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शत्रुओं को क्षमा करना परमेश्वर के मार्ग पर चलने जैसा है

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शत्रुओं को क्षमा करना परमेश्वर के मार्ग पर चलने जैसा है

रांची. संत पॉल्स कैथेड्रल में गुडफ्राइडे की आराधना में शुक्रवार को बड़ी संख्या में विश्वासी शामिल हुए. मौके पर उपदेशक एवं पेरिश प्रिस्ट एस डेविड ने क्रूस पर यीशु के द्वारा बोली गयी सात क्रूस वाणियों पर विश्वासियों को मनन करने के लिए कहा. उन्होंने कहा कि सात क्रूस वाणियां और पहाड़ी उपदेश के दौरान सात धन्य वचन एक दूसरे के पूरक है. पहली क्रूस वाणी में यीशु क्षमा की बात करते हैं. यीशु विनम्रता धारण करते हैं और अपने सतानेवालों के लिए क्षमा की प्रार्थना करते हैं. वहीं संसार बुराई का बदला बुराई से लेने की बात करता है. लेकिन विनम्रता धारण करना परमेश्वर के बताये मार्ग पर चलना है. आज हम जब इन बातों पर मनन करते हैं, तो हमें भी चाहिए कि हम अपने शत्रुओं और बैरियों को क्षमा करें. अगर कोई शत्रु भूखा या प्यासा है, तो हमें उसको भोजन और पानी देना चाहिए. परमेश्वर कहते हैं कि बदला लेना तुम्हारा काम नहीं है. रेव्ह डेविड ने अन्य क्रूसवाणियों के बारे में भी विस्तार से बताया. इससे पूर्व उन्होंने यीशु की क्रूस मृत्यु के दौरान हुई घटनाओं पर भी चर्चा की. उन्होंने कहा कि प्रभु यीशु को सुबह लगभग नौ बजे क्रूस पर चढ़ाया गया था और दिन के तीन बजे के लगभग उनकी क्रूस पर मृत्यु हो गयी. उनका क्रूस दो अन्य डाकुओं के क्रूस के मध्य में था और उनसे कहीं अधिक ऊंचा था. रेव्ह एस डेविड ने बताया कि उस जमाने में क्रूस की सजा सबसे अधिक घृणित मानी जाती थी. न तो रोमन और न ही यहूदी जल्दी किसी को क्रूस पर ठोकते थे. लेकिन निर्दोष होते हुए भी यीशु क्रूस पर ठोके गये और उन्होंने मनुष्यों के पापों का बोझ अपने ऊपर लिया.

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