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सारंडा को वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी घोषित करने का मामला मंत्री समूह को भेजेगी हेमंत सोरेन सरकार

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सारंडा को वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी घोषित करने का मामला मंत्री समूह को भेजेगी हेमंत सोरेन सरकार

Jharkhand Cabinet Decisions: पश्चिमी सिंहभूम जिले के सारंडा जंगल को वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी घोषित करने के पर झारखंड कैबिनेट की बैठक में चर्चा हुई. झारखंड सरकार के वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की ओर से लाये गये इस प्रस्ताव को मंत्रियों के समूह (ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स) को भेजने का निर्णय लिया गया. कहा गया कि मंत्री समूह क्षेत्र में रहने वाली जनजातियों के आर्थिक, सामाजिक स्थित और उस क्षेत्र में चल रही आर्थिक गतिविधियों का फील्ड असेसमेंट करने के बाद एक रिपोर्ट कैबिनेट को सौंपेगी. उस रिपोर्ट के आधार पर सरकार कोई अंतिम फैसला लेगी.

इन वन क्षेत्रों को आरक्षित वन क्षेत्र घोषित करना है

बुधवार को धुर्वा स्थित प्रोजेक्ट भवन में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में 27 प्रस्तावों पर चर्चा हुई, जिसमें यह प्रस्ताव भी शामिल था. चर्चा के बाद कैबिनेट ने पश्चिमी सिंहभूम जिला अंतर्गत सारंडा वन प्रमंडल के अंकुआ, समता, करमपदा, गुदलीवाद, त्रिकोशी, थलकोवाद के आरक्षित वन क्षेत्र के 57 हजार 590.41 हेक्टेयर या 575.19 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को सारंडा वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी घोषित करने से पहले इसे मंत्री समूह को भेजने का निर्णय लिया गया.

700 पहाड़ियों की गोद में बसा है सारंडा

सुप्रीम कोर्ट ने सारंडा वन क्षेत्र को वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी घोषित करने का झारखंड सरकार को आदेश दिया था. हरी-भरी वादियों और 700 पहाड़ियों की गोद में बसा सारंडा एशिया का सबसे बड़ा साल के वृक्षों का वन है. इसकी खामोशी में प्रकृति की अनकही कहानियां हैं, तो झरनों से गिरती जलधारा में कर्णप्रिय संगीत है. सूर्योदय और सूर्यास्त के अद्भुत नजारे और हाथियों के झुंडों की मस्त चाल इस वन क्षेत्र को और भी रहस्यमय बनाते हैं.

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सुप्रीम कोर्ट के आदेश ने सारंडा की ओर खींचा देश का ध्यान

सुप्रीम कोर्ट के आदेश ने एशिया के सबसे बड़े साल (सखुआ) के वृक्षों के जंगल की ओर पूरे देश का ध्यान खींचा. यहां के घने जंगल, झरने, वन्य जीव और प्राकृतिक वातावरण झारखंड के वाणिज्यिक और पारिस्थितिकी संलन को बनाये रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. औषधीय पौधों और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले वनस्पतियों की वजह से भी सारंडा लंबे समय से चर्चा में रहा है.

यहां फंसा है पेच

सुप्रीम कोर्ट ने सारंडा के 57,000 हेक्टेयर क्षेत्र को अभ्यारण्य घोषित करने और 13,000 हेक्टेयर में ससांगदाबुरु संरक्षण रिजर्व बनाने का आदेश दिया है. विशेषज्ञों का मानना है कि इससे जंगल और वन्यजीवों की सुरक्षा होगी, साथ ही खनिज संसाधनों का न्यायसंगत उपयोग भी सुनिश्चित होगा. सारंडा में लौह अयस्क का विशाल भंडार है. यहां लगभग 4 बिलियन टन का रिजर्व है.

सरकार को 5 लाख करोड़ रॉयल्टी मिलने की उम्मीद

अनुमान है कि 20-30 सालों में इन खदानों से 25 लाख करोड़ रुपए मूल्य के लौह अयस्क निकलेंगे, जिससे राज्य सरकार को लगभग 5 लाख करोड़ रुपए बतौर रॉयल्टी मिलेगी. यही वजह है कि लौह अयस्क और उद्योग की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सरकार इसका रिव्यू कर रही है. इस पर फैसला नहीं ले पा रही है.

ऐतिहासिक दस्तावेज और वर्किंग प्लान

वर्ष 1970 में सारंडा वर्किंग प्लान बना था, जिसमें ब्रिटिश सरकार ने सारंडा के ससांगदा इलाके को अभ्यारण्य के रूप में चिह्नित किया था. हालांकि, इसके दस्तावेज नहीं मिल रहे हैं. अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद इस क्षेत्र को अभ्यारण्य और ससांगदाबुरु को रिजर्व फॉरेस्ट घोषित करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. झारखंड में यह 10वां अभ्यारण्य होगा. दलमा, पलामू टाइगर रिजर्व, हजारीबाग और कोडरमा झारखंड के प्रमुख वन अभ्यारण्य हैं.

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