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Home झारखण्ड रांची ओपन करेक्शनल इंस्टीट्यूट की निगरानी समिति के गठन पर हाईकोर्ट सख्त, 10 दिनों में बनाने का आदेश

ओपन करेक्शनल इंस्टीट्यूट की निगरानी समिति के गठन पर हाईकोर्ट सख्त, 10 दिनों में बनाने का आदेश

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ओपन करेक्शनल इंस्टीट्यूट की निगरानी समिति के गठन पर हाईकोर्ट सख्त, 10 दिनों में बनाने का आदेश
झारखंड हाईकोर्ट

रांची से राणा प्रताप की रिपोर्ट

Jharkhand High Court: झारखंड हाईकोर्ट ने ओपन करेक्शनल इंस्टीट्यूट (ओसीआई) के प्रबंधन के लिए राज्य स्तरीय निगरानी समिति के गठन में हो रही देरी पर राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई है. मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने कहा कि सरकार का रवैया यह दर्शाता है कि वह सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के आदेशों के अनुपालन को लेकर गंभीर नहीं है.

आठ सप्ताह का समय मांगने वाली याचिका खारिज

गुरुवार को स्वतः संज्ञान से दर्ज जनहित याचिका (डब्ल्यूपी पीआईएल संख्या 2273/2026) की सुनवाई के दौरान झारखंड सरकार की ओर से एसी टू एजी पीयूष चित्रेश ने एक अंतरिम आवेदन दाखिल कर आदेश के अनुपालन के लिए आठ सप्ताह का अतिरिक्त समय मांगा. अदालत ने इस आवेदन को पूरी तरह निराधार बताते हुए खारिज कर दिया. खंडपीठ ने कहा कि 13 अप्रैल 2026 को पारित आदेश में केवल 26 फरवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए निर्देशों को दोहराया गया था. ऐसे में अनुपालन में देरी का कोई औचित्य नहीं है.

निगरानी समिति की संरचना पहले से तय

अदालत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही राज्य स्तरीय मॉनिटरिंग कमेटी की संरचना निर्धारित कर चुका है. इसके बावजूद राज्य सरकार ने अपने आवेदन में यह कहा कि समिति के गठन का मसौदा तैयार कर सक्षम प्राधिकार के पास स्वीकृति के लिए भेजा गया है. हाईकोर्ट ने इस पर आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि जब समिति की संरचना पहले से तय है, तो फिर मसौदा तैयार करने की आवश्यकता ही क्या थी. अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि संभवतः कोई मसौदा तैयार ही नहीं किया गया, क्योंकि उसे आवेदन के साथ संलग्न नहीं किया गया है.

इन सदस्यों को शामिल करने का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार राज्य निगरानी समिति में जो सदस्य शामिल होंगे, उनमें राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष या उनके नामित प्रतिनिधि, जिसमें हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश भी शामिल हो सकते हैं. राज्य के गृह सचिव या अतिरिक्त सचिव स्तर से नीचे नहीं रहने वाले उनके प्रतिनिधि. जेल विभाग के उप महानिरीक्षक या उससे उच्च स्तर के अधिकारी, जिन्हें गृह विभाग नामित करेगा. मुख्य सचिव को 10 दिनों के भीतर कार्रवाई का निर्देश

10 दिनों के अंदर समिति गठित करने का निर्देश

हाईकोर्ट ने कहा कि 13 अप्रैल से अब तक पर्याप्त समय उपलब्ध था, लेकिन इसके बावजूद अत्यंत लापरवाही के साथ अतिरिक्त समय मांगा गया. इसे देखते हुए अदालत ने झारखंड के मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि बिना किसी और विस्तार की मांग किए 10 दिनों के भीतर राज्य निगरानी समिति का गठन सुनिश्चित करें.

24 जून तक रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश

खंडपीठ ने निर्देश दिया कि समिति के गठन से संबंधित अनुपालन रिपोर्ट 24 जून 2026 तक अदालत में दाखिल की जाए. इसके अलावा मुख्य सचिव को राज्य में संचालित ओपन करेक्शनल इंस्टीट्यूट की वर्तमान स्थिति, उनके प्रबंधन और अब तक के कार्यों का विस्तृत ब्योरा भी 24 जून तक प्रस्तुत करना होगा.

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25 जून को होगी अगली सुनवाई

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की आठ सप्ताह की समयवृद्धि संबंधी याचिका बिना किसी लागत के खारिज करते हुए मामले की अगली सुनवाई 25 जून 2026 को दोपहर 2:15 बजे निर्धारित की है. अदालत ने स्पष्ट संकेत दिया है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के पालन में किसी प्रकार की ढिलाई अब स्वीकार नहीं की जाएगी.

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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