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Home झारखण्ड रामगढ़ चितरपुर में चल रहा था सरसों तेल की रिपैकेजिंग का खेल, तभी दुकान पर पड़ गया छापा

चितरपुर में चल रहा था सरसों तेल की रिपैकेजिंग का खेल, तभी दुकान पर पड़ गया छापा

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चितरपुर में चल रहा था सरसों तेल की रिपैकेजिंग का खेल, तभी दुकान पर पड़ गया छापा
चितरपुर की दुकान में जांच करते फूड सेफ्टी विभाग के अधिकारी. फोटो: प्रभात खबर

चितरपुर से सुरेंद्र कुमार और शंकर पोद्दार की रिपोर्ट

Ramgarh News: रामगढ़ जिले के रजरप्पा थाना क्षेत्र स्थित चितरपुर गांगी जमुनी में सरसों तेल की संदिग्ध रिपैकेजिंग के मामले का खुलासा हुआ है. फूड सेफ्टी विभाग ने बुधवार को एक जनरल स्टोर पर छापेमारी कर बड़ी मात्रा में रखे सरसों तेल और रिपैकेजिंग से जुड़े सामान की जांच की. कार्रवाई के दौरान दुकान में अफरा-तफरी मच गई. अधिकारियों ने मौके से सरसों तेल का नमूना संग्रहित कर प्रयोगशाला जांच के लिए भेज दिया है. रिपोर्ट आने के बाद विभाग नियमानुसार आगे की कार्रवाई करेगा.

सूचना मिलने पर की गई संयुक्त कार्रवाई

फूड सेफ्टी विभाग को सूचना मिली थी कि गांगी जमुनी स्थित आदर्श राज जनरल स्टोर में बड़े पैमाने पर सरसों तेल की रिपैकेजिंग की जा रही है. सूचना के आधार पर फूड सेफ्टी ऑफिसर डेरिक तिग्गा और लुकेश रब्बानी पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे. कार्रवाई के दौरान रजरप्पा थाना के एसआई रंजीत महतो, अनिल सिंह और अशोक कुमार भी पुलिस बल के साथ मौजूद रहे. अधिकारियों को दुकान पर पहुंचते देख वहां हड़कंप मच गया. इसके बाद टीम ने दुकान और गोदाम में रखे तेल के कार्टून, पैकेट और अन्य खाद्य सामग्री की गहन जांच की.

बड़े पैक से छोटे पैकेटों में भरा जा रहा था तेल

फूड सेफ्टी ऑफिसर डेरिक तिग्गा ने बताया कि प्रारंभिक जांच में ऐसा प्रतीत हुआ कि बड़े पैक में मौजूद सरसों तेल को निकालकर दूसरे पैकेटों में भरने का काम किया जा रहा था. हालांकि, पूरे मामले की पुष्टि प्रयोगशाला जांच रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी. उन्होंने बताया कि मौके से सरसों तेल का नमूना लेकर लैब भेजा गया है. यदि जांच में खाद्य सुरक्षा मानकों का उल्लंघन या किसी प्रकार की मिलावट सामने आती है तो संबंधित प्रतिष्ठान के खिलाफ खाद्य सुरक्षा कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी.

फूड सेफ्टी लाइसेंस नहीं मिलने पर जारी किया नोटिस

निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने पाया कि संबंधित प्रतिष्ठान के पास फूड सेफ्टी विभाग का वैध लाइसेंस भी नहीं है. इस पर विभाग ने दुकानदार को नोटिस जारी करते हुए 30 दिनों के भीतर लाइसेंस बनवाने का निर्देश दिया है. अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि निर्धारित समय सीमा के भीतर लाइसेंस नहीं लेने पर जुर्माना लगाने के साथ अन्य कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी. छापेमारी के दौरान दुकान में रिपैकेजिंग मशीन और बड़ी मात्रा में तेल सहित अन्य खाद्य सामग्री के पैकेट भी मिले, जिनकी जांच जारी है.

पलामू की घटना के बाद बढ़ी सतर्कता

फूड सेफ्टी विभाग की यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है, जब हाल ही में पलामू जिले में कथित तौर पर मिलावटी तेल के सेवन से एक ही परिवार के पांच लोगों की मौत का मामला सामने आया था. इस घटना के बाद खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और सुरक्षा को लेकर विभाग ने निगरानी बढ़ा दी है. इसी कड़ी में संदिग्ध रिपैकेजिंग और खाद्य सामग्री की बिक्री से जुड़ी सूचनाओं पर लगातार कार्रवाई की जा रही है, ताकि उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के साथ किसी प्रकार का खिलवाड़ न हो.

बिचौलियों से सावधान रहने की अपील

फूड सेफ्टी ऑफिसर डेरिक तिग्गा ने दुकानदारों से फूड लाइसेंस बनवाने के नाम पर सक्रिय बिचौलियों से सावधान रहने की अपील की. उन्होंने बताया कि विभाग को जानकारी मिली है कि कुछ लोग प्रशिक्षण (ट्रेनिंग) का प्रमाणपत्र दिखाकर उसे ही फूड लाइसेंस बताकर दुकानदारों से पैसे वसूल रहे हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि फूड सेफ्टी लाइसेंस केवल रामगढ़ सदर अस्पताल परिसर स्थित फूड एंड ड्रग भवन से ही जारी किया जाता है. दुकानदार किसी भी एजेंट या बिचौलिये के माध्यम से आवेदन करने के बजाय सीधे विभाग से संपर्क करें.

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बिना लाइसेंस कारोबार पर पांच लाख तक जुर्माना

डेरिक तिग्गा ने चेतावनी देते हुए कहा कि बिना वैध फूड लाइसेंस के खाद्य कारोबार करना कानून का उल्लंघन है. ऐसे मामलों में खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत पांच लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है और आवश्यकता पड़ने पर अन्य कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है. उन्होंने कहा कि विभाग का उद्देश्य केवल कार्रवाई करना नहीं, बल्कि खाद्य कारोबारियों को नियमों के प्रति जागरूक करना भी है. साथ ही उपभोक्ताओं तक सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री पहुंचे, इसके लिए नियमित निरीक्षण और निगरानी अभियान आगे भी जारी रहेंगे.

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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