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Home झारखण्ड रांची अटल बिहारी वाजपेयी ने बनाया झारखंड, संताली भाषा को दिलाई संवैधानिक मान्यता

अटल बिहारी वाजपेयी ने बनाया झारखंड, संताली भाषा को दिलाई संवैधानिक मान्यता

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अटल बिहारी वाजपेयी ने बनाया झारखंड, संताली भाषा को दिलाई संवैधानिक मान्यता
बाबूलाल मरांडी समेत भाजपा के अन्य नेताओं ने अटल बहारी वाजपेयी को 100वीं जयंती पर दी श्रद्धांजलि. फोटो : प्रभात खबर

Atal Bihari Vajpayee Jayanti: झारखंड राज्य का गठन करने वाले भारत के पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी को झारखंड ने अलग अंदाज में याद किया. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से लेकर तमाम दलों के नेताओं ने अटल बिहारी वाजपेयी को श्रद्धांजलि दी. झारखंड प्रदेश भाजपा ने जन्मशताब्दी वर्ष पर प्रदेश कार्यालय में प्रदर्शनी का आयोजन किया. जयपाल सिंह स्टेडियम के पास अटल वेंडर मार्केट में अटल जी को श्रद्धांजलि दी गई. विधानसभा परिसर में भी अटल जी को याद किया गया. झारखंड के मुख्यमंत्री और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया ‘एक्स’ पर उन्हें श्रद्धांजलि दी. हेमंत सोरेन ने लिखा, ‘देश के पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न स्व अटल बिहारी वाजपेयी जी की जयंती पर शत-शत नमन.’

अटल जी की जयंती को सुशासन दवस के रूप में मनाती है भाजपा

प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन ने भी अटल जी को श्रद्धांजलि दी. इस अवसर पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता ने सोशल मीडिया साइट ‘एक्स’ पर लिखा, 25 दिसंबर को अटल बिहारी वाजपेयी की 100वीं जयंती को सुशासन दिवस मनाया जाता है. उनकी वजह से ही झारखंड राज्य अस्तित्व में आया. सन् 1999 में अटल बिहारी वाजपेयी चुनावी सभा को संबोधित करने दुमका आए थे. इसमें अटल जी ने कहा था, ‘आप मेरी सरकार बनवाएं. मैं आपको अलग राज्य का तोहफा दूंगा.’

5 दशक से चल रहे आंदोलन को अटल जी ने दिया सम्मान – चंपाई

चंपाई सोरेन ने आगे लिखा, ‘लोकसभा के चुनाव में भाजपा की सरकार बनी. अटल बिहारी वाजपेयी देश के प्रधानमंत्री बने. 15 नवंबर 2000 को उन्होंने अलग झारखंड के लिए चलने वाले 5 दशक पुराने आंदोलन को सम्मान दिया और भगवान बिरसा मुंडा की जयंती पर अलग राज्य अस्तित्व में आया.’

Atal Bihari Vajpayee Jayanti 1
झारखंड विधानसभा परिसर में अटल जी को श्रद्धांजलि देने के बाद नेताओं ने उनकी प्रतिमा की परिक्रमा भी की.

‘कांग्रेस-राजद सरकार ने अलग झारखंड राज्य का किया था विरोध’

चंपाई सोरेन ने आगे लिखा कि बिहार की तत्कालीन राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और कांग्रेस की गठबंधन सरकार के विरोध के बावजूद 15 नवंबर 2000 को अटल बिहारी वाजपेयी जी ने झारखंड को अलग राज्य का दर्जा दिया. उनसे पहले की कांग्रेस की सरकारों के रवैये को देखते हुए कह सकते हैं कि अगर केंद्र में अटल जी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार नहीं होती, तो शायद हमें इस राज्य के लिए न जाने और कितने दशकों तक संघर्ष करना पड़ता.

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ओल चिकी लिपि को अटलजी ने दिलाई मान्यता : चंपाई सोरेन

चंपाई सोरेन ने यह भी कहा है कि कई दशकों तक संताल आदिवासी समाज के लोग संताली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करवाने के लिए प्रयास करते रहे. इसके लिए कई बार आंदोलन हुए. उस दौर की कांग्रेस की सरकारों ने कभी इस मांग पर ध्यान नहीं दिया. कांग्रेस की सरकारें संतालियों की मांगों को नकारती रही. अटल जी की सरकार ने वर्ष 2003 में संताली भाषा (ओल चिकी लिपि) को संविधान की आठवीं अनुसूची में स्थान दिलाया.

‘वाजपेयी सरकार ने आदिवासियों के लिए शुरू की परियोजनाएं’

चंपाई सोरेन ने कहा कि वर्ष 1999 में अटल बिहारी वाजपेयी की केंद्र में सरकार बनी, तब भारत में पहली बार जनजातीय मंत्रालय का गठन किया गया. इससे देश में आदिवासियों का विकास तीव्र गति से होने लगा. उन्होंने कहा कि झारखंड और जमशेदपुर से अटल जी का गहरा नाता था. अटलजी ने कई बार झारखंड की यात्रा की. हर बार उनको सुनने के लिए हजारों की भीड़ उमड़ती थी. उन्होंने झारखंड राज्य के लिए कई योजनाएं शुरू कीं.

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अटल बिहारी वाजपेयी को श्रद्धांजलि देने के लिए उमड़ी भाजपा नेताओं की भीड़.

आदिवासियों की जमीन पर कब्जा कर रहे घुसपैठिये : चंपाई सोरेन

झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड के विकास के लिए अटल जी का अलग विजन था. झारखंड और झारखंड के आदिवासियों के लिए उनकी सरकार ने कई योजनाएं शुरू की, लेकिन आज यहां भ्रष्टाचार का बोलबाला है. नोटों के पहाड़ मिल रहे हैं. आदिवासियों की संख्या लगातार घट रही है. घुसपैठिये हमारी भूमि पर कब्जा कर रहे हैं.

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अटल जी के सपनों को साकार कर रही नरेंद्र मोदी सरकार

उन्होंने कहा कि अटल जी के रास्ते पर चलते हुए केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी के सपनों को साकार कर रही है. पिछले वर्ष आदिवासियों के कल्याण के लिए पीएम जनमन योजना की शुरुआत हुई. झारखंड के हर कोने में बन रहे 88 एकलव्य मॉडल विद्यालय आदिवासियों को शिक्षित एवं सशक्त बनाने के उनके सपने को पूरा करेंगे.

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मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.
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