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हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी वैध या अवैध इस पर सुप्रीम कोर्ट में आज होगी सुनवाई

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हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी वैध या अवैध इस पर सुप्रीम कोर्ट में आज होगी सुनवाई

विशेष संवाददाता (रांची). सुप्रीम कोर्ट ने कथित भूमि घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (इडी) द्वारा हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी को चुनौती देनेवाली याचिका पर मंगलवार को सुनवाई की. पीएमएलए की धारा 19 के प्रावधानों के तहत हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी वैध है या अवैध? याचिका में उठाये गये इस कानूनी बिंदु पर सुप्रीम कोर्ट में अब 22 मई को सुनवाई होगी. मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान चुनाव के मौके पर अंतरिम जमानत देने की मांग के बदले गिरफ्तारी की वैधता पर सवाल उठाये गये. सुप्रीम कोर्ट ने इसे मेरिट के आधार पर अच्छा केस माना और बुधवार (22 मई) को फिर से सुनवाई का फैसला किया. सुप्रीम कोर्ट में हेमंत सोरेन की याचिका पर 21 मई को न्यायाधीश दीपांकर दत्ता और न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा की पीठ में सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान हेमंत सोरेन की ओर कपिल सिब्बल ने दलील दी. सुनवाई के पहले चरण में उन्होंने कहा कि इडी ने बड़गाई की जिस जमीन के मामले में हेमंत सोरेन को गिरफ्तार किया है, वह जमीन हेमंत सोरेन की नहीं है. यह भुइंहरी जमीन है. छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम के तहत यह ट्रांसफरेबल नहीं है. जमीन का मालिकाना हक भी हेमंत सोरेन के पास नहीं है. यह जमीन रामकुमार पाहन की है. हिलेरियस कच्छप इस जमीन को लीज पर लेकर खेती कर रहा था. उसी के नाम पर बिजली का कनेक्शन है. इडी ने बैजनाथ मुंडा और श्याम लाल पाहन के बयान के आधार पर यह मान लिया है कि यह जमीन हेमंत सोरेन की है और वह 2009-10 से इस जमीन पर काबिज हैं. बड़गाईं की 8.86 एकड़ जमीन में कुल 12 प्लॉट हैं. इसमें से कुछ प्लॉट 1976-86 के बीच कई लोगों के नाम पर दर्ज है. इसमें शशिभूषण सिंह, उमा जायसवाल, भरत राम व अन्य शामिल है. इससे यह साबित होता है कि जमीन हेमंत सोरेन की नहीं है. इडी की कहानी मनगढ़ंत है. कपिल सिब्बल की इस दलील का इडी के वकील एसवी राजू ने विरोध किया. उन्होंने कहा कि दस्तावेज में हेमंत सोरेन मालिक नहीं है. उनका इस जमीन पर अवैध कब्जा है. बड़गाईं के अंचल अधिकारी, राजस्व कर्मचारी और मुख्यमंत्री के प्रेस सलाहकार रहे अभिषेक उर्फ पिंटू व अन्य के बयान से इसकी पुष्टि होती है. उन्होंने यह भी कहा कि कपिल सिब्बल ट्रायल कोर्ट में जमानत याचिका और हाइकोर्ट में दायर याचिका में यही दलील देते रहे हैं. उन्होंने कहा कि सक्षम न्यायालय द्वारा मामले में संज्ञान लिया जा चुका है. जमानत याचिका को रद्द करते हुए सक्षम अदालत ने यह कहा है कि प्रथमदृष्टया आरोप सही प्रतीत होते हैं. हेमंत सोरेन की ओर से दायर याचिका में इसमें से किसी बिंदु को चुनौती नहीं दी गयी है. इसके बाद कपिल सिब्बल ने कहा कि वह जमानत नहीं मांग रहे हैं. वह तो इडी द्वारा हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी को चुनौती दे रहे हैं. कपिल सिब्बल की बात सुनने के बाद न्यायाधीश दीपांकर दत्ता ने पूछा कि आपने ट्रायल कोर्ट द्वारा लिये गये संज्ञान को चुनौती नहीं दी है? आपने जमानत रद्द किये जाने को भी चुनौती नहीं दी है? कपिल सिब्बल ने इन बिंदुओं का जवाब देते हुए कहा कि न्यायालय का कहना सही है. उन्होंने संज्ञान और जमानत याचिका को रद्द किये जाने को चुनौती नहीं दी है. वह इडी द्वारा की गयी गिरफ्तारी को चुनौती दे रहे हैं. सिब्बल का जवाब सुनने के बाद न्यायाधीश दीपांकर दत्ता ने कहा कि बहस को सिर्फ गिरफ्तारी के कानूनी बिंदु तक सीमित रखना चाहिए. कपिल सिब्बल ने हामी भरी और पीएमएलए की धारा 19 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा विजय मदनलाल चौधरी सहित अन्य के मामलों को उद्धृत करते हुए कहा कि इडी ने पीएमएलए की धारा 19 में गिरफ्तारी की शर्तों को पूरा नहीं किया है. जमीन पर अवैध कब्जा पीएमएलए में शिड्यूल ऑफेंस नहीं है. साथ ही यह मामला प्रेडिकेट ऑफेंस नहीं है, क्योंकि प्रेडिकेट ऑफेंस के लिए शिड्यूल ऑफेंस से धन की उत्पत्ति होनी चाहिए. इसके बाद न्यायालय में इस मामले में कल सुनवाई की बात कही. न्यायालय की बात सुनने के बाद एसवी राजू ने ग्रीष्मावकाश के बाद सुनवाई का अनुरोध किया, लेकिन न्यायालय ने 22 मई को ही याचिका पर सुनवाई का फैसला किया.

हेमंत सोरेन के वकील कपिल सिब्बल की दलील

– बड़गाई की जमीन हेमंत की नहीं है. यह भुइंहरी जमीन है.

– जमीन का मालिकाना हक भी हेमंत सोरेन के पास नहीं है. – यह जमीन रामकुमार पाहन की है. हिलेरियस लीज पर लेकर खेती कर रहा था.

– इडी ने पीएमएलए की धारा 19 में गिरफ्तारी की शर्तों को पूरा नहीं किया है.

इडी के वकील एसवी राजू बोले

– जमीन के दस्तावेज में हेमंत सोरेन मालिक नहीं हैं. उनका इस जमीन पर अवैध कब्जा है. – अंचल अधिकारी, राजस्व कर्मी व सीएम के प्रेस सलाहकार रहे पिंटू व अन्य के बयान से इसकी पुष्टि होती है.

– सक्षम न्यायालय की ओर से मामले में संज्ञान लिया जा चुका है. जमानत याचिका रद्द करते हुए अदालत ने कहा है कि प्रथमदृष्टया आरोप सही प्रतीत होते हैं.

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