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Home झारखण्ड रांची रांची के शिक्षाविद अभय कुमार मिश्रा को अग्रिम जमानत, हाईकोर्ट ने तीन सप्ताह में सरेंडर करने का दिया निर्देश

रांची के शिक्षाविद अभय कुमार मिश्रा को अग्रिम जमानत, हाईकोर्ट ने तीन सप्ताह में सरेंडर करने का दिया निर्देश

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रांची के शिक्षाविद अभय कुमार मिश्रा को अग्रिम जमानत, हाईकोर्ट ने तीन सप्ताह में सरेंडर करने का दिया निर्देश
झारखंड हाईकोर्ट की फाइल फोटो.

रांची से राणा प्रताप रिपोर्ट

Jharkhand High Court: झारखंड हाईकोर्ट ने रांची के शिक्षाविद और स्कूल प्रबंधन से जुड़े अभय कुमार मिश्रा को बड़ी राहत देते हुए अग्रिम जमानत प्रदान की है. जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की अदालत ने जगन्नाथपुर थाना कांड संख्या 314/2017 से जुड़े मामले में सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया. अदालत ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता तीन सप्ताह के भीतर निचली अदालत में आत्मसमर्पण करें. आत्मसमर्पण अथवा गिरफ्तारी की स्थिति में उन्हें निर्धारित शर्तों के साथ जमानत पर रिहा किया जाएगा.

धोखाधड़ी और जालसाजी के आरोपों से जुड़ा है मामला

अभय कुमार मिश्रा के खिलाफ वर्ष 2017 में जगन्नाथपुर थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई थी. मामले में भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत आपराधिक विश्वासघात, धोखाधड़ी, जालसाजी, चोरी और आपराधिक षड्यंत्र के आरोप लगाए गए हैं. पुलिस जांच पूरी होने के बाद 31 दिसंबर 2023 को चार्जशीट दाखिल की गई थी और निचली अदालत संज्ञान भी ले चुकी है. याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि वह जांच में लगातार सहयोग करते रहे हैं. साथ ही इससे पहले इसी मामले में उन्हें अंतरिम संरक्षण भी प्राप्त था, जिसके समाप्त होने के बाद अग्रिम जमानत की याचिका दाखिल की गई.

स्कूल प्रबंधन को लेकर लंबे समय से विवाद

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि मामला स्कूल प्रबंधन और चुनावी विवाद से जुड़ा है. उनका कहना था कि स्कूल भवन निर्माण, वित्तीय लेनदेन और उनकी पत्नी की नियुक्ति को लेकर लगाए गए आरोप निराधार हैं. उन्होंने अदालत को बताया कि उनकी पत्नी की नियुक्ति वर्ष 2009 में हुई थी, जबकि वह वर्ष 2015 में स्कूल के सचिव बने थे. वहीं, सूचक महेश तिवारी ने अदालत में स्वयं उपस्थित होकर अग्रिम जमानत का विरोध किया. उन्होंने आरोप लगाया कि स्कूल फंड के दुरुपयोग, भवन निर्माण में अनियमितता, आयकर विभाग की कार्रवाई और अन्य वित्तीय गड़बड़ियों में याचिकाकर्ता की भूमिका रही है.

चार्जशीट दाखिल होना जमानत में बाधा नहीं

मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि केवल चार्जशीट दाखिल हो जाने से अग्रिम जमानत याचिका खारिज नहीं की जा सकती. अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा कानून का महत्वपूर्ण उद्देश्य है और प्रत्येक मामले का निर्णय उसके तथ्यों के आधार पर किया जाना चाहिए.

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25 हजार रुपये के मुचलके पर मिली राहत

सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने अभय कुमार मिश्रा को अग्रिम जमानत देने का आदेश दिया. अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता तीन सप्ताह के भीतर संबंधित अदालत में आत्मसमर्पण करें. इसके बाद 25 हजार रुपये के निजी मुचलके और समान राशि के दो जमानतदारों के आधार पर उन्हें जमानत पर रिहा किया जाएगा. साथ ही उन्हें ट्रायल में सहयोग करने और न्यायालय द्वारा निर्धारित सभी शर्तों का पालन करने का निर्देश दिया गया है.

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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