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जिला जज ने माफी मांगी, हाइकोर्ट ने दी चेतावनी

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जिला जज ने माफी मांगी, हाइकोर्ट ने दी चेतावनी

गिरिडीह के प्रधान जिला एवं सेशन जज ने अपनी गलतियों के लिए हाइकोर्ट से बिना शर्त माफी मांगी. हाइकोर्ट ने भविष्य में ऐसी गलती नहीं करने की चेतावनी देते हुए माफीनामे को स्वीकार कर लिया. साथ ही दूध में जहर मिला कर हत्या करने की कोशिश के आरोप में चल रहे मुकदमे में पीड़िता की गवाही दर्ज करने का निर्देश दिया. मामला गावां थाना के कांड संख्या 118/2017 से संबंधित है.

महिला को दूध में जहर देकर उसे मारने की कोशिश का आरोपी महेंद्र दास फिलहाल जेल में है. अभियुक्त ने हाइकोर्ट में नियमित जमानत याचिका दाखिल की थी. न्यायमूर्ति आनंदा सेन की अदालत में जमानत याचिका पर सुनवाई हुई. मामले से जुड़े दस्तावेज की जांच के दौरान जानकारी मिली कि गिरिडीह के प्रधान जिला एवं सेशन जज ने पीड़िता की गवाही यह कहते हुए बंद कर दी थी कि इस मुकदमे में समझौते की संभावना है.

न्यायमूर्ति आनंदा सेन से इस मामले को गंभीरता से लेते प्रधान जिला एवं सेशन जज दीपक नाथ तिवारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया. उनसे इस बिंदु पर जवाब मांगा गया कि उन्होंने ‘नन कंपाउंडेबल’ केस में समझौते की बात किस आधार पर की.

तीन सप्ताह में जवाब मांगा था हाइकोर्ट ने :

हाइकोर्ट ने प्रधान जिला जज को जवाब देने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया. कारण बताओ नोटिस का जवाब आने के बाद न्यायमूर्ति आनंदा सेन की अदालत में अभियुक्त की जमानत याचिका पर सुनवाई हुई. सुनवाई के बाद अदालत ने अभियुक्त की जमानत याचिका खारिज कर दी. इसके बाद न्यायमूर्ति आनंदा सेन ने प्रधान जिला एवं सेशन जज द्वारा कारण बताओ नोटिस के आलोक में दिये गये जवाब पर विचार किया.

अदालत ने कहा कि प्रधान जिला एवं सेशन जज ने अपने जवाब में यह कहा है कि वकील ने यह अनुरोध किया था कि वे इस मुकदमे में समझौता करना चाहते हैं. वकील के इस अनुरोध पर ही पीड़िता की गवाही बीच में बंद कर दी गयी थी. हालांकि प्रधान जिला एवं सेशन जज ने अपने इस जवाब के पक्ष में कोई दस्तावेजी सबूत पेश नहीं किया है. उन्होंने गवाही बंद करने के लिए इस बात का उल्लेख भी नहीं किया.

न्यायमूर्ति आनंद सेन ने अपने आदेश में लिखा कि चूंकि प्रधान जिला एवं सेशन जज ने बिना शर्त माफी मांगी है. इसलिए उनके खिलाफ आगे की कार्रवाई नहीं की जा रही है. अदालत ने कहा कि संबंधित न्यायिक अधिकारी को भविष्य में सतर्क रहना चाहिए और यह उम्मीद की जाती है कि समझौते के आधार पर पीड़ित महिला की गवाही बंद नहीं की जानी चाहिए. यहां यह बात उल्लेखनीय है कि न्यायिक अधिकारी दीपक नाथ तिवारी का तबादला करते हुए फिलहाल जूडिशियल अकादमी के निदेशक के पद पर पदस्थापित किया गया है.

posted by : sameer oraon

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