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वर्षा जल रोकने की व्यवस्था नहीं होना झारखंड का दुर्भाग्य : मंत्री

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वर्षा जल रोकने की व्यवस्था नहीं होना झारखंड का दुर्भाग्य : मंत्री

मेदिनीनगर. शहर के शिवाजी मैदान में सोमवार को जिला कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग के द्वारा पलामू जिला स्तरीय किसान मेला सह फसल प्रदर्शनी का आयोजन किया गया. मुख्य अतिथि राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने दीप प्रज्वलित कर किसान मेला का उद्घाटन किया. विभाग के पदाधिकारियों ने पौधा और अंग वस्त्र देकर अतिथियों का स्वागत किया. मंत्री श्री किशोर ने किसान मेला में पलामू के जनप्रतिनिधियों की अनुपस्थिति पर सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों को किसान हितों की रक्षा एवं कृषि के विकास के प्रति गंभीर होना चाहिए. कृषि के विकास के लिए जनप्रतिनिधियों व संबंधित विभाग के पदाधिकारियों को टीम भावना के साथ काम करना होगा. उन्होंने कहा कि हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, महाराष्ट्र में पलामू से काफी कम बारिश होती है, लेकिन वहां बारिश के जल को रोकने एवं सिंचाई की समुचित व्यवस्था है. इस कारण वहां के किसान खुशहाल हैं. सिंचाई के अभाव में पलामू सहित झारखंड के अधिकांश जिले की खेती किसानी प्रभावित है. वर्षा जल को रोकने के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं है. मंडल डैम सहित अन्य वृहत सिंचाई परियोजनाएं अपूर्ण हैं. झारखंड का यह दुर्भाग्य है कि बारिश के जल को रोकने की व्यवस्था नहीं की गयी. जिसके कारण सिंचाई के अभाव में कृषि के क्षेत्र में अपेक्षित विकास नहीं हुआ. आंकड़े चाहे जो भी हो, लेकिन 15 से 18 प्रतिशत खेत ही सिंचित हो रहा है. सिंचाई की व्यवस्था के बिना खेती किसानी मजबूत नहीं हो सकती. उन्होंने राज्य की पूर्ववर्ती भाजपा सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि बारिश जल को रोकने के लिए बड़े पैमाने पर डोभा बनाया गया था, लेकिन अब गांवों में डोभा का अस्तित्व भी दिखायी नहीं देता. ऐसी स्थिति में ग्रामीण अर्थव्यवस्था कैसे मजबूत होगी और किसान कैसे खुशहाल रहेंगे. आय वृद्धि के लिए किसानों को नकदी फसल उत्पादन पर विशेष ध्यान देने का सुझाव दिया. साथ ही पशुपालन, मछली पालन एवं बागवानी को बढ़ावा देने पर जोर दिया. मंत्री श्री किशोर ने कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए सिंचाई की समुचित व्यवस्था के साथ साथ पशुपालन, मछली पालन, दुग्ध उत्पादन, बागवानी के क्षेत्र में भी काम होना चाहिए. उन्होंने ग्रामीण महिलाओं को केसीसी का लाभ देने की जरूरत बतायी. कहा कि महिलाएं कृषि व पशुपालन के क्षेत्र में हमेशा सक्रिय रहती हैं. वह पलामू के सर्वांगीण विकास के लिए प्रयासरत हैं. किसानों के हितों के लिए पलामू में कृषि विश्वविद्यालय खोलने, कोल्ड स्टोरेज निर्माण, महुआ पर आधारित प्रोसेसिंग प्लांट लगाया जाना चाहिए. मेदिनीनगर में जलस्तर बरकरार रखने के लिए कोयल नदी पर बियर बनाने का प्रस्ताव दिया गया है. अगले वित्तीय वर्ष में इस योजना की स्वीकृति मिलनी है. विशिष्ट अतिथि डीडीसी शब्बीर अहमद ने कृषि के विकास के लिए सरकार के द्वारा संचालित योजनाओं की जानकारी दी. कहा कि जिले के किसान कृषि योजनाओं का लाभ उठा कर अपनी आय में बढ़ोतरी कर सकते हैं. उन्होंने कहा कि प्रगतिशील किसानों को कृषि तकनीक का उपयोग खेती किसानी में करना चाहिए. उन्होंने कहा कि शोध में यह पाया गया है कि पलामू की मिट्टी स्ट्राबेरी, अमरूद, संतरा, नींबू, पपीता, नाशपाती की खेती के लिए काफी उपयुक्त है. ऐसी स्थिति में पलामू के किसानों को इस तरह की खेती में दिलचस्पी लेना चाहिए. इस तरह की खेती से किसानों की आय में बढ़ोतरी होगी. क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र चियांकी के वैज्ञानिक प्रमोद कुमार एवं अन्य वैज्ञानिकों ने किसानों को कृषि तकनीक, उन्नत बीज, खाद की जानकारी दी. बताया कि कम पानी वाले फसल लगाना चाहिए. किसानों को कृषि तकनीक का उपयोग कर समूह में खेती करना चाहिए. विभिन्न विभाग के पदाधिकारी ने संचालित योजनाओं की जानकारी दी. मंत्री श्री किशोर ने फसल प्रदर्शनी एवं विभिन्न स्टालों का निरीक्षण किया. इस दौरान कृषि उत्पाद को बेहतर बताया. कृषि विभाग के द्वारा लगायी गयी सब्जी, फल की प्रदर्शनी उद्घाटन किया गया. किसान मेला में सहकारिता, कृषि, पशुपालन, मत्स्य, उद्यान, गव्य विकास, लीड बैंक के द्वारा स्टॉल लगा कर सरकार की योजनाओं की जानकारी दी गयी. क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र चियांकी के वैज्ञानिकों ने किसानों को खेती-किसानी की तकनीकी जानकारी दी. मौके पर विभागीय पदाधिकारी के अलावा काफी संख्या में किसान मौजूद थे.

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