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Crime Control News : गृह सचिव ने कहा- अफीम की खेती पर हो कार्रवाई

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Crime Control News : गृह सचिव ने कहा- अफीम की खेती पर हो कार्रवाई

चतरा/रांची. अफीम की अवैध खेती को नष्ट करने और अवैध मादक पदार्थों के दुरुपयोग को रोकने को लेकर चतरा समाहरणालय स्थित सभाकक्ष में मंगलवार को गृह विभाग की प्रधान सचिव वंदना दादेल व डीजीपी अनुराग गुप्ता ने मैराथन बैठक की. गृह सचिव ने अफीम की अवैध खेती की रोकथाम के लिए पुलिस और वन विभाग के पदाधिकारी व कर्मियों के बीच आपसी समन्वय बना कठोर कानूनी कार्रवाई करने का निर्देश दिया. कहा कि अफीम की खेती प्रायः सुदूरवर्ती क्षेत्रों व वन भूमि में की जाती है. इसलिए दोनों विभागों के पदाधिकारियों के बीच सहयोग जरूरी है. चतरा, हजारीबाग, रांची व लातेहार जिले में अफीम की खेती को लेकर बुरी तरह से प्रभावित हैं. इन जिलों में अफीम की अवैध खेती पर पूर्ण रूप से रोक लगायें.

नेशनल हाइवे पर स्थित होटलों व ढाबों की नियमित रूप से जांच करें

गृह सचिव ने कहा कि अक्सर यह देखा गया है कि जिन भूमि पर अफीम की खेती की जाती है, उसे नष्ट करने के बाद थाना में सनहा दर्ज किया जाता है, जो उचित नहीं है. ऐसे मामले में प्राथमिक दर्ज की जानी चाहिए. वहीं चतरा, हजारीबाग, लातेहार व रांची के ग्रामीण एसपी नेशनल हाइवे पर स्थित होटलों व ढाबों की नियमित रूप से जांच करें, ताकि यह पता चल सके कि इन जगहों पर अवैध अफीम, ब्राउन शुगर जैसे जहरीले पदार्थ की खरीद-बिक्री तो नहीं हो रही है. जांच के दौरान साक्ष्य मिलने पर सरगना के संबंध में जानकारी एकत्र कर कार्रवाई सुनिश्चित करें. बैठक में डीजीपी ने चतरा एसपी को निर्देश दिया कि वे एनडीपीएस थाना खोलने के लिए उचित माध्यम से प्रस्ताव भेजें. बैठक में बोकारो के आइजी माइकल राज एस, स्पेशल ब्रांच के डीआइजी कार्तिक एस, हजारीबाग रेंज डीआइजी सुनील भास्कर, चतरा के उपायुक्त रमेश घोलप, एसपी विकास कुमार पांडेय के अलावा पुलिस, वन व कृषि विभाग के पदाधिकारियों के साथ स्पेशल ब्रांच, सीआइडी के पदाधिकारी भी उपस्थित थे.

कार्रवाई में मामले में कोताही बर्दाश्त नहीं : डीजीपी

बैठक में डीजीपी ने संबंधित अफसरों को कहा कि एनडीपीएस के कांडों के अनुसंधानकर्ता स्वयं थाना प्रभारी या इंस्पेक्टर होंगे. अगर इसमें किसी प्रकार की लापरवाही बरती जाती है, तो संबंधित थाना प्रभारी, इंस्पेक्टर पर एसपी ठोस अनुशासनात्मक कार्रवाई करना सुनिश्चित करेंगे. साथ ही कांड के अभियुक्त व उसके सरगना के साथ ही संगठित आपपराधिक गिरोह के सदस्यों द्वारा अवैध रूप से अर्जित संपत्ति की जानकारी एकत्र कर वांछित कार्यवाही करना सुनिश्चित करेंगे. एनडीपीएस से संबंधित कांडों में यह भी देखा जा रहा है कि ट्रक या अन्य वाहन के चालक व खलासी को अभियुक्त बनाकर जेल भेज दिया जाता है. कांड में आरोप पत्र दाखिल कर अनुसंधान बंद कर दिया जाता है. जबकि मालिक या सरगना आदि का सत्यापन कभी नहीं किया जाता है. इसलिए सूचना एकत्र कर साक्ष्य के अनुसार उनके विरुद्ध भी एनडीपीएस की धाराओं के तहत कार्रवाई सुनिश्चित किया जाए. वहीं मादक द्रव्य पदार्थ में संलिप्त अपराधी गिरोह की सूची सभी प्रभावित जिलों को उपलब्ध कराई जा चुकी है. सूची के अनुसार सत्यापन कर वांछित कार्रवाई करें. एनडीपीएस एक्ट से संबंधित कांडो में गिरफ्तार अभियुक्तों का पूरा फिंगरप्रिंट निश्चित रूप से लेना सुनिश्चित करेंगे. वर्ष 2023 व उससे पूर्व के लंबित कांडों की समीक्षा कर उसका निष्पादन करें. साथ ही विशेष शाखा से प्राप्त सूचना पर यदि कोई थाना प्रभारी वांछित कार्रवाई नहीं करते हैं, तो उनके विरुद्ध कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाये. एनडीपीएस से संबंधित पूर्व में दर्ज कांडों के अभियुक्तों का सत्यापन नियमित रूप से करना सुनिश्चित करेंगे कि वे वर्तमान में जेल में हैं या जमानत पर बाहर हैं. उनकी वर्तमान आय के स्रोत की स्थिति की जानकारी प्राप्त करें. वैसे अपराधी, जो लगातार एनडीपीएस से संबंधित कांडों के अभियुक्त रहे हैं, उनका डोसियर खोला जाए. अवैध अफीम की खेती के मद्देनजर प्री कल्टीवेशन कार्यक्रम जैसे ग्राम पंचायत स्तर पर बैठक करना, जागरूकता अभियान चलाना और स्कूल एवं कॉलेज में अफीम के दुष्प्रभाव को लेकर लोगों को जागरूक करना सुनिश्चित किया जाए. प्रभावित जिले के एसपी नारकोटिक्स डिपार्टमेंट की बैठक में शामिल हों.

आगजनी की घटना पर लापरवाही होने पर होगी कार्रवाई

बैठक में डीजीपी ने कहा कि रांची,चतरा, हजारीबाग व लातेहार आदि जिलों में हाल ही के दिनों में स्प्लिंटर्स ग्रुप द्वारा आगजनी की घटना की गई है. जिसकी रोकथाम अति आवश्यक है. लेकिन ऐसा देखा जा रहा है कि आगजनी से संबंधित थाना प्रभारी द्वारा सिर्फ अज्ञात के खिलाफ कांड दर्ज कर अनुसंधान समाप्त कर दिया जाता हैं. अगर भविष्य में किसी थाना क्षेत्र में उक्त रिप्लंटर ग्रुप द्वारा आगजनी की घटना की जाती है, तो संबंधित थाना प्रभारी व इंस्पेक्टर के विरुद्ध कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए संबंधित डीएसपी व एसपी को भी स्पष्टीकरण किया जाएगा. वहीं अगर किसी व्यक्ति को धमकी भरे कॉल आते हैं तो संबंधित थानेदार को इस संबंध में तुरंत प्राथमिक दर्ज कराना सुनिश्चित करायेंगे.

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