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Home झारखण्ड रामगढ़ पीवीयूएनएल में एसिड लीकेज मॉक ड्रिल, आपदा प्रबंधन तैयारियों की हुई जांच

पीवीयूएनएल में एसिड लीकेज मॉक ड्रिल, आपदा प्रबंधन तैयारियों की हुई जांच

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पीवीयूएनएल में एसिड लीकेज मॉक ड्रिल, आपदा प्रबंधन तैयारियों की हुई जांच
पतरातू में मॉक ड्रिल के मौके पर सीआईएसएफ और एनडीआरएफ की टीम. फोटो: प्रभात खबर

पतरातू से अजय कुमार तिवारी की रिपोर्ट

Ramgarh News: झारखंड के रामगढ़ जिले के पतरातू स्थित पतरातू विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (पीवीयूएनएल) में सोमवार को अम्ल रिसाव (एसिड लीकेज) पर आधारित मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया. इस अभ्यास का उद्देश्य आपदा और शत्रुतापूर्ण परिस्थितियों में सुरक्षा एजेंसियों तथा प्रबंधन की तैयारियों को परखना था. यह मॉक ड्रिल पीवीयूएनएल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एके सहगल के निर्देशन में संपन्न हुई. पूरे अभियान के दौरान आपातकालीन प्रतिक्रिया, सुरक्षा व्यवस्था और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय क्षमता का परीक्षण किया गया.

डीएम प्लांट में बनाई गई काल्पनिक आपदा स्थिति

मॉक ड्रिल के दौरान डीएम प्लांट स्थित अम्ल भंडारण टैंक क्षेत्र में काल्पनिक एसिड रिसाव की स्थिति उत्पन्न की गई. सूचना मिलते ही सुरक्षा एजेंसियां और राहत दल तुरंत सक्रिय हो गए. अभ्यास के तहत यह देखा गया कि किसी वास्तविक हादसे की स्थिति में सुरक्षा कर्मी कितनी तेजी से प्रतिक्रिया देते हैं और प्रभावित क्षेत्र को सुरक्षित बनाने में कितना समय लगता है. इस दौरान रिसाव प्रभावित क्षेत्र को घेरने, कर्मचारियों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने और राहत कार्यों का अभ्यास किया गया.

सीआईएसएफ-एनडीआरएफ की टीमों में दिखा तालमेल

मॉक ड्रिल में सेंट्रल इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी फोर्स (सीआईएसएफ) और नेशनल डिसास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (एनडीआरएफ) की टीमों ने संयुक्त रूप से हिस्सा लिया. दोनों एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय और त्वरित कार्रवाई देखने को मिली. टीमों ने सुरक्षा उपकरणों के साथ प्रभावित क्षेत्र में प्रवेश कर राहत एवं बचाव कार्यों का प्रदर्शन किया. आपदा प्रबंधन के तहत गैस मास्क, सुरक्षा किट और अन्य उपकरणों के इस्तेमाल का भी अभ्यास किया गया. अधिकारियों ने बताया कि इस प्रकार की मॉक ड्रिल से वास्तविक आपदा के समय कर्मचारियों और सुरक्षा एजेंसियों की कार्यक्षमता बेहतर होती है.

मेडिकल और एम्बुलेंस टीम भी रही अलर्ट

अभ्यास के दौरान अस्पताल और एम्बुलेंस टीम को भी पूरी तरह सक्रिय रखा गया था. घटना की सूचना मिलते ही मेडिकल टीम मौके पर पहुंची और काल्पनिक रूप से घायल लोगों को प्राथमिक उपचार देने का अभ्यास किया गया. एम्बुलेंस टीम को भी अलर्ट मोड में रखा गया ताकि जरूरत पड़ने पर घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया जा सके. इस दौरान आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं की तैयारियों का भी मूल्यांकन किया गया.

वरिष्ठ अधिकारियों ने लिया जायजा

मॉक ड्रिल के दौरान सुरक्षा अधिकारी, मुख्य महाप्रबंधक (परियोजना) तथा महाप्रबंधक (परियोजना) भी मौके पर पहुंचे और पूरे अभियान की निगरानी की. वहीं मुख्य कार्यकारी अधिकारी ए के सहगल और मानव संसाधन विभागाध्यक्ष नियंत्रण कक्ष में मौजूद रहकर पूरे ऑपरेशन पर नजर बनाए हुए थे. अधिकारियों ने ड्रिल के विभिन्न चरणों का अवलोकन किया और आवश्यक सुझाव भी दिए.

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आपदा से निपटने की क्षमता बढ़ाना उद्देश्य

पीवीयूएनएल प्रबंधन की ओर से बताया गया कि इस प्रकार की मॉक ड्रिल का मुख्य उद्देश्य आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करना है. साथ ही विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों, प्रबंधन और स्वास्थ्य सेवाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना भी इसका अहम हिस्सा है. प्रबंधन का कहना है कि औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा मानकों का पालन और समय-समय पर इस तरह के अभ्यास बेहद जरूरी हैं ताकि किसी भी संभावित दुर्घटना के दौरान जान-माल के नुकसान को कम किया जा सके. मॉक ड्रिल के सफल आयोजन के बाद अधिकारियों ने सभी टीमों की तत्परता और समन्वय की सराहना की.

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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