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संस्कृत भारतीय ज्ञान परंपरा की ध्वजवाहिका है : कुलपति

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संस्कृत भारतीय ज्ञान परंपरा की ध्वजवाहिका है : कुलपति

रामगढ़. रामगढ़. शहर के राधागोविंद इंटर कॉलेज परिसर में संस्कृत भारती झारखंड द्वारा आयोजित सात दिवसीय संस्कृत संभाषण शिविर का शुभारंभ किया गया. कार्यक्रम की अध्यक्षता संगठन के अध्यक्ष डॉ ताराकांत शुक्ल ने की. मुख्य अतिथि रांची विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो सरोज शर्मा ने कहा कि संस्कृत भारतीय ज्ञान परंपरा की ध्वजवाहिका है. समाज में जीवन मूल्यों के क्षरण के काल में संस्कृत अत्यंत प्रासंगिक है. संस्कृत के ज्ञान के बिना प्राचीन भारतीय ज्ञान, विज्ञान, कला, इतिहास आदि किसी भी शास्त्र में प्रवीणता प्राप्त नहीं हो सकती. संस्कृत भारती झारखंड के अध्यक्ष डॉ ताराकांत शुक्ल ने कहा कि 1981 में संस्कृत भारती को पद्मश्री कृष्ण शास्त्री, डॉ विश्वास व डॉ जनार्दन हेगड़े ने शुरू किया था. संस्कृत भारती झारखंड के उपाध्यक्ष डॉ दीपचंद कश्यप ने कहा कि झारखंड के सुदूर क्षेत्रों तक संस्कृत भारती ने अपना प्रसार कर संस्कृत के प्रति आम जनमानस को आकृष्ट किया है. प्रदेश विद्यालय प्रमुख डॉ सुनील कुमार कश्यप ने कहा कि 1995-96 में प्रदेश से अकेला दिल्ली प्रशिक्षण पाने के लिए गया था. आज झारखंड में हजारों संस्कृत के प्रेमी इस काफिला में शामिल हुए हैं.

संस्कृत हमारी संस्कृति की आधारशिला है : गोविंद मेवाड़ : इस अवसर पर शिक्षक प्रमुख विनय कुमार पांडेय, प्रांत मंत्री पृथ्वीराज सिह, रमेश कुमार सिंह, संस्कृत भारती झारखंड के प्रांत संरक्षक गोविंद मेवाड़ ने कहा कि संस्कृत हमारी संस्कृति की आधारशिला है. विशिष्ट अतिथि सांवरमल अग्रवाल व संस्कृत भारती झारखंड के न्यासी ओमप्रकाश गुप्त, सत्येंद्र गुप्त ने भी अपने विचार रखे. अतिथियों का स्वागत संस्कृत भारती झारखंड के प्रांत मंत्री पृथ्वीराज सिंह, रमेश कुमार, डॉ राम प्यारे मिश्रा, डॉ राहुल कुमार, ज्ञान ब्रह्म पाठक, डॉ संजय कुमार सिंह ने किया. कार्यक्रम का संचालन डॉ नवीन मिश्र व धन्यवाद ज्ञापन डॉ शैलेश मिश्र ने किया.

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