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आग लगी, तो भगवान ही मालिक

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आग लगी, तो भगवान ही मालिक

रांची. गर्मी ने सितम ढाना शुरू कर दिया है. हाल के दिनों में पटना, हजारीबाग व दरभंगा सहित अन्य जगहों पर अगलगी की घटना हो चुकी है. पटना के दो होटलों में आग लगने से छह लोग की मौत हो गयी. ऐसे में अगर बिहार की राजधानी पटना की तरह कोई हादसा रांची में हो जाये, तो आग पर काबू पाना मुश्किल हो जायेगा. रांची नगर निगम क्षेत्र में दो लाख 30 हजार घर हैं. इसमें से 48 हजार घरों का ही नक्शा पास है. इनमें से बहुमंजिली इमारतों (जी 2 से ऊपर) की संख्या दो हजार के आसपास है. लेकिन, 160 बहुमंजिली इमारतों को ही ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट रांची नगर निगम से मिला हुआ है. यानी नक्शा के अनुरूप इन बहुमंजिली इमारत का निर्माण कराया गया है. उसमें सुरक्षा के सभी इंतजाम किये गये हैं. शेष 1840 बहुमंजिली इमारतों में अगर किसी कारण से अगलगी की घटना हो जाती है, तो भगवान ही मालिक हैं. बहुमंजिली इमारतों में अपार्टमेंट, होटल, अस्पताल, मॉल आदि आते हैं. इसके अलावा तंग गलियों में बनीं बहुमंजिली इमारतें और भी खतरनाक हैं. क्योंकि, अगलगी की बड़ी घटना होने पर वहां दमकल की बड़ी गाड़ियां भी नहीं पहुंच सकती हैं. कई बहुमंजिली इमारतें ऐसी हैं, जहां फायर फाइटिंग की भी मुकम्मल व्यवस्था नहीं है.

तंग गलियों में हैं सैकड़ों छोटी-बड़ी दुकानें

रांची के श्रद्धानंद रोड, मौलाना आजाद रोड, गांधी चौक, सोनार पट्टी, ज्योति संगम रोड, कपड़ा पट्टी, रंगरेज गली, काली बाबू स्ट्रीट व महुआ गद्दी रोड की सड़कें कम चौड़ी हैं. लेकिन, यहां पर सैकड़ों छोटी-बड़ी दुकानें हैं. यहां प्रत्येक दिन करोड़ों का कारोबार होता है. लेकिन, ज्यादातर प्रतिष्ठान में फायर फाइटिंग सिस्टम की व्यवस्था नहीं है. ऐसे में अगर किसी प्रतिष्ठान में आग लग जाये, तो वहां दमकल की बड़ी गाड़ियों के पहुंचने में परेशानी होगी.

इन मुहल्लों में आग लगने पर स्थिति हो सकती है भयावह

रांची शहरी क्षेत्र में कई इलाके ऐसे हैं, जहां की सड़कें संकीर्ण हैं. इनमें विद्यानगर, मधुकम, इरगू टोली, आनंद नगर, हिंदपीढ़ी, खेत मुहल्ला, बांधगाड़ी में पूर्व विधायक के आसपास का इलाका, जयप्रकाश नगर, न्यू नगर आदि इलाकें शामिल हैं. इन जगहों पर धड़ल्ले से घर और बहुमंजिली इमारतों का निर्माण हुआ है. लेकिन, यहां अगलगी की घटना होने पर उस पर काबू पाना मुश्किल हो जायेगा.

11 तल्ला तक ही आग बुझाने की है व्यवस्था, मैन पावर भी कम

अगलगी की घटना से निपटने के लिए अग्निशमन विभाग के पास मैनपावर की काफी कमी है. स्वीकृत पद की तुलना में सिर्फ 25 प्रतिशत ही कर्मी हैं. रिटायर्ड होने के बाद उनकी जगह पर बहाली नहीं होने से रिक्ति बढ़ती जा रही है. वहीं, रांची में 25 तल्ला तक के अपार्टमेंट हैं. लेकिन, अग्निशमन विभाग के पास सिर्फ 11 तल्ला तक पहुंचने वाला सिर्फ एक हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म (स्काई लिफ्ट) है. जबकि, दो फोम टेंडर और 14 वाटर टेंडर है. नियम के मुताबिक, दमकल की एक गाड़ी पर छह स्टाफ की जरूरत रहती है. लेकिन, वर्तमान में सिर्फ एक गाड़ी पर सिर्फ दो या तीन स्टाफ ही जाते हैं. अग्निशमन विभाग में स्थायी स्टेट फायर अफसर तक नहीं है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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