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Ranchi News : अब किताब नहीं, खेल सिखायेगा पाठ

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Ranchi News : अब किताब नहीं, खेल सिखायेगा पाठ

हेडिंग::: अब किताब नहीं, खेल सिखायेगा पाठ

रांची में बदल रही बुनियादी शिक्षा की तस्वीर, खेल-खेल में पढ़ाई का नया प्रयोग

रांची के स्कूलों में फाउंडेशन स्टेज पर लर्निंग बाई डूइंग, लर्निंग बाई प्लेयिंग पर जोर

– रांची के स्कूलों में खेल-खेल में शिक्षा को दिया जा रहा बढ़ावा

– बाल वाटिका से क्लास दो तक क्लासरुम का स्वरूप बदला

-परंपरागत रटने वाले मॉडल से हटकर एक्सपीरियंशल लर्निंग को दिया जा रहा बढ़ावा

क्रांति दीप, रांची

फाउंडेशन स्टेज के छात्र-छात्राएं अब सांप-सिढ़ी के माध्यम से शब्दों काे सिख रहे हैं. वहीं, पज्जल गेम के माध्यम से देश के मैप, बॉडी पार्ट्स को समझ रहे हैं. खेल-खेल में बेसिक ग्रामर बताया जा रहा है. रांची के प्राइवेट स्कूलों में फाउंडेशन स्टेज यानी बालवाटिका से क्लास दो तक पढ़ाने के तरीके से लेकर क्लासरूम की डिजाइन में भी बदलाव आ रहा है. बच्चों को रटंत शिक्षा से परे खेल-खेल में विभिन्न विषयों की जानकारी दी जा रही है. स्कूलाें में फाउंडेशन स्टेज पर लर्निंग बाई डूइंग, लर्निंग बाई प्लेयिंग पर जोर दिया जा रहा है. यह पहल नेशनल एजुकेशन पॉलिसी के तहत हो रहे हैं. लर्निंग बाई डूइंग यानि किसी भी चीज को कर के सिखना, लर्निंग बाई प्लेयिंग यानी खेल-खेल में सिखना, आर्ट इंटीग्रेटेड लर्निंग यानि कला के विभिन्न माध्यमों को जोड़ कर छात्रों को सिखाना आदि को बढ़ावा दिया जा रहा है.क्लासरूम में आया क्रिएटिविटी का रंग

अब क्लास पारंपरिक बोर्ड-चॉक और रटने वाली शिक्षा से हटकर बच्चों के लिए अधिक रोचक, खेल-आधारित और अनुभवात्मक बन गयी हैं. स्कूलों में ऐसे क्लासरूम तैयार किये जा रहे हैं, जहां बच्चे स्वतंत्र रूप से घूमकर सीख सकें और अपने आसपास की चीजों को समझ सकें. अलग-अलग लर्निंग कॉर्नर बनाये गये हैं. रीडिंग कॉर्नर, मैथ कॉर्नर, आर्ट कॉर्नर आदि. शिक्षक गाइड की भूमिका निभा रहे हैं.सांप-सीढ़ी से शब्द, पजल से देश का नक्शा

बच्चों को पपेट के माध्यम से कहानी बतायी जाती है. ब्लॉक्स के माध्यम से गिनती, अक्षर, शब्दों को सीखते हैं. रंगों और क्ले से क्रिएटिविटी विकसित करते हैं. सांप-सिढ़ी जैसे खेलों के माध्यम से विपरीतार्थक शब्दाें को सिखाया जा रहा है. अलग-अलग शेप की जानकारी दी जाती है. पजल के माध्यम से विभिन्न चीजों को खेल-खेल में सिखाया जा रहा है. विज्ञान और पर्यावरण के प्रारंभिक ज्ञान के लिए बच्चों को प्रकृति अवलोकन, पानी-मिट्टी के छोटे प्रयोग और वस्तुओं की पहचान करायी जाती है.

क्या हो रहा लाभ

– बच्चे अब तनावमुक्त और खुश होकर सीख रहे हैं. स्कूल आने की रुचि बढ़ी है.

– सीखना रटने के बजाय समझ आधारित हो गया है.

– खेल और गतिविधियों से जिज्ञासा व क्रिएटिविटी बढ़ रही है.

– भाषा और गणित की नींव मजबूत हो रही है.

– बच्चों में सहयोग, टीमवर्क, साझा करना की भावना तेजी से विकसित हो रहे हैं.

– शिक्षक गाइड की भूमिका में हैं, जिससे बच्चे खुलकर सीख पा रहे हैं.

– स्थानीय परिवेश व संस्कृति से जुड़कर बच्चों की वास्तविक जीवन की समझ बढ़ रही है.::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::

कोट :

एनइपी के तहत फाउंडेशन स्टेज से ही रटंत शिक्षा को दूर किया जा रहा है. बच्चों को खेल-खेल में शिक्षित करने का काम किया जा रहा है. जादुई पिटारा, पज्जल सोल्विंग, विभिन्न ब्लॉकस, खेल सामग्री के माध्यम से विभिन्न विषयों के बारे में जानकारी दी जा रही है. एंवायरमेंट ट्रिप करवाया जाता है, जहां प्राकृतिक चीजों से रूबरू कराया जाता है. ऐसे में छात्र-छात्राओं की स्कूल आने की रुचि भी बढ़ी है.

डॉ रवि प्रकाश तिवारी, प्रिंसिपल डीएवी नंदराज स्कूल

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एक्सपीरियंस लर्निंग यानी प्रत्यक्ष अनुभव, चिंतन और अभ्यास के माध्यम से सीखना. यह वास्तविक जीवन की स्थितियों से जोड़कर सीखने पर जोर देता है. वर्तमान समय में एक्सपीरियंस बेस्ड लर्निंग को बढ़ावा दिया जा रहा है. हमारे स्कूल सहित विभिन्न स्कूलों में एक दिन शनिवार को बैगलेस डे होता है. इसमें छात्र-छात्राएं बिना बैग के आते हैं. विभिन्न एक्टिवीटी के माध्यम से उन्हें सिखाया जाता है.

राजेश पिल्लई, प्रिंसिपल केरली स्कूल

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फाउंडेशन स्टेज पर बच्चों को देखकर, महसूस कर और पहचान के आधार पर शिक्षित किया जा रहा है. किताबों की निर्भरता हट रही है. वातावरण को देखकर, प्रत्यक्ष रूप से बच्चे सीख रहे हैं. अब सीखने की प्रक्रिया क्लासरूम तक ही सीमित नहीं बल्कि क्लासरूम के बाहर खेल-खेल में सीख रहे हैं. जैसे फल पौधों, मिट्टी आदि को महसूस कर सिख और समझ रहे हैं.

डॉ जया चौहान, डीपीएस रांची, प्रिंसिपल

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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