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रांची में गैस के लिए अब भी लग रही लंबी लाइन, भीषण गर्मी में लोग परेशान

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रांची में गैस के लिए अब भी लग रही लंबी लाइन, भीषण गर्मी में लोग परेशान
रांची में एलपीजी सिलेंडरों के लिए रोजाना लाइन लग रही है. फाइल फोटो.

रांची से राजेश कुमार की रिपोर्ट

Ranchi News: तेल कंपनियों की ओर से भले ही रसोई गैस सिलेंडरों की सामान्य डिलीवरी का दावा किया जा रहा हो, लेकिन झारखंड की राजधानी रांची में अब भी उपभोक्ताओं को सिलेंडर पाने के लिए लंबी लाइन लगानी पड़ रही है. सिलेंडरों की समय पर होम डिलीवरी नहीं हो रही है. भीषण गर्मी में लोग परेशान हो रहे हैं. बुधवार को इरगु टोला, कैलाश मंदिर के निकट उरांव गैस के उपभोक्ता सुबह से सिलेंडर के लिए लाइन में दिखे. स्थिति यह थी कि लोग घंटों लाइन में सिलेंडर के लिए इंतजार में लगे थे. जबकि, दोपहर में ऑटो सिलेंडर लेकर पहुंचा. इस दौरान कुछ ग्राहकों को सिलेंडर मिला, तो कई ग्राहकों को सिलेंडर नहीं मिला.

रांची में 60,000 से अधिक बैकलॉग

स्थिति यह है कि रांची में 60,000 से अधिक बैकलॉग है. मतलब यह कि इतने लोग गैस के लिए इंतजार में हैं. हर दिन रांची में बुकिंग लगभग 10,000 से अधिक सिलेंडर का है. जबकि, डिलिवरी 11,000 से अधिक हो रही है. वहीं, कॉमर्शियल सिलेंडर की हर दिन 250 से अधिक सिलेंडर की डिमांड है. जबकि, सप्लाई 350 से अधिक की है. होटल, रेस्टूरेंट से लेकर शादी-ब्याज और श्राद्ध के लिए कॉमर्शियल सिलेंडर दिया जा रहा है.

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कॉमर्शियल सिलेंडर की बढ़ी डिमांड

शादी के लगन के कारण कॉमर्शियल सिलेंडर की डिमांड अधिक बढ़ गयी है. 120 से अधिक लोगों ने कॉमर्शियल सिलेंडर के लिए आवेदन दिया है. हर लोगों को 19 किलो का अधिकतम तीन सिलेंडर दिया जा रहा है. जिला आपूर्ति कार्यालय से मिले आवेदन के बाद कंपनियां संबंधित गैस एजेंसियों को कॉमर्शियल सिलेंडर देने की अनुमति दे रही हैं. इसके लिए सिक्यूरिटी डिपोजिट के साथ-साथ रिफिल का पैसा लोगों से लिया जा रहा है.

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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