक्टरों को भी मरीज के ठीक होने तक जद्दोजहद करनी पड़ती है.

इधर, सर्जरी विभाग में 15 सीनियर डॉक्टर, 12 सीनियर रेजीडेंट और 72 जूनियर रेजीडेंट हैं. हर यूनिट में सीनियर और जूनियर रेजीडेंट की तैनाती की जाती है. सीनियर और जूनियर रेजीडेंट सूई और दवा देने का काम भी करते हैं. इन डॉक्टरों को हर माह वेतन के मद में करीब 2.50 करोड़ रुपये दिये जाते हैं. वहीं, तीन मरीज पर एक नर्स होना चाहिए, लेकिन 40 मरीजों के लिए दो या तीन नर्स हैं. थर्ड और फाेर्थ ग्रेड स्टाफ एक भी नहीं है. वहीं, कई वार्ड में फर्श टूटी हुई है. इस कारण ट्रॉली से मरीज को ले जाने में काफी दिक्कत होती है.

हर माह लगभग 1150 मरीजों की होती है सर्जरी

सर्जरी विभाग के ओपीडी में हर माह करीब 3,000 मरीजों को परामर्श दिया जाता है. वहीं, हर माह करीब 1,000 मरीजों को भर्ती कर इलाज किया जाता है. इनमें से 340-380 मरीजों की मेजर और माइनर सर्जरी की जाती है. वहीं, हर माह इमरजेंसी में आये करीब 750 से 800 मरीजों की सर्जरी सीओटी में की जाती जाती है.

बोले विभागाध्यक्ष

सर्जरी विभाग में डॉक्टर (असिस्टेंट प्रोफेसर) की बहुत कमी है. वहीं, एक भी थर्ड और फोर्थ ग्रेड कर्मी नहीं है. इससे काफी परेशानी होती है. आइसीयू में भी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है. इसके अपग्रेडेशन का प्रस्ताव भेजा गया है. ओटी में बिजली की वैकल्पिक व्यवस्था नहीं है. इस कारण सर्जरी के दौरान बिजली कटने से मशीन ट्रिप कर जाती है. इससे परेशानी होती है. इसमें शीघ्र सुधार होने की उम्मीद है.

डॉ शीतल मलुआ, विभागाध्यक्षB

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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