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अक्षय तृतीया आज, दान-पुण्य और खरीदारी का विशेष महत्व

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अक्षय तृतीया आज, दान-पुण्य और खरीदारी का विशेष महत्व

रांची. आज अक्षय तृतीया है. इस तिथि को आखा तीज के नाम से भी जाना जाता है.इस बार वैशाख शुक्ल पक्ष में तृतीया तिथि क्षय है व सप्तमी तिथि की वृद्धि है. पंडित कौशल कुमार मिश्र ने कहा कि 10 मई दोपहर 12:23 बजे तक रोहिनी नक्षत्र मिल जाने के कारण आज अक्षय तृतीया पर्व मनाया जा रहा है. गुरुवार सुबह 6.52 बजे तक प्रतिपदा तिथि थी. इसके बाद द्वितीया तिथि लग गयी, जो शुक्रवार सुबह 5:31 बजे तक रहेगी. इसके बाद तृतीया तिथि लग जायेगी, जो शाम 4:37 बजे तक रहेगी. अक्षय तृतीया में भगवान विष्णु व लक्ष्मी की पूजा, दान-पुण्य और खरीदारी का विशेष महत्व है. अक्षय फल की प्राप्ति होती है. इस नक्षत्र के स्वामी भौतिक सुखों के दाता शुक्र ग्रह हैं. इसलिए रोहिणी नक्षत्र में किसी भी तरह का शुभ कार्य करना फलदायक हो सकता है. इस नक्षत्र के बाद दिनभर मृगशिरा नक्षत्र रहेगा. अक्षय तृतीया के दिन सतयुग और त्रेतायुग की शुरुआत हुई थी. भगवान विष्णु ने नर नारायण का अवतार लिया था. इसके अलावा भगवान परशुराम का जन्म भी हुआ था. इसी दिन से ब्रदीनाथ धाम के कपाट खुल जाते हैं. मान्यता है कि अक्षय तृतीया के दिन ही युधिष्ठिर को भगवान कृष्ण ने अक्षय पात्र दिया था. अक्षय तृतीया के दिन वृंदावन में बिहारी जी के पांव के दर्शन होते हैं. यह पूरे साल में सिर्फ एक ही दिन होता है, जिसमें कभी भी भोजन समाप्त नहीं होता था. इसी पात्र से युधिष्ठिर जरूरतमंद लोगों को भोजन कराते थे. इसलिए अक्षय तृतीया के दिन दान-पुण्य का भी विशेष महत्व है. अक्षय तृतीया को ही त्रेतायुग शुरू हुआ था. मान्यता है कि गंगा स्नान से पाप का नाश होता है. दान से संपत्ति में वृद्धि होती है.

इनकी खरीदारी शुभ

सोना-चांदी, घरेलू उपयोग के सामान, घर, जमीन, वाहन, घड़ा, मिट्टी के बर्तन, जौ, मीठे फल आदि.

ये दान करें

घड़ा, छाता, सत्तू, जूता, द्रव्य, अन्न, मीठे फल, पंखा, वस्त्र, इमली, चीनी, नमक आदि.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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