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संताल में आदिवासियों की आबादी कम होना खतरे की घंटी : बाबूलाल

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संताल में आदिवासियों की आबादी कम होना खतरे की घंटी : बाबूलाल
Birsa Munda

रांची. प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि संताल परगना क्षेत्र में संताल, पहाड़िया आदिवासियों की आबादी लगातार कम होना खतरे की घंटी है. राज्य सरकार को स्पेशल टॉस्क फोर्स बना कर इसकी जांच करानी चाहिए. श्री मरांडी गुरुवार को पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे. उन्होंने कहा कि पाकुड़ के इलाके में पहाड़ियों के गांव उजड़ गये. वर्ष 2001 में यहां आदिवासियों की आबादी 46.64 प्रतिशत थी, वह 2011 में घट कर 42 प्रतिशत हो गयी है. वहीं दूसरी तरफ पाकुड़ में मुस्लिम आबादी वर्ष 2001 की तुलना में 2011 में लगभग चार प्रतिशत बढ़ गयी है. वर्ष 2001 में जहां इस क्षेत्र में मुस्लिम की आबादी 32.34 प्रतिशत थी, वह बढ़ कर 35.87 प्रतिशत हो गयी है. इसी प्रकार साहिबगंज में भी वर्ष 2001 की तुलना में 2011 में लगभग छह प्रतिशत बढ़ गयी है. वहीं आदिवासियों की संख्या 29 प्रतिशत से घट कर 26.8 प्रतिशत रह गयी है. अगर पूरे संताल परगना की बात करें, तो वर्ष 1951 से वर्ष 2011 के दौरान मुस्लिम की आबादी 9.44 प्रतिशत से बढ़ कर 22.73 प्रतिशत हो गयी है. श्री मरांडी ने कहा कि जहां कभी पहाड़ियां की आबादी थी, वहां घुसपैठियों की बड़ी आबादी है. यहां घुसपैठ हुआ नहीं है, बल्कि जानबूझ कर झामुमो-कांग्रेस ने कराया है. हेमंत सोरेन सरकार के संरक्षण में बांग्लादेशियों के घुसपैठ और अवैध खनन के कारण पाकुड़ एवं साहिबगंज के कई इलाको में संताल, पहाड़िया आदिवासी विस्थापित हो चुके हैं. इनके बारे में कोई चिंता नहीं करता है. भाजपा की सरकार बनने के बाद विशेष टीम का गठन कर इस मामले की जांच कर उचित कार्रवाई की जायेगी. उन्होंने कहा कि विकास के मुद्दे पर भाजपा संताल पगरना की तीनों सीटों पर जीत दर्ज कर रही है.

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