[tdb_header_weather inline="yes" temp_color="#000000" loc_color="#000000" api="653566bd56b7ecfee45d74c0fc937fc1" float_right="yes" align_horiz="content-horiz-center" icon_size="24" icon_space="10" f_temp_font_family="420" f_temp_font_size="14" f_temp_font_weight="500" f_unit_font_size="14" f_loc_font_size="14" f_unit_font_family="882" location="Ranchi" icon_color="#000000"]
[tdb_header_categories align_horiz="content-horiz-left" el_align_horiz="content-horiz-left" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLXJpZ2h0IjoiNSIsImhlaWdodCI6IjQwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9fQ==" icon_size="18" limit="18" elem_text_color="#2d2800" f_elem_font_family="420" f_elem_font_size="16px" f_elem_font_weight="500" tdicon="tdc-font-fa tdc-font-fa-navicon-reorder-bars" inline="yes" shadow_shadow_size="0" shadow_shadow_offset_vertical="0" shadow_shadow_spread="0" bg_color="#f9f9f9" include="1028, 1081, 1446, 1228, 3706, 2624,1071"][tdb_mobile_horiz_menu inline="yes" menu_id="372" tdc_css="eyJwaG9uZSI6eyJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBob25lX21heF93aWR0aCI6NzY3LCJhbGwiOnsiYm9yZGVyLXN0eWxlIjoibm9uZSIsImRpc3BsYXkiOiIifX0=" f_elem_font_size="18px" f_elem_font_weight="eyJhbGwiOiI3MDAiLCJwaG9uZSI6IiJ9" f_elem_font_family="420" text_color_h="#f58220" main_sub_icon_size="13"]
Home झारखण्ड रांची रांची के दिवाकर को मिली नई जिंदगी, जटिल ऑपरेशन में डॉक्टरों को मिली बड़ी सफलता

रांची के दिवाकर को मिली नई जिंदगी, जटिल ऑपरेशन में डॉक्टरों को मिली बड़ी सफलता

0
रांची के दिवाकर को मिली नई जिंदगी, जटिल ऑपरेशन में डॉक्टरों को मिली बड़ी सफलता
मरीज का सफल ऑपरेशन करने के बाद डॉ अजीत कुमार (बीच में) और उनकी टीम के लोग. फोटो: प्रभात खबर

Ranchi News: झारखंड की राजधानी रांची में चिकित्सा क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि सामने आई है, जहां आधुनिक लैप्रोस्कोपिक तकनीक की मदद से एक जटिल ऑपरेशन सफलतापूर्वक किया गया. इस ऑपरेशन ने 38 वर्षीय दिवाकर कुमार को नई जिंदगी दी है, जो लंबे समय से गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे. यह सफलता इस बात का संकेत है कि अब महानगरों जैसी उन्नत चिकित्सा सुविधाएं झारखंड में भी उपलब्ध हो रही हैं.

दुर्लभ बीमारी से जूझ रहे थे मरीज

कचहरी क्षेत्र के निवासी दिवाकर कुमार बचपन से ही कई स्वास्थ्य समस्याओं से परेशान थे. उन्हें बार-बार संक्रमण, तेज बुखार, खून की कमी (लो हीमोग्लोबिन), प्लेटलेट्स की कमी और डब्ल्यूबीसी काउंट में गिरावट जैसी गंभीर समस्याएं होती थीं. स्थिति इतनी गंभीर थी कि उन्हें कई बार खून चढ़ाने की जरूरत पड़ती थी.

खतरनाक सीमा पर पहुंच जाता था पीलिया का स्तर

इसके अलावा, उनके शरीर में जॉन्डिस (पीलिया) का स्तर भी खतरनाक सीमा तक पहुंच जाता था. डॉक्टरों के अनुसार, उनका बिलीरुबिन लेवल 40 तक पहुंच गया था, जो जानलेवा स्थिति मानी जाती है. जांच में पता चला कि वे “ट्रॉपिकल मैसिव स्प्लेनोमेगाली (हाइपरस्प्लेनिज्म के साथ)” नामक दुर्लभ बीमारी से पीड़ित थे.

तिल्ली का बढ़ना बना परेशानी

इस बीमारी के कारण उनकी तिल्ली (स्प्लीन) सामान्य आकार से दोगुनी होकर करीब 20 सेंटीमीटर तक बढ़ गई थी. इसके चलते उनके पेट में लगातार भारीपन बना रहता था और भूख भी नहीं लगती थी. लंबे समय तक इलाज के बाद चिकित्सकों ने उन्हें तिल्ली हटाने की सलाह दी. हालांकि, इतनी बड़ी तिल्ली को निकालना एक जटिल और जोखिम भरा ऑपरेशन माना जाता है, खासकर जब इसे लैप्रोस्कोपिक तकनीक से करना हो.

डॉ अजीत कुमार की टीम ने किया चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन

मरीज ने पहले भी मां ललिता पालीडॉक, जय प्रकाश नगर, बरियातू में डॉ अजीत कुमार से इलाज कराया था. उनकी पित्त की थैली (गॉलब्लैडर) का ऑपरेशन भी डॉ अजीत कुमार ने ही सफलतापूर्वक किया था. इसी भरोसे के साथ दिवाकर ने दोबारा उनसे संपर्क किया.

डॉ अजीत कुमार की टीम ने स्वीकारी चुनौती

डॉ अजीत कुमार और उनकी टीम ने इस चुनौतीपूर्ण केस को स्वीकार किया. उन्होंने “टोटल लैप्रोस्कोपिक स्प्लेनक्टोमी” तकनीक का उपयोग करते हुए मात्र 2 सेंटीमीटर से भी छोटे छेद के जरिए 20 सेंटीमीटर की बड़ी तिल्ली को सफलतापूर्वक निकाल दिया. यह ऑपरेशन अत्यंत जटिल माना जाता है और आमतौर पर बड़े शहरों के उन्नत अस्पतालों में ही किया जाता है.

ऑपरेशन के बाद सेहत में तेजी से सुधार

ऑपरेशन के बाद दिवाकर कुमार की स्थिति में तेजी से सुधार देखने को मिला. जहां ऑपरेशन से पहले उनका प्लेटलेट काउंट महज 20,000 था, वहीं डिस्चार्ज के समय यह बढ़कर एक लाख से अधिक हो गया, जो सामान्य स्तर के करीब है. इसके अलावा, उनके अन्य ब्लड सेल्स भी सामान्य होने लगे और जॉन्डिस का स्तर भी नियंत्रण में आ गया. मरीज अब पूरी तरह स्वस्थ हैं और उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है.

इसे भी पढ़ें: रांची के सदर अस्पताल में नवजातों में हृदय रोग की जांच शुरू, 11 अप्रैल तक निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर

झारखंड में आधुनिक चिकित्सा की नई उम्मीद

यह सफल ऑपरेशन न केवल एक मरीज के लिए नई जिंदगी लेकर आया है, बल्कि यह झारखंड में चिकित्सा सुविधाओं के विकास का भी संकेत है. अब मरीजों को जटिल सर्जरी के लिए महानगरों का रुख नहीं करना पड़ेगा. डॉ अजीत कुमार और उनकी टीम की इस उपलब्धि ने यह साबित कर दिया है कि सही तकनीक और विशेषज्ञता के साथ राज्य में भी उच्च स्तरीय इलाज संभव है. यह उपलब्धि आने वाले समय में अन्य मरीजों के लिए भी उम्मीद की किरण बनकर सामने आई है.

इसे भी पढ़ें: जेल भेजे गए हंटरगंज में छात्रा को गर्भवती करने वाले हेडमास्टर, सदर अस्पताल में होगी बच्ची की जांच

Previous article कहीं आपका हेल्थ इंश्योरेंस भी तो नहीं है ‘आधा-अधूरा’? क्लेम के समय कंपनियां ऐसे करती हैं ‘खेल’
Next article कार की छत पर क्यों बने होते हैं उभरे हुए पैटर्न? अच्छे-अच्छे ड्राइवरों को नहीं पता होती वजह
Avatar Of Kumarvishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
ऐप पर पढें
होम आप का शहर
News Snap News Reel