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15 करोड़ खर्च कर 50 करोड़ पौधे लगाये, पर नहीं बढ़ रहे जंगल

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15 करोड़ खर्च कर 50 करोड़ पौधे लगाये, पर नहीं बढ़ रहे जंगल

मनोज सिंह (रांची).

राज्य में वन क्षेत्र को बढ़ाने के उद्देश्य से वन विभाग हर साल बड़े पैमाने पर पौधारोपण करता है. इस वर्ष भी मॉनसून के सीजन में करीब 2.50 करोड़ पौधे लगाने की योजना तैयार है. विभाग के आंकड़े और दावे बताते हैं कि वर्ष झारखंड गठन के बाद के 20 वर्षों में राज्य में करीब 50 करोड़ पौधे लगाये जा चुके हैं. लेकिन, राज्य के वन क्षेत्र में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं दिख रही है. ऐसे में सवाल उठने लगे हैं कि वन विभाग जो पौधे लगाये, उनका क्या हुआ? बता दें कि वन विभाग ने झारखंड अलग राज्य गठन के वर्ष शुरुआती तीन वर्षों तक हर साल करीब पांच करोड़ पौधे लगाये. बाद में इसमें कमी आयी और बीते पांच साल से विभाग हर साल दो से तीन करोड़ पौधे लगा रहा है. एक पौधा लगाने के बाद उस पर अगले तीन साल में करीब 1000 से लेकर 4000 रुपये खर्च किये जाते हैं. इस हिसाब से पौधरोपण पर अब तक करीब 15 हजार करोड़ रुपये से अधिक खर्च हो चुके हैं. विभागीय आंकड़े यह भी बताते हैं कि प्रति हेक्टेयर औसतन 2500 से 1000 पौधे लगाये गये हैं. यानी अब तक करीब पांच लाख हेक्टेयर वन भूमि पर पौधे लगाये जा चुके हैं. इस लिहाज से राज्य में करीब 5000 वर्ग किमी वन क्षेत्र बढ़ जाना चाहिए था. जबकि, फिलहाल केवल 208 वर्ग किमी के आसपास ही वन क्षेत्र बढ़ा हुआ दिख रहा है.

पांच साल में पांच से छह फीट ही बढ़े पौधे :

सात जुलाई 2019 को कांके बोड़ेया के जुमार पुल के किनारे से वन महोत्सव की शुरुआत हुई थी. तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास की मौजूदगी में नदी किनारे हजारों पौधे लगाये गये थे. पांच साल बाद आज यहां 10 से 20 फीसदी पौधे ही बचे हैं. वन विभाग की मानें, तो कम बढ़नेवाला पौधा भी एक साल में कम से कम आठ फीट का हो जाना चाहिए. मध्यम दर्जे का पौधा चार साल में नौ से 13 फीट और तेजी से बढ़ने वाला पौधा चार साल में 11 से 15 फीट होता है. जबकि, यहां लगाये गये पौधे पांच साल में महज पांच से छह फीट के हो पाये हैं. ऐसी ही स्थिति नामकुम में नदी के किनारे लगाये गये पौधे की भी है. जाहिर है कि पौधे लगाने के बाद विभाग की ओर से सही तरीके से उनकी देखरेख नहीं की जाती है.

क्या कहते हैं विशेषज्ञ :

पीसीसीएफ डॉ संजय श्रीवास्तव ने कहा कि जंगल बचाने को लेकर वन विभाग प्रयासरत है. जंगल की गुणवत्ता बनाये रखने के लिए वहां पौधरोपण किया जाता है. जंगल के अंदर पौधे तो बढ़ जाते हैं, लेकिन बाहर लगाये गये पौधों को बचाना थोड़ा मुश्किल होता है. इसके कई कारण हैं. लोगों में अभी वनों के संरक्षण को लेकर जागरूकता की कमी है. इसको दूर करने के लिए विभागीय स्तर पर प्रयास हो रहा है. हम नदियों के किनारे भी पौधारोपण करते हैं. कोशिश करते हैं कि आसपास के लोग इसको अपने से जोड़ें. इस वर्ष भी हम लोग 2.5 करोड़ पौधा लगाने की योजना पर काम कर रहे हैं. 180 किमी नदी के किनारे पौधारोपण होगा.

पौधे लगाना जरूरी :

पेड़ों की बेतरतीब कटाई का नतीजा है कि देश भीषण गर्मी झेल रहा है. इससे निबटने के लिए पौधरोपण एकमात्र विकल्प है. हर खुशी और जश्न में पेड़-पौधों को शामिल करें. बच्चों का जन्म हो, जन्मदिन मनाना हो, विवाह उत्सव मनाना हो, सालगिरह मनाना हो, हर मौके पर कम से कम पांच पौधे प्रत्येक व्यक्ति लगाएं. – पद्मश्री जमुना टुडू

हर व्यक्ति को लगाना चाहिए पौधा :

पर्यावरण बचेगा, तभी धरती पर जीवन रहेगा. इसलिए हर व्यक्ति को पौधरोपण और वन संरक्षण को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए. वन पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने के लिए कोई एक व्यक्ति नहीं, बल्कि पूरा मानव समाज ही दोषी है. इसके संरक्षण के लिए सभी को आगे आना होगा. – पद्मश्री चामी मुर्मू

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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