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बिरसा कृषि विश्वविद्यालय का दीक्षांत समारोह: टॉपरों को डिग्री देकर राज्यपाल रमेश बैस ने दिए सफलता के मंत्र

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बिरसा कृषि विश्वविद्यालय का दीक्षांत समारोह: टॉपरों को डिग्री देकर राज्यपाल रमेश बैस ने दिए सफलता के मंत्र

Birsa Agricultural University Convocation: झारखंड के राज्यपाल रमेश बैस रांची के बिरसा कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू) के 7वें दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित हुए. उन्होंने कहा कि जीवन में कभी भी सीखने में संकोच नहीं करें. दूसरे के श्रेष्ठ गुणों का अनुकरण करें. अच्छे मार्ग पर चलें. यही एक उत्तम और सफल विद्यार्थी के लक्षण हैं. सीखने की कभी कोई उम्र या सीमा नहीं होनी चाहिये. जीवन में अधिक से अधिक ज्ञान हासिल करने की भूख सदैव बनी रहनी चाहिए तभी आपलोग नई-नई ऊंचाइयों को हासिल कर पायेंगे. टॉपरों को डिग्री प्रदान कर उन्होंने सफलता के मंत्र दिए. इस दौरान उन्होंने कहा कि 1981 में स्थापित यह संस्थान देश के टॉप 20 या टॉप 30 में क्यों नहीं आ पाया है. इस पर मंथन करने की जरूरत है.

देश के टॉप 20 में क्यों नहीं है बीएयू

राज्यपाल रमेश बैस ने कहा कि बिरसा कृषि विश्वविद्यालय को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् द्वारा जारी नेशनल रैंकिंग में वर्ष 2017 में जहां 53वां स्थान मिला था, वहीं वर्ष 2018 में यह विश्वविद्यालय देश के टॉप 60 कृषि विश्वविद्यालयों की सूची से भी बाहर हो गया. हालांकि वर्ष 2020 में इसे 58वां स्थान प्राप्त हुआ, लेकिन क्या कारण है कि वर्ष 1981 में स्थापित यह संस्थान टॉप 20 या टॉप 30 में नहीं आ पाया है ? क्या इसका कारण शिक्षकों की कमी, पठन-पाठन में गुणवत्ता का अभाव, शोध में गुणवत्ता की कमी इत्यादि तो नहीं ? फिर ये भी देखना होगा कि आई.सी.ए.आर ने रैंकिंग के लिए जो मापदंड तय किये हैं जैसे कि आधारभूत सरंचना, शिक्षकों, वैज्ञानिकों और कर्मचारियों की स्थिति, विद्यार्थियों की संख्या, प्लेसमेंट, शोध कार्य, शिक्षकों और वैज्ञानिकों का विदेश दौरा, नेशनल और इंटरनेशनल फंड की स्थिति, किसानों के हित व सामाजिक दायित्व के तहत कार्य इत्यादि का किस हद तक अनुकरण हो रहा है? मुझे उम्मीद है विश्वविद्यालय इन सब मुद्दों पर गंभीरता से विचार और मंथन करेगा.

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किसानों की समस्या दूर करने पर दें जोर

राज्यपाल रमेश बैस ने कहा कि भारत में कृषि अनुसंधान अभी भी अन्य देशों की तुलना में कम है. जो भी कृषि क्षेत्र में शोध किये जाते हैं या होते हैं उसके परिणाम गरीब किसानों को उपलब्ध नहीं कराए जाते हैं. यहां तक कि अगर किसी तरह एक गरीब किसान ने इसे लागू किया, तो उसके उचित कार्यान्वयन के लिए उसको कोई मार्गदर्शन नहीं मिल पाता है. कृषि संचालन के संबंध में कुछ पुरानी समस्याएं हैं, जिनका सामना किसान अभी भी कर रहे हैं और कृषि अनुसंधान की कमी के कारण ये समस्याएं अभी भी हैं. इस दिशा में आप लोगों को किसानों के साथ बैठकर कदम उठाने की आवश्यकता है.

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