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Home झारखण्ड रांची बीएयू कैंपस में एरेक-2026 में सीनियर्स का आयोजन, एक बार फिर लौटा ‘गोल्डन एरा’

बीएयू कैंपस में एरेक-2026 में सीनियर्स का आयोजन, एक बार फिर लौटा ‘गोल्डन एरा’

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बीएयू कैंपस में एरेक-2026 में सीनियर्स का आयोजन, एक बार फिर लौटा ‘गोल्डन एरा’
रांची स्थित बिरसा कृषि विश्वविद्यालय में पूर्व छात्र.

Ranchi News: झारखंड की राजधानी रांची के बिरसा कृषि विश्वविद्यालय का परिसर उस समय भावनाओं, उत्साह और यादों से सराबोर हो उठा, जब पूर्व छात्रों के संगठन द्वारा ‘एरेक-2026’ मिलन समारोह का आयोजन किया गया. यह कार्यक्रम सिर्फ एक औपचारिक आयोजन नहीं था, बल्कि बीते दौर की सुनहरी यादों को फिर से जीने का अवसर बन गया. कैंपस की गलियों में घूमते सीनियर्स, कैंटीन की पुरानी चर्चाएं, क्लास बंक के किस्से और हॉस्टल की शरारतों की बातें पूरे माहौल को जीवंत कर रही थीं.

पूर्व छात्रों में दिखा जोश

इस आयोजन में शामिल लगभग 75 प्रतिशत पूर्व छात्र अपनी सेवा अवधि पूरी कर चुके हैं, लेकिन उनके उत्साह और ऊर्जा में कोई कमी नजर नहीं आई. कई एल्युमिनाई अपने परिवार के साथ पहुंचे, तो कई वर्षों बाद दोस्तों से मिलकर भावुक हो उठे. देश के विभिन्न राज्यों से आए इन पूर्व छात्रों ने यह साबित किया कि अपने संस्थान से जुड़ाव उम्र और दूरी की सीमाओं से परे होता है.

एल्युमिनाई का उमड़ा स्नेह और अपनापन

समारोह के दौरान कैंपस का हर कोना पुरानी यादों से भर उठा. पूर्व छात्र अपने-अपने विभागों में गए, शिक्षकों से मुलाकात की और अपने छात्र जीवन की घटनाओं को साझा किया. कुछ ने पुराने हॉस्टल कमरों के बाहर तस्वीरें खिंचवाईं, तो कुछ ने कैंटीन में बैठकर चाय के साथ यादों का स्वाद लिया. कई एल्युमिनाई ने कहा कि विश्वविद्यालय ने उन्हें सिर्फ डिग्री ही नहीं, बल्कि जीवन की दिशा और पहचान दी. यही कारण है कि वर्षों बाद भी उनका संस्थान से भावनात्मक जुड़ाव बना हुआ है. इस मिलन समारोह ने न सिर्फ रिश्तों को फिर से मजबूत किया, बल्कि नई पीढ़ी के छात्रों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बना.

कुलपति बोले- एल्युमिनाई ही संस्थान की असली पहचान

कार्यक्रम का उद्घाटन कुलपति डॉ. एससी दुबे ने किया. उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि किसी भी शिक्षण संस्थान की असली ताकत उसकी इमारतें या संसाधन नहीं, बल्कि वहां से निकलकर समाज और देश के विकास में योगदान देने वाले पूर्व छात्र होते हैं. एल्युमिनाई ही विश्वविद्यालय की पहचान और गौरव हैं. इस अवसर पर एक विशेष स्मारिका का विमोचन भी किया गया. स्मारिका में पुराने बैचों की यादें, संस्मरण, लेख और तस्वीरें संकलित की गई हैं. इसे देखकर उपस्थित पूर्व छात्र अपने छात्र जीवन की ओर लौट गए. कई लोगों ने इसे अपने लिए एक अनमोल धरोहर बताया.

डॉ हेमंत कुमार तांतिया बने आकर्षण का केंद्र

समारोह में हेमंत कुमार तांतिया ‘गेस्ट ऑफ ऑनर’ के रूप में शामिल हुए. वे फिलहाल मुंबई में कस्टम एवं जीएसटी विभाग में जॉइंट कमिश्नर के पद पर कार्यरत हैं. उन्होंने छात्र जीवन की स्मृतियों को साझा करते हुए अनुशासन, समर्पण और राष्ट्रसेवा का संदेश दिया. उनका रचित देशभक्ति गीत ‘भारत मां की संतान हम’ कार्यक्रम का विशेष आकर्षण रहा. इस गीत की सराहना देश के कई प्रतिष्ठित मंचों पर हो चुकी है. उन्होंने कहा कि बीएयू में बिताया गया समय उनके व्यक्तित्व निर्माण की आधारशिला रहा है.

मंच पर जुटे कई दिग्गज, बढ़ा आयोजन का गौरव

समारोह में नीलिमा केरकेट्टा भी उपस्थित रहीं. इसके अलावा कृषि संकाय के डीन, वरिष्ठ शिक्षाविद और विश्वविद्यालय के कई अधिकारी कार्यक्रम में शामिल हुए. मंच पर मौजूद सभी अतिथियों ने एल्युमिनाई की उपलब्धियों की सराहना की और विश्वविद्यालय के विकास में उनके सहयोग की अपेक्षा जताई. कार्यक्रम के दौरान सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी हुईं, जिन्होंने माहौल को और भी जीवंत बना दिया. पूर्व छात्रों ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि बीएयू का ‘गोल्डन एरा’ आज भी उनके दिलों में जिंदा है.

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‘गोल्डन एरा’ की यादों ने जोड़ा नई पीढ़ी से रिश्ता

‘एरेक-2026’ सिर्फ एक मिलन समारोह नहीं, बल्कि पीढ़ियों के बीच संवाद का सेतु बना. वरिष्ठ और युवा छात्रों के बीच अनुभवों का आदान-प्रदान हुआ. इससे वर्तमान छात्रों को प्रेरणा और मार्गदर्शन मिला. समारोह ने यह संदेश दिया कि समय भले ही आगे बढ़ता रहे, लेकिन संस्थान से जुड़ी यादें और रिश्ते कभी पुराने नहीं होते. बिरसा कृषि विश्वविद्यालय का यह आयोजन आने वाले वर्षों में भी एल्युमिनाई और वर्तमान छात्रों के बीच मजबूत संबंधों की नींव को और सुदृढ़ करेगा.

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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