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सिदो-कान्हू ने की थी संगठित आंदोलन की शुरुआत : आजसू

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सिदो-कान्हू ने की थी संगठित आंदोलन की शुरुआत : आजसू

रामगढ़. आजसू जिला कार्यालय में सोमवार को हूल दिवस मनाया गया. मुख्य अतिथि पार्टी के केंद्रीय सचिव मनोज कुमार महतो ने सिदो-कान्हू के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया. मनोज कुमार महतो ने कहा कि सिदो-कान्हू ने 1855-56 में ब्रिटिश सत्ता, साहूकारों, व्यापारियों व जमींदारों के अत्याचार के खिलाफ विद्रोह की शुरुआत की. कहा कि इस विद्रोह को हूल आंदोलन के नाम से जाना जाता है. सिदो- कान्हू ने अंग्रेजों हमारी माटी छोड़ो का नारा दिया था. सिदो-कान्हू ने अंग्रजों के खिलाफ देश में संगठित आंदोलन की शुरुआत की. इसके परिणामस्वरूप अंग्रेजों को यहां से भागना पड़ा और देश को आजादी मिली. मौके पर राजेंद्र महतो, नीरज मंडल, कुलदीप वर्मा, नरेश महतो, कैलाश रजक, नंदू महतो, रेवालाल महतो, बिनय राम उपस्थित थे. संताल हूल आजादी की प्रथम जन क्रांति थी : फागू मांडू. झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय महासचिव फागू बेसरा के आवासीय कार्यालय परिसर में संताल हूल दिवस मनाया गया. इस दौरान वीर शहीद सिदो-कान्हू, चांद भैरव और वीरांगना फूलो -झानो की तस्वीर पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गयी. पार्टी के महासचिव फागू बेसरा ने कहा कि संताल हूल देश की आजादी की प्रथम जन क्रांति थी. सिदो-कान्हू के नेतृत्व में ब्रिटिश हुकूमत के विरोध में संताल हूल में लड़ते हुए हजारों वीरों ने बलिदान दिया था. विद्रोह को दबाने के लिए सेना को बुलाया गया. पूरे क्षेत्रों में मार्शल लागू कर दिया गया था.

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