[tdb_header_weather inline="yes" temp_color="#000000" loc_color="#000000" api="653566bd56b7ecfee45d74c0fc937fc1" float_right="yes" align_horiz="content-horiz-center" icon_size="24" icon_space="10" f_temp_font_family="420" f_temp_font_size="14" f_temp_font_weight="500" f_unit_font_size="14" f_loc_font_size="14" f_unit_font_family="882" location="Ranchi" icon_color="#000000"]
[tdb_header_categories align_horiz="content-horiz-left" el_align_horiz="content-horiz-left" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLXJpZ2h0IjoiNSIsImhlaWdodCI6IjQwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9fQ==" icon_size="18" limit="18" elem_text_color="#2d2800" f_elem_font_family="420" f_elem_font_size="16px" f_elem_font_weight="500" tdicon="tdc-font-fa tdc-font-fa-navicon-reorder-bars" inline="yes" shadow_shadow_size="0" shadow_shadow_offset_vertical="0" shadow_shadow_spread="0" bg_color="#f9f9f9" include="1028, 1081, 1446, 1228, 3706, 2624,1071"][tdb_mobile_horiz_menu inline="yes" menu_id="372" tdc_css="eyJwaG9uZSI6eyJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBob25lX21heF93aWR0aCI6NzY3LCJhbGwiOnsiYm9yZGVyLXN0eWxlIjoibm9uZSIsImRpc3BsYXkiOiIifX0=" f_elem_font_size="18px" f_elem_font_weight="eyJhbGwiOiI3MDAiLCJwaG9uZSI6IiJ9" f_elem_font_family="420" text_color_h="#f58220" main_sub_icon_size="13"]
Home झारखण्ड रांची रांची : मूलभूत सुविधाओं के अभाव में जी रहें कोयरीबेड़ा के ग्रामीण, पानी-सड़क और बिजली का संकट 

रांची : मूलभूत सुविधाओं के अभाव में जी रहें कोयरीबेड़ा के ग्रामीण, पानी-सड़क और बिजली का संकट 

0
रांची : मूलभूत सुविधाओं के अभाव में जी रहें कोयरीबेड़ा के ग्रामीण, पानी-सड़क और बिजली का संकट 
मूलभूत सुविधाओं के अभाव में जी रहें कोईरीबेडा के ग्रामीण

नामकुम से राजेश वर्मा की रिपोर्ट 

Ranchi News : झारखंड की राजधानी रांची से 20 किलोमीटर और प्रखंड मुख्यालय से 12 किलोमीटर दूर स्थित हाहाप पंचायत के कोयरीबेड़ा गांव की स्थिति बिल्कुल विपरीत है. कोयरीबेड़ा गांव की स्थिति राज्य सरकार के तमाम विकास के दावों की पोल खोलती है. कोयरीबेड़ा के ग्रामीण आजादी के वर्षों बाद भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं. लगातार बढ़ रही सूर्य की तपिश, पारा 41 डिग्री के पार होने की वजह से लोग परेशान है. ना पेयजल, ना नहाने धोने के लिए पानी की व्यवस्था. सुबह उठते ही पानी के लिए भागम भाग वाली जिंदगी. सर पर डेकची, बाल्टी लेकर चुआं तक पगडंडियों का सफर यही कोयरीबेड़ा की पहचान बन गया है. गांव में सड़क, पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा का अभाव है. कोयरी बेड़ा में सभी टोला मिलाकर 100 घरों में 500 से अधिक ग्रामीण रहते हैं. सरकार के द्वारा तीन व सीसीएल के द्वारा एक जलमीनार के अलावा आधा दर्जन हैंडपंप लगें हैं परंतु सभी खराब हैं. गांव की पूरी आबादी पीने के पानी के लिए कुआं नुमा चुंआ और नहानें धोनें के लिए दाडी (डोभा) और एक किलोमीटर दूर ग्रामीण नदी के दूषित पानी पर निर्भर है. इसी दाडी में जानवर भी पानी पीते हैं. 

सड़क की स्थिति भी बद्तर

हाहाप के सरवल से कोयरीबेड़ा होते हुए रुडुंगकोचा, बुंडू बेड़ा, बुतियो, नचलदाग, तुंजू को जोड़ने वाली सड़क जर्जर हो गई है जिससे दुर्घटना की संभावना बनी रहतीं हैं. दो साल पहले चुनाव के पूर्व विधायक ने सरवल में शिलान्यास किया था परंतु मरम्मती कार्य आजतक नहीं शुरु हुआ. गुस्साए ग्रामीणों ने शिलापट्ट भी तोड़ दिया. कोयरीबेड़ा के बारु टोली में एक भी जलमीनार या हैंडपंप नहीं है. आज तक सड़क नहीं बनीं हैं जिससे गांव तक गाड़ी नहीं पहुंचती है. बीमार पड़ने पर खटिया पर लादकर मरीज को मुख्य सड़क तक लाना पड़ता है. 

24 में 4 से 5 घंटे रहती हैं बिजली 

सड़क, पानी के साथ बिजली की आंख-मिचौली से भी कोयरीबेड़ा के ग्रामीण परेशान हैं. मुख्यमंत्री ने ग्रामीण क्षेत्रों में 12 से 15 घंटे बिजली आपूर्ति करने का आदेश दिया है परंतु गांव में महज 4 से 5 घंटे ही बिजली रहतीं हैं. हल्के आंधी-तूफान में बिजली काट दी जाती हैं, दोबारा कब आएंगी यह भगवान भरोसे है. 

चुनाव बूथ पर भी सुविधाएं नदारद 

लोकसभा, विधानसभा या पंचाय चुनाव के दौरान गांव के नव प्राथमिक विद्यालय को मतदान के लिए बूथ (नंबर 254) बनाया जाता है. बूथ पर भी सड़क, पानी, बिजली की व्यवस्था नहीं है. चुनाव के दौरान वैकल्पिक व्यवस्था की जाती हैं.

  • नाने कच्छप उर्फ नन्हे कच्छप मुखिया हाहप पंचायत कहते हैं मुखिया के अधिकार और शक्ति सीमित है. अपनी मर्जी से कुछ नहीं कर सकतें. पूरे पंचायत के खराब हैंडपंप और जल मीनार की सूची जल और स्वच्छता विभाग एवं प्रखंड स्तर पर आवेदन दिया गया है. कई बार फोन भी किया परंतु मरम्मती नहीं हुआ. सड़क के अभाव में दो बार बोरिंग गाड़ी लौट गईं. अपने फंड से गार्डवाल बनवाया. सड़क निर्माण के लिए स्थानीय विधायक और कार्यपालक अभियंता को आवेदन दिया है.
  • हरीश कुमार गंझू ग्राम प्रधान कहते हैं राजस्व ग्राम होने के बावजूद कोयरीबेड़ा में पेयजल, सड़क, बिजली, स्वास्थ्य सेवाओं का आभाव हैं. सांसद, विधायक चुनाव के समय या किसी कार्यक्रम में आते हैं गांव के विकास के लिए उनका प्रयास शुन्य हैं. ग्रामसभा में प्रस्ताव पारित कर भेजा गया है सब ठंडे बस्ते में चला गया. 

ग्रामीणों ने सुनाई कहानी, पानी-सड़क-बिजली की समस्या से परेशान लोग

  • सीता देवी ग्रामीण सड़क और बिजली के बिना किसी तरह गुजर बसर चल रहा है परंतु पानी की समस्या विकराल हैं. दाडी और चुंआ का पानी पीने और नहाने धोने में प्रयोग करते हैं. वो भी दूर हैं. 
  • विजय गंझू – सड़क,पानी, बिजली, स्वास्थ्य सेवाओं के अभाव में जीने का आदत हो गया है. लगता ही नहीं की राजधानी में रह रहें हैं. सांसद, विधायक को पहले करना चाहिए. 
  • सुदर्शन गंझू दुर्भाग्य की बात है कि राजधानी में रहने के बावजूद मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं है. सरकार बड़े-बड़े वादे व दावे करतीं हैं परंतु जमीनी हकीकत अलग है. दूषित पानी पीने की वजह से ग्रामीण बीमार भी ज्यादा पड़ते हैं. 
  • जुली देवी 65 वर्षीय जुली देवी ने बताया कि जबसे शादी हुई है चुंआ और दाडी के पानी पर निर्भर है. आधा से ज्यादा जिंदगी बीत गईं. आने वाली पीढ़ी के लिए बेहतर होना चाहिए. 
  • विजय कुमार गंझू – राज्य सरकार विकास के तमाम दावे करती है परंतु जमीनी हकीकत कुछ और है. विकास की बाते सिर्फ फाईल तक सीमित है. सासंद व विधायक को ग्रामीणो की समस्या से मतलब नही है, सिरफ चुनाव में वोट चाहिए. 
  • सरस्वती देवी – मजबूरी में डोभा, दाडी के दूषित पानी को ग्रामीण व जानवर पीने व नहाने में प्रयोग करते हैं. चुनाव के अलावा कभी जनप्रतिनिधि देखने तक नहीं आते.
  • मंजू कुमारी – सड़क, पानी, बिजली, की समस्या को सीधा असर आने वाली पीढ़ी पर पड़ रहा है. मेहमान और शादी ब्याह में रिश्तेदार आने से परहेज करते हैं. लड़की के परिजन गांव के लड़कों से शादी करने से कतराते हैं.

यह भी पढ़ें: गोड्डा : विश्वासखानी में शुद्ध पेयजल प्लांट की सौगात, ग्रामीणों में खुशी की लहर

यह भी पढ़ें: HDFC और SBI कार्ड ब्लॉक होने का झांसा देकर उड़ाते थे पैसे, जामताड़ा से 3 साइबर अपराधी गिरफ्तारी

ऐप पर पढें
होम आप का शहर
News Snap News Reel