[tdb_header_weather inline="yes" temp_color="#000000" loc_color="#000000" api="653566bd56b7ecfee45d74c0fc937fc1" float_right="yes" align_horiz="content-horiz-center" icon_size="24" icon_space="10" f_temp_font_family="420" f_temp_font_size="14" f_temp_font_weight="500" f_unit_font_size="14" f_loc_font_size="14" f_unit_font_family="882" location="Ranchi" icon_color="#000000"]
[tdb_header_categories align_horiz="content-horiz-left" el_align_horiz="content-horiz-left" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLXJpZ2h0IjoiNSIsImhlaWdodCI6IjQwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9fQ==" icon_size="18" limit="18" elem_text_color="#2d2800" f_elem_font_family="420" f_elem_font_size="16px" f_elem_font_weight="500" tdicon="tdc-font-fa tdc-font-fa-navicon-reorder-bars" inline="yes" shadow_shadow_size="0" shadow_shadow_offset_vertical="0" shadow_shadow_spread="0" bg_color="#f9f9f9" include="1028, 1081, 1446, 1228, 3706, 2624,1071"][tdb_mobile_horiz_menu inline="yes" menu_id="372" tdc_css="eyJwaG9uZSI6eyJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBob25lX21heF93aWR0aCI6NzY3LCJhbGwiOnsiYm9yZGVyLXN0eWxlIjoibm9uZSIsImRpc3BsYXkiOiIifX0=" f_elem_font_size="18px" f_elem_font_weight="eyJhbGwiOiI3MDAiLCJwaG9uZSI6IiJ9" f_elem_font_family="420" text_color_h="#f58220" main_sub_icon_size="13"]
Home झारखण्ड रांची मृत्युदंड को खत्म करने के विरोध में संविधान सभा में गरजे थे पलामू के गोपा बाबू, पढ़ें उनका पूरा भाषण

मृत्युदंड को खत्म करने के विरोध में संविधान सभा में गरजे थे पलामू के गोपा बाबू, पढ़ें उनका पूरा भाषण

0
मृत्युदंड को खत्म करने के विरोध में संविधान सभा में गरजे थे पलामू के गोपा बाबू, पढ़ें उनका पूरा भाषण

Amiyo Kumar Ghosh alias Gopa Babu in Constituent Assembly: झारखंड के पलामू जिले के अमिय कुमार घोष उर्फ गोपा बाबू ने संविधान सभा में मृत्युदंड को खत्म करने वाले संशोधन का विरोध किया था. भारत के संविधान को अंगीकार किये जाने की 75वीं वर्षगांठ पर आज (26 जनवरी 2025) हम आपको बतायेंगे कि गोपा बाबू ने सदन में क्या भाषण दिया था. गणतंत्र दिवस पर झारखंड और देश के लोगों को यह जानना चाहिए कि पलामू के लाल ने मृत्युदंड को खत्म करने संबंधी संशोधन का किन शब्दों में विरोध किया था. विरोध के पक्ष में कितनी तर्कसंगत बातें कहीं थीं. उन्होंने कहा था कि अगर मृत्युदंड के प्रावधान को खत्म करने के संशोधन को मंजूर कर लेंगे, तो सरकार के हाथ बंध जाएंगे. समाज में आतंक फैलाने वालों के खिलाफ वह ठोस कार्रवाई नहीं कर पाएगी. इसका अधिकार सरकार को होना चाहिए. उन्होंने कहा, ‘मिस्टर लारी ने जो संशोधन पेश किया है, मैं उसका विरोध करता हूं. अगर सदन उस संशोधन को पास कर देता है और उसे संविधान में शामिल कर लेता है, तो हम हमेशा के लिए सरकार के हाथ बांध देंगे.’ अमिय कुमार घोष संविधान के ड्राफ्ट पर 30 नवंबर 1948 को नये कानून ‘आर्टिकल 11बी’ पर चर्चा में भाग लेते हुए सदन में बोल रहे थे. एचएच लारी के संशोधन का उन्होंने सदन में जमकर विरोध किया और अंतत: हाउस ने उस अमेंडमेंट को खारिज कर दिया.

असामाजिक तत्वों को नियंत्रित करने के लिए मृत्युदंड जरूरी – अमिय कुमार घोष

अमिय कुमार घोष ने संविधान सभा में कहा, ‘सर, यह सच है कि मृत्युदंड अमानवीय है. यह भी सच है कि जजों से गलती हो सकती है और बेगुनाह लोगों को सजा मिलने की आशंका बनी रहेगी, लेकिन हमें यह भी ध्यान में रखना होगा कि समाज में सिर्फ अच्छे ही लोग नहीं होते. बुरे लोग भी समाज में होते हैं. असामाजिक तत्व कभी भी किसी भी रूप में समाज को अस्थिर न कर सकें, इसके लिए सरकार को कई बार उन्हें सजा देने की जरूरत होगी. समाज में आतंक फैलाने वालों को नियंत्रित रखने के लिए सरकार को ऐसे कानून की जरूरत पड़ सकती है.’

इंडियन पीनल कोड (आईपीसी) में संशोधन या अन्य कानूनों के जरिए हम ऐसा कर सकते हैं. जैसा कि मैंने पहले कहा कि परिस्थितिवश कई बार सरकार को ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई के लिए ऐसे कानून की जरूरत होगी. अगर हमने इस संशोधन को मंजूर करके संविधान में इसे शामिल कर लेंगे, तो सरकार के लिए संविधान संशोधन के बगैर ऐसा कानून बनाना मुश्किल हो जाएगा.

अमिय कुमार घोष, संविधान सभा के सदस्य

अलग-अलग अपराध के लिए अलग-अलग सजा तय करें – अमिय कुमार घोष

गोपा बाबू ने आगे कहा, ‘मुझे लगता है कि समाज और लोगों की चेतना विकसित होने और समाज के विकसित होने के साथ-साथ सरकार को इस कानून में बदलाव लाना चाहिए, लेकिन मृत्युदंड को खत्म करने की व्यवस्था संविधान में नहीं की जानी चाहिए. संविधान के इंडियन पीनल कोड (आईपीसी) में हम यह कर सकते हैं कि अलग-अलग अपराध के लिए अलग-अलग सजा निर्धारित करें.’

‘अगर संशोधन पास कर दिया, तो सरकार के लिए कानून बनाना मुश्किल होगा’

अमित कुमार घोष ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा, ‘हम बदलाव के दौर से गुजर रहे हैं. हमारे सामने कई गंभीर समस्याएं खड़ीं हैं. हर दिन नई परिस्थितियां उत्पन्न हो रहीं हैं. इसलिए यह संभव है कि आने वाले समय में सरकार को समाज को खतरे में डालने वाले अपराधियों को मृत्युदंड जैसी कठोर सजा देनी पड़े.’ अमिय बाबू ने आगे कहा, ‘सैद्धांतिक तौर पर मैं मानता हूं कि मृत्युदंड को खत्म कर देना चाहिए, लेकिन इसके लिए संविधान में कोई प्रावधान किया जाये, यह उचित नहीं होगा. अगर हम ऐसा करते हैं, तो यह सरकार के हाथ बांधने जैसा होगा.’

झारखंड की ताजा खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

…और मृत्युदंड के प्रावधान को खत्म करने संबंधी संशोधन खारिज हो गया

अमित कुमार घोष ने आगे कहा, ‘इंडियन पीनल कोड (आईपीसी) में संशोधन या अन्य कानूनों के जरिए हम ऐसा कर सकते हैं. जैसा कि मैंने पहले कहा कि परिस्थितिवश कई बार सरकार को ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए ऐसे कानून की जरूरत होगी. अगर हमने इस संशोधन को मंजूर करके संविधान में इसे शामिल कर लिया, तो सरकार के लिए संविधान संशोधन के बगैर ऐसा कानून बनाना मुश्किल हो जाएगा.’ यह कहते हुए गोपा बाबू ने संविधान सभा में लारी के मृत्युदंड को खत्म करने संबंधी संशोधन का विरोध किया. इसके साथ ही लारी की ओर से संविधान सभा में पेश उस संशोधन को, जिसमें राजद्रोह को छोड़कर हिंसा से जुड़े अन्य मामलों में मृत्युदंड के प्रावधान को खत्म करने का प्रस्ताव किया गया था, को संविधान सभा ने खारिज कर दिया.

के हनुमंतैया और डॉ बीआर आंबेडकर ने भी चर्चा में भाग लिया

संविधान के ड्राफ्ट पर 30 नवंबर 1948 को हुई इस बहस में अमिय कुमार घोष उर्फ गोपा बाबू के अलावा के हनुमंतैया और डॉ बीआर आंबेडकर ने भी हिस्सा लिया था.

इसे भी पढ़ें

आजादी के दीवाने राम प्रसाद ने स्वतंत्रता संग्राम और भूदान आंदोलन में बढ़-चढ़कर भाग लिया

आजादी के दीवाने सुखेंदु शेखर मिश्रा ने कर दिया था अंग्रेजों की नाक में दम

Previous article गणतंत्र दिवस परेड में शामिल होंगे बिहार के ये दंपति, इस वजह से किए जाएंगे सम्मानित
Next article Free Fire Max: 26 जनवरी 2024 के लिए गरेना फ्री फायर मैक्स रिडीम कोड
Avatar Of Mithilesh Jha
मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.
ऐप पर पढें
होम आप का शहर
News Snap News Reel