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Home झारखण्ड पलामू बेतला नेशनल पार्क में जीवाणु संक्रमण का खतरा, सैनिटाइजेशन का काम शुरू

बेतला नेशनल पार्क में जीवाणु संक्रमण का खतरा, सैनिटाइजेशन का काम शुरू

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बेतला नेशनल पार्क में जीवाणु संक्रमण का खतरा, सैनिटाइजेशन का काम शुरू

बेतला : कोरोना संक्रमण की संकट से जूझ रहे पूरे विश्व के बीच बेतला नेशनल पार्क जीवाणु संक्रमण की चपेट में आ गया है. एक सप्ताह के अंदर दो जंगली भैंसों (बायसन) की हुई मौत ने विभाग को चिंता में डाल दिया है. स्थानीय चिकित्सक चंदन देब ने दोनों की मौत का कारण बैक जोटीरियल इनफेक्शन बताया है, जबकि अभी लैब की रिपोर्ट आनी बाकी है. इसलिए विभागीय पदाधिकारी दावा के साथ यह नहीं कह रहे हैं कि मौत बैक्टीरियल संक्रमण से हुई है.

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संबंधित अधिकारी ने प्रभात खबर के प्रतिनिधि संतोष को बताया कि कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए पिछले कई दिनों से पूरे बेतला नेशनल पार्क में सैनिटाइजेशन का काम तो किया ही जा रहा था, अब जीवाणु संक्रमण से बचाव के लिए प्राकृतिक व कृत्रिम जलाशयों को संक्रमण मुक्त करने का काम शुरू कर दिया गया है. वहीं अन्य बीमार जंगली जानवरों की खोज शुरू कर दी गयी है. यह जानने की कोशिश की जा रही है कि संक्रमित होने के बाद मौत के शिकार हुए जंगली भैंसों की चपेट में कहीं कोई अन्य जानवर तो नहीं आया था.

अक्सर झुंड में रहने वाले जंगली भैंसों को लेकर विभागीय पदाधिकारियों को इस बात की आशंका है कि यदि संक्रमित बायसन अन्य बायसन के संपर्क में आये होंगे तो निश्चित रूप से वे भी संक्रमित हो गये होंगे, अथवा जिन जलाशयों में उन संक्रमित जंगली भैंसों के द्वारा पानी पीया गया होगा वह जलाशय भी संक्रमित हो गया होगा. इसलिए उस जलाशय में दूसरे जंगली जानवर भी पानी पीने से संक्रमित हो सकते हैं.

हजारों हिरण के अलावा बंदर, लंगूर, हाथी, सियार सहित पक्षी इन जलाशयों में पानी पीते हैं. राज्य के प्रधान मुख्य वन संरक्षक सह हेड ऑफ द फॉरेस्ट फोर्स के शशिनंद कुलियार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए विभागीय पदाधिकारियों को कई निर्देश दिये हैं. जिसके आलोक में पूरे बेतला नेशनल पार्क को अलर्ट पर रखा गया है. संक्रमण मुक्त करने के दिशा में हर संभव काम शुरू कर दिया गया है. शनिवार को बेतला रेंजर प्रेम प्रसाद के नेतृत्व में वनरक्षियों सहित अन्य वन कर्मियों के द्वारा संक्रमण की आशंका वाले पार्क क्षेत्र में चूने व अन्य सैनिटाइजर का छिड़काव किया गया.

वहीं कृत्रिम जलाशयों में पहले से मौजूद पानी को निकालकर शुद्ध जल भरा गया. ज्ञात हो कि बेतला नेशनल पार्क में प्राकृतिक जलाशयों के अलावे 50 सीमेंटेड वाटर टैंक बनाये गये हैं. जिसमें टैंकर से पानी की आपूर्ति करायी जाती है. वहीं, चतुरबथुआ, हथबझवा, नवा बांध आदि एक दर्जन से अधिक प्राकृतिक जलाशय व कई नाले हैं. बायसन की मौत जलाशयों के किनारे ही हुई है. पलामू टाइगर रिजर्व के क्षेत्र निदेशक वाईके दास के अलावा डिप्टी डॉयरेक्टर कुमार आशीष भी नजर बनाए हुए हैं.

बाघिन की मौत के बाद चर्चा में जंगली भैंसे

पिछले 15 फरवरी को बाघिन की हुई मौत के बाद से ही बेतला के जंगली भैंसे चर्चा में हैं. बाघिन की मौत का कारण बायसन का हमला ही बताया गया था. जंगली भैंसे जिन्हें बायसन अथवा गौर भी कहा जाता है, पलामू टाइगर रिजर्व ही नहीं बल्कि पूरे झारखंड के सिर्फ बेतला में ही 60 से 70 की संख्या में मौजूद हैं.

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