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Home झारखण्ड रांची जमाई षष्ठी पर बंग समाज में दामाद की खूब खातिरदारी

जमाई षष्ठी पर बंग समाज में दामाद की खूब खातिरदारी

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जमाई षष्ठी पर बंग समाज में दामाद की खूब खातिरदारी

रांची. बांग्ला कैलेंडर के अनुसार ज्येष्ठ महीने के शुक्लपक्ष की छठी तिथि को जमाई षष्ठी का व्रत मनाया जाता है. इस दिन जमाई यानी दामाद की सेवा और खातिरदारी होती है. बेटी और दामाद के साथ मंगल कामना करते हुए ईश्वर से पूरे परिवार की खुशहाली की कामना की जाती है. नये कपड़े दिये जाते हैं. विशेष व्यंजन बनाये जाते हैं. दामाद को मिठाई, आम-लीची सहित मौसमी फल खिलाये जाते हैं. साथ ही हाथ पंखे से जमाई को हवा करने की परंपरा भी है. इस वर्ष 12 जून को बंग समुदाय ने जमाई षष्ठी पर्व मनाया. घर-घर जमाई की पूजा की गयी. सास ने जमाई को पंखा झेला. बेटी-दामाद को उपहार भी दिये गये. इस पर्व को लेकर नवविवाहितों में खासा उत्साह दिखा. दुर्गाबाड़ी के सचिव सह पुजारी गोपाल भट्टाचार्य ने बताया कि बंग समुदाय में जमाई षष्ठी का खास महत्व है. जमाई को छह तरह के फल, मिठाई और पकवान खिलाने की परंपरा है.

जमाई षष्ठी मनाने बेंगलुरु पहुंचे सास-ससुर

पुरुलिया रोड निवासी अर्णव रॉय का कोकर निवासी अदिति मित्रा के संग विवाह बीते वर्ष 23 नवंबर को हुआ है. शादी के बाद अर्णव का यह पहली जमाई षष्ठी है. अर्णव इन दिनों पत्नी संग बेंगलुरु में रह रहे हैं. जमाई षष्ठी को लेकर ही सास कृष्णा मित्रा और ससुर आलाेक मित्रा बेंगलुरु पहुंच गये हैं, जहां सास ने जमाई का सत्कार किया. अर्णव कहते हैं कि बंग समुदाय में खास कर नवविवाहितों में इस पर्व का काफी महत्व है.

बेटी-दामाद का खूब हुआ सत्कार

सर्जना चौक निवासी डॉ ऋषि विश्वनाथ का विवाह 11 मार्च 2024 को हरमू निवासी डॉ प्राची के संग हुआ. दोनों पेशे से चिकित्सक हैं. जमाई षष्ठी के अवसर पर सास सुनीता और ससुर प्रवीण कुमार ने बेटी-दामाद का खूब सत्कार किया. ऋषि अपनी पत्नी के संग ससुराल पहुंचे. सास से आशीर्वाद लेने के बाद फल-मिठाई और विभिन्न व्यंजनों का स्वाद चखा. डॉ ऋषि ने कहा कि इस पर्व में जमाई का खूब सत्कार होता है, जो काफी अच्छा लगता है.

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