[tdb_header_weather inline="yes" temp_color="#000000" loc_color="#000000" api="653566bd56b7ecfee45d74c0fc937fc1" float_right="yes" align_horiz="content-horiz-center" icon_size="24" icon_space="10" f_temp_font_family="420" f_temp_font_size="14" f_temp_font_weight="500" f_unit_font_size="14" f_loc_font_size="14" f_unit_font_family="882" location="Ranchi" icon_color="#000000"]
[tdb_header_categories align_horiz="content-horiz-left" el_align_horiz="content-horiz-left" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLXJpZ2h0IjoiNSIsImhlaWdodCI6IjQwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9fQ==" icon_size="18" limit="18" elem_text_color="#2d2800" f_elem_font_family="420" f_elem_font_size="16px" f_elem_font_weight="500" tdicon="tdc-font-fa tdc-font-fa-navicon-reorder-bars" inline="yes" shadow_shadow_size="0" shadow_shadow_offset_vertical="0" shadow_shadow_spread="0" bg_color="#f9f9f9" include="1028, 1081, 1446, 1228, 3706, 2624,1071"][tdb_mobile_horiz_menu inline="yes" menu_id="372" tdc_css="eyJwaG9uZSI6eyJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBob25lX21heF93aWR0aCI6NzY3LCJhbGwiOnsiYm9yZGVyLXN0eWxlIjoibm9uZSIsImRpc3BsYXkiOiIifX0=" f_elem_font_size="18px" f_elem_font_weight="eyJhbGwiOiI3MDAiLCJwaG9uZSI6IiJ9" f_elem_font_family="420" text_color_h="#f58220" main_sub_icon_size="13"]
Home झारखण्ड रांची सरना समाज में भी सामूहिक विवाह से बन रहीं जोड़ियां

सरना समाज में भी सामूहिक विवाह से बन रहीं जोड़ियां

0
सरना समाज में भी सामूहिक विवाह से बन रहीं जोड़ियां

रांची. राजधानी में कई ऐसी संस्थाएं हैं, जो कई सालों से सामूहिक विवाह का आयोजन कराने लगी हैं. ऐसे आयोजन में आर्थिक रूप से कमजोर तबके के परिवारों को काफी सहूलित होती है, क्योंकि वह कम खर्च में लड़के-लड़कियों का विवाह करा पाते हैं. अब धीरे-धीरे यह ट्रेंड सरना समाज में भी शुरू हो गया है. झारखंड आदिवासी सरना विकास समिति, धुर्वा पिछले सात वर्षों से अपने प्रयास से सामूहिक विवाह का आयोजन करा रही है.

आठ जोड़ों का होगा सामूहिक

विवाह

इस वर्ष यह आयोजन 19 मई को होगा. सामूहिक विवाह की तैयारी को अंतिम रूप दिया जा रहा है. समिति के अध्यक्ष मेघा उरांव ने कहा कि इस वर्ष आठ जोड़ों का सामूहिक विवाह कराया जायेगा. उन्होंने कहा कि ये सभी अत्यंत गरीब तबके के हैं. सामूहिक विवाह के दौरान जगह की व्यवस्था, टेंट-शामियाना और विवाह सामग्री की व्यवस्था समिति करती है. वर-वधू पक्ष की ओर से शामिल बाराती व सराती लोगों के भोजन की व्यवस्था भी समिति ही करती है. पारंपरिक विधि-विधान के साथ विवाह के बाद नवदंपतियों को यथासंभव बर्तन व अन्य सामग्री गृहस्थी बसाने के लिए दी जाती है. समिति विवाह के बाद प्रमाणपत्र भी देती है.

2007 से शुरू हुआ था यह आयोजन

मेघा उरांव ने बताया कि समिति ने वर्ष 2007 में एक जोड़े के साथ इसकी शुरुआत की थी. उसके बाद से यह आयोजन प्रत्येक वर्ष होने लगा. बीते वर्षों में कभी आठ, तो कभी 15 जोड़ा, कभी 20 जोड़ोंं का विवाह कराया जा चुका है. आर्थिक रूप से कमजोर लोगों और जिनके माता-पिता नहीं हैं, वैसे लड़के-लड़कियों का विवाह कराया जा रहा है. मेघा ने कहा कि समिति में स्थायी सदस्यों की संख्या 100 से भी ज्यादा है. सामूहिक विवाह और अन्य आयोजनों में सदस्यों से प्राप्त आर्थिक सहयोग से काम किया जा रहा है. मेघा उरांव को 2021 में दिल्ली के विज्ञान भवन में केद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख द्वारा सम्मानित किया जा चुका है.

सामूहिक विवाह में ये कर रहे सहयोग

मेघा ने बताया कि इस बार भी सामूहिक विवाह के आयोजन में डॉ बुटन महली, लोरया उरांव, लुथरू उरांव, मंसा उरांव, बिरसा भगत, कुमुदनी लकड़ा, रोपनी मिंज, जय मंत्री उरांव, फूलमंती उरांव, कावेरी उरांव, सुशीला उरांव, लालमुनी देवी, पूजा देवी, मुन्नी देवी, सीमा टोप्पो और राजू उरांव सहित अन्य जुटे हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

ऐप पर पढें
होम आप का शहर
News Snap News Reel